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Which Type of Wheat is Best for Health? : ओट्स, रागी, ज्वार या गेहूं? न्यूट्रिशनिस्ट बता रही हैं आपके लिए कौन-सा आटा है सही

आज किसी भी किराना स्टोर की शेल्फ़ पर नज़र डालिए, तो साफ़ दिखता है कि भारतीय रोटी कितनी बदल चुकी है. ओट्स, मिलेट्स, सोया, मल्टीग्रेन, जौ—विकल्प भी अनगिनत हैं और भ्रम भी उतना ही. कभी जो रोटी एक साधारण रोज़मर्रा का भोजन थी, आज वह हेल्थ डिबेट बन चुकी है.

सच्चाई सोशल मीडिया के शोर से कहीं ज़्यादा सरल है: कोई एक “सबसे अच्छी” आटा नहीं होता. आपके लिए सही विकल्प आपकी मेटाबॉलिज़्म, जीवनशैली, शारीरिक सक्रियता, मौसम और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करता है. आटा बनाम चावल की बहस ट्रेंड्स और डाइट फॉलो करने से कम, और इस बात से ज़्यादा जुड़ी है कि आपका शरीर कैसे काम करता है. न्यूट्रिशनिस्ट खुशी छाबड़ा ने इंस्टाग्राम पर इसी सवाल का जवाब दिया—“आपके लिए कौन सा आटा सबसे बेहतर है?”

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ओट्स रोटी: शुगर कंट्रोल में मददगार, लेकिन हर पेट के लिए नहीं || Oats Roti: Helpful for Sugar Control, But Not for Every Stomach

ओट्स रोटी अक्सर ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए सुझाई जाती है. इसमें मौजूद सॉल्युबल फाइबर ग्लूकोज़ के अवशोषण को धीमा करता है, जिससे शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. डायबिटीज़ या हार्ट के मरीज़ों के लिए यह फायदेमंद हो सकती है.

लेकिन हर किसी का पाचन तंत्र ओट्स को आसानी से नहीं अपनाता. जिन लोगों को ब्लोटिंग या धीमी पाचन की समस्या रहती है, उनके लिए ओट्स भारी पड़ सकती है और पेट में गैस बना सकती है. अगर ओट्स की रोटी खाने के बाद पेट ज़्यादा भरा-भरा या गैसी लगता है, तो यह आपके लिए सही सुपरफूड नहीं है.

सोया रोटी: पोषण से भरपूर, लेकिन संदर्भ ज़रूरी || Soy Roti: Nutritious, but context is important

सोया रोटी उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन और आइसोफ्लेवोन्स के कारण शाकाहारियों, जिम जाने वालों और प्रोटीन की कमी से जूझ रहे लोगों के बीच लोकप्रिय है.

हालांकि, सोया जैविक रूप से एक्टिव होता है. थायरॉइड या हार्मोनल समस्याओं वाले लोगों के लिए इसे बिना सलाह नियमित रूप से लेना ठीक नहीं माना जाता. केंद्रित खाद्य पदार्थ होने के कारण सोया का उपयोग सोच-समझकर करना बेहतर है.

चावल के आटे की रोटी (अक्की रोटी): हल्की, लेकिन तेज़ असर वाली || Rice flour roti (Akki Roti): Light, but fast-acting

यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटन-फ्री होती है और पचाने में आसान होती है. कमजोर पाचन या रिकवरी के दौरान इसे अक्सर खाया जाता है. यह तुरंत ऊर्जा भी देती है और पेट पर हल्की पड़ती है.

लेकिन इसका असर ब्लड शुगर पर तेज़ होता है. चावल का आटा जल्दी पचता है, जिससे शुगर स्पाइक्स हो सकते हैं. इसलिए डायबिटीज़ या इंसुलिन रेज़िस्टेंस वाले लोगों के लिए इसे रोज़ाना खाना ठीक नहीं है.

ज्वार रोटी: संतुलित और पेट के अनुकूल || Rice flour roti (Akki Roti): Light, but fast-acting …

ज्वार में फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट्स और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं. यह दिल की सेहत को सपोर्ट करता है, पेट भरा रखने में मदद करता है और ग्लूटन सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए भी आमतौर पर ठीक रहता है. ज़्यादातर लोगों के लिए ज्वार रोज़ाना की रोटी के तौर पर अच्छा विकल्प है.

हालांकि, अगर पाचन बहुत धीमा है या पानी कम पिया जाता है, तो इसका फाइबर कभी-कभी कब्ज़ की समस्या बढ़ा सकता है.

बाजरा रोटी: ताक़तवर, लेकिन गर्म तासीर वाली || Millet Roti: Powerful, but heating in nature

बाजरा आयरन, ज़िंक और इंसॉल्युबल फाइबर से भरपूर होता है. पारंपरिक रूप से इसे ठंडे इलाकों या सर्दियों में खाया जाता रहा है. सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह ऊर्जा, सहनशक्ति और वज़न प्रबंधन में मदद करता है.

लेकिन बाजरा शरीर में गर्मी बढ़ाने वाला माना जाता है. एसिडिटी, IBS या अत्यधिक बॉडी हीट की समस्या वालों के लिए यह दिक्कत बढ़ा सकता है.

बेसन रोटी: शुगर-फ्रेंडली, लेकिन सीमित मात्रा में || Gram flour roti: Sugar-friendly, but in limited quantities

बेसन रोटी प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में मदद कर सकती है. इसलिए डायबिटीज़ या PCOS वाले लोगों में यह काफ़ी लोकप्रिय है.

लेकिन चने का आटा गैस बनाने वाला हो सकता है, खासकर तब जब पाचन कमजोर हो. अगर बेसन से बनी रोटी खाने के बाद ब्लोटिंग या भारीपन महसूस हो, तो इसे रोज़ की बजाय कभी-कभार ही लें.

मल्टीग्रेन रोटी: सिद्धांत में अच्छी, व्यवहार में अलग-अलग || Multigrain Roti: Good in theory, different in practice

मल्टीग्रेन रोटी पोषण के लिहाज़ से संतुलित हो सकती है—फाइबर, बी-विटामिन्स और मिनरल्स देती है—लेकिन तभी जब अनाज का मिश्रण सही हो. कई कमर्शियल मल्टीग्रेन आटे में गेहूं की मात्रा ज़्यादा होती है, जो ग्लूटन इन्टॉलरेंस वालों के लिए ठीक नहीं.

इसलिए लेबल पढ़ना और यह समझना ज़रूरी है कि “मल्टीग्रेन” में वास्तव में क्या-क्या शामिल है.

रागी रोटी: हड्डियों और शुगर कंट्रोल के लिए बेहतरीन ||Ragi Roti: Excellent for Bones and Sugar Control

रागी कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होता है. यह ब्लड शुगर कंट्रोल और हड्डियों की सेहत में मदद करता है, खासकर पोस्ट-मेनोपॉज़ल महिलाओं के लिए.

हालांकि, किडनी की समस्या या बहुत कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए इसकी अधिक मिनरल डेंसिटी डॉक्टर की सलाह के बिना उपयुक्त नहीं हो सकती.

जौ की रोटी: मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए कम आंकी गई || Barley bread: underrated for metabolic health

जौ में सॉल्युबल फाइबर होता है, जो इंसुलिन रिस्पॉन्स बेहतर करता है और लिवर व हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है. प्रीडायबिटीज़ या कोलेस्ट्रॉल की समस्या वाले लोगों के लिए यह काफ़ी उपयोगी हो सकता है. लेकिन जौ में ग्लूटन होता है, इसलिए ग्लूटन सेंसिटिव लोगों के लिए यह सही नहीं है.

समस्या तब आती है जब किसी एक अनाज को स्थायी समाधान मान लिया जाता है. भारतीय खान-पान की परंपरा विविधता, मौसमी भोजन और पाचन के अनुसार खाने पर आधारित रही है, न कि कठोर नियमों पर.

अगर कोई रोटी आपको ऊर्जावान रखती है, आरामदायक महसूस कराती है और कोई लक्षण नहीं देती, तो वही आपके लिए सही है. और अगर वही रोटी आपको फूला हुआ, सुस्त या असहज महसूस कराती है, तो उसकी पोषण संबंधी खूबियां भी कोई मायने नहीं रखतीं.

अच्छा पोषण सबसे “हेल्दी” अनाज की तलाश नहीं है, बल्कि उस अनाज को चुनना है जिसे आपका शरीर सच में उपयोग कर सके.

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