मलाणा गाँव ( Malana Village ) की वो सुबह शांत सी थी. हम ट्रेक के इस छोर पर खड़े थे. सामने गाँव ( Malana Village ) का नाम था.
मलाणा गाँव ( Malana Village ) की वो सुबह शांत सी थी. हम ट्रेक के इस छोर पर खड़े थे. सामने गाँव ( Malana Village ) का नाम था. नाम के इस बोर्ड को अभी तक तस्वीरों और वीडियो में ही देखा था. अब इसके सामने पहुँचकर ऐसा लग रहा था किसी मंज़िल पर पहुँच गया था. यहाँ से मैं उस सपाट ट्रैक को देख रहा था जो मलाणा गाँव ( Malana Village ) की तरफ़ जाता है. इस रास्ते पर मुझे कोई दिखाई नहीं दे रहा था. खैर, मैं सधे कदमों से आगे बढ़ा. यहाँ से नीचे कुछ दूरी तक सीढ़ियाँ थी जो अच्छी खांसी ऊँची थी. इसी वजह से मैं सधे कदमों से आगे बढ़ रहा था. आगे जाकर ये रास्ता उबड़ खाबड़ हो जाता है. हालाँकि मैंने अभी सीढ़ियाँ पार ही की थी कि बाईं तरफ़ एक बेहद पुराना घर दिखाई दिया. इस घर में जलाने के लिए लकड़ियाँ वग़ैरह रखी हुई थीं. ज़ाहिर सी बात थी ये सर्दी के लिए थी. पास में ही एक स्थानीय परिवार बैठा हुआ था. ये लोग मलाणा ( Malana Village ) से लौट रहे थे. इस परिवार में 4 महिलाएँ और एक लड़का था. मैंने लड़के से बातचीत शुरू की.
इस लड़के से मैने सबसे पहले उसका नाम पूछा. उससे नाम पूछने के बाद मैंने घर की जानकारी ली. उसने मुझे स्थानीय नामों को गिना दिया. खैर, यहाँ से विदा लेकर मैं आगे बढ़ा. इसके आगे रास्ता थोड़ा सही था. रास्ता देखकर हौंसला भी बढ़ गया. यहाँ एक लोहे का छोटा पुल था और नीचे पानी की छोटी सी धारा बह रही थी. मैं इस पुल से गुजरा तो मन में ख़्याल आया, कुछ देर रुक जाऊँ. हालाँकि, जल्दी पहुँचने का टार्गेट सिर पर सवार था इसलिए ऐसा कर न सका. इस पुल से पहले मुझे कुछ कैंप्स और कैफ़े भी दिखाई दिए थे. कुछ टूरिस्ट यहाँ बैठकर सुस्ता रहे थे. ये वो लोग थे जो मलाणा ( Malana Village ) से वापस आ चुके थे.
इस छोटे से ब्रिज से आगे बढ़ते ही मुझे रास्ते की बदली हुई तस्वीर दिखाई दी. कुछ ही मिनटों की ट्रेकिंग ने ऐसा थका दिया कि पूछिए मत. लगा कि घटों से ट्रेकिंग ही कर रहा हूँ. जब रहा नहीं गया तो कुछ कुछ देर की ट्रेकिंग के बाद रुकना शुरू कर दिया. यहाँ ये भी बता दूँ कि संजय और लकी भाई मुझे बहुत आगे पहुँच चुके थे. मैं रुकते रुकाते एक कैफ़ तक पहुँचा. यहाँ वो दोनों पहले से बैठे थे. मैं उनकी नज़रों में था सो नीचे से ही मेरा वेट भी कर रहे थे. यहाँ मैंने मैंगों ड्रिंक और बिस्किट लिया. ये दोनों ही एफआरपी से 50 पर्सेंट ज्यादा रेट पर थे.
ये छोटा जलपान करके हम आगे बढ़े. यहाँ से लगभग 10 मिनट की ट्रेकिंग के बाद हम एक प्राकृतिक जल स्रोत के पास पहुँचे. यहाँ पानी पिया, थोड़ी देर फिर बैठे. यहाँ एक बात और बता दूँ कि कैफ़े के रूप में छोटी छोटी दुकानें आने लगी थीं. इनमें टंगे तो पानी की बोतलें और चिप्स के पैकेट थे लेकिन हर दुकान से कोई हमारे पास आकर ये पूछने लगा कि भाई माल चाहिए क्या? हम इनकार करते करते थक गए लेकिन वो नहीं थके. एक लड़के ने तो पहले 2 हज़ार कहा, हमारे इनकार पर 1800, 1500 और 1200 पर भी आ गया. ग़ज़ब हाल था. लकी भाई ने बताया कि इन सभी में मिलावट होती है और ये असली मलाणा क्रीम ( Malana Cream ) नहीं होता है. बड़ी बात ये थी कि क्रीम बेचने वाले सभी लड़कों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे हवा में टंगे हों. उनकी जवानी, बुढ़ापे से भी बदतर लग रही थी. खैर, आगे क्या कमेंट करें, छोड़िए.
हम तो किसी मलाणा क्रीम ( Malana Cream) के जानकार का इंटरव्यू ही चाह रहे थे लेकिन ये ख्वाहिश पूरी कहां होने वाली थी. अब हम गाँव के अंदर दाखिल हो चुके थे. मलाणा गाँव ( Malana Village ) में जो टूरिस्ट भी आते हैं वो यहाँ आकर उसी दिन लौट जाते हैं लेकिन गाँव ( Malana Village ) में प्रवेश करते ही हमें दाहिनी तरफ़ एक रेस्टोरेंट दिखाई दिया जिसमें रुकने का बंदोबस्त भी था. मुझे ये देखकर हैरानी हुई. इसपर खाने के विभिन्न प्रकारों जैसे चाइनीज़, इज़रायली फ़ूड भी लिखा था. मुझे लगा ये तो सही जुगाड़ है, लोग रुक सकते हैं, बाहर फ़ालतू में अफ़वाहें फैली हुई हैं.
मलाणा ( Malana Village ) ट्रिप से पहले मन में ये बड़ा सवाल था कि वहाँ कैमरा कैसे ऑन करेंगे. मैंने जितना सुना था वो ये था कि वहाँ कैमरा अलाउड नहीं है. हालाँकि लकी भाई को शुक्रिया जो उनकी वजह से न सिर्फ़ हमें कैमरे को ऑन करने का हौसला मिला बल्कि हमें काफ़ी ज़रूरी बातें भी इस गाँव के बारे में पता चली. अगले ब्लॉग में जानिए मलाणा गाँव की कहानी ( Malana Village Story ) , ऋषि जमदग्नि का इतिहास ( Rishi Jamdagni History ) और भी कई चीज़ें इस गाँव के बारे में. हाँ, गाँव ( Malana Village ) से जुड़े वीडियो ज़रूर देखिएगा. इसके लिए आपको चैनल पर भी जाने के ज़रूरत नहीं. हमने आपके लिए इसे एंबेड कर दिया है.
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