मौन हुआ न जाने क्यों? शोर हुआ ना जाने क्यों? जान नहीं पाया अब तलक, कौन हूं मैं, कौन हूं?
Pithoragarh Travel Blog: पिथौरागढ़ जिसे प्रकृति ने अपने हाथों से सजाया है भाग -3

Pithoragarh Travel Blog: पिथौरागढ़ जिसे प्रकृति ने अपने हाथों से सजाया है भाग -3

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कल हम चम्पवात से बाहर निकल गए थे! चम्पवात जिला मुख्यालय से वैसे लोहाघाट १३ किलोमीटर दूर है लेकिन कल हमने जहाँ यात्रा को विराम दिया था वहां से ८ किलोमीटर की दूरी है लोहाघाट की! अब तक हमारे दोनों तरफ देवदार के वृक्षों की एक भरी पूरी शृंखला शुरू हो गयी थी !

पिथौरागढ़ जिसको प्रकृति ने अपने हाथों से सजाया ! भाग-1

पिथौरागढ़ जिसको प्रकृति ने अपने हाथों से सजाया ! भाग-1

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देव-भूमि चहुँ और बिखरी नैसर्गिक सुंदरता आपको अपने मोहपाश में बांध लेगी, अनायास ही आपके मुँह से निकल पड़ेगा वाह! जन्नत है यहाँ! केवल लिखने की बात नही, मैं दावे से कह सकता हूँ एक बार जाएंगे तो मन वहीं छोड़ आएंगे।

सफर में ‘Suffer’ से पड़ गया पाला, पत्रकार ने यूं बयां किया दर्द

सफर में ‘Suffer’ से पड़ गया पाला, पत्रकार ने यूं बयां किया दर्द

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भइय्या बड़े दिन हो गए थे, सरकारी बसों में सफर किये। कुछ तूफानी करते हैं के कीड़े ने काट खाया और मैं ले आया उत्तर प्रदेश परिहवन की एसी सेवा जनरथ के तीन टिकट हल्द्वानी से दिल्ली के।

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