Lifestyle

Kali Puja 2023 : काली पूजा 2023 कब है? जानिए तिथि, समय, महत्व और अनुष्ठान

Kali Puja 2023 : काली पूजा एक हिंदू त्योहार है जो देवी काली की पूजा को समर्पित है. इसे श्यामा पूजा या महानिशा पूजा के नाम से भी जाना जाता है.यह मुख्य रूप से भारत में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश और नेपाल में भी मनाया जाता है. काली पूजा हिंदू माह आश्विन की अमावस्या के दिन पड़ती है और 2023 में इसे 12 नवंबर को मनाए जाने की उम्मीद है.

काली पूजा की सही तारीख हर साल अलग-अलग हो सकती है क्योंकि यह चंद्र कैलेंडर के अनुसार होती है. हिंदू मान्यता के अनुसार, देवी काली देवी दुर्गा का उग्र रूप हैं और शक्ति, ताकत और सुरक्षा से जुड़ी हैं. माना जाता है कि काली पूजा का त्योहार वह समय होता है जब देवी अपने भक्तों को आशीर्वाद देने और दुनिया को बुरी ताकतों से छुटकारा दिलाने के लिए पृथ्वी पर अवतरित होती हैं.

काली पूजा का महत्व || Importance of Kali Puja

काली पूजा का हिंदू पौराणिक कथाओं में बहुत महत्व है और यह बंगालियों की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में गहराई से निहित है. यह त्योहार मुख्य रूप से देवी काली और राक्षस रक्तबीज पर उनकी जीत के सम्मान में मनाया जाता है.

पौराणिक कथा के अनुसार, रक्तबीज के पास अपने रक्त की एक बूंद से भी खुद को गुणा करने की शक्ति थी. हालांकि, देवी काली उसका खून जमीन पर छूने से पहले ही पीकर उसे हराने में सक्षम थीं.  इसलिए, उन्हें “श्यामा” नाम मिला, जिसका बंगाली में अर्थ होता है अंधेरा.

काली पूजा का समय || kali puja time

काली पूजा हिंदू माह आश्विन की अमावस्या या अमावस्या को पड़ती है, जो आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर के महीने में आती है. इस वर्ष द्रिक पंचांग के अनुसार काली पूजा 12 नवंबर को मनाई जाने की उम्मीद है.

अमावस्या तिथि: यह 12 नवंबर को दोपहर 02:44 बजे शुरू होगी और 13 नवंबर को दोपहर 02:56 बजे समाप्त होगी.
काली पूजा निशिता समय: 12 नवंबर को रात 11:39 बजे से है और रात 12:29 बजे (13 नवंबर) तक जारी रहेगी.

काली पूजा के अनुष्ठान || Kali Puja Rituals

पूजा अनुष्ठान अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग होते हैं, लेकिन कुछ सामान्य अनुष्ठान होते हैं जिनका पालन अधिकांश लोग करते हैं. इसमे शामिल है:

कलश स्थापना – पानी और आम के पत्तों से भरा एक कलश (बर्तन) एक पवित्र मंच पर रखा जाता है, और उसके ऊपर एक नारियल रखा जाता है. यह देवी की उपस्थिति को दर्शाता है.

पंचोपचार पूजा – देवी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें फूल, धूप, दीप, जल और भोजन की पांच आहुतियां अर्पित की जाती हैं.

मंत्र जाप – भक्त देवी काली को समर्पित मंत्रों का जाप करते हैं, उनका आशीर्वाद और सुरक्षा चाहते हैं.

भोग चढ़ाना – देवी को प्रसाद के रूप में विशेष व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जिनमें नारियल के लड्डू और फल जैसी मिठाइयां शामिल होती हैं.

आरती – आरती घी या तेल और कपूर से भरे दीपक से की जाती है, जबकि देवी काली की स्तुति में भक्ति गीत गाए जाते हैं.

पशु बलि – कुछ क्षेत्रों में, देवी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए एक अनुष्ठानिक पशु बलि भी दी जाती है.

Recent Posts

Sindoor Khela:मां दुर्गा की विदाई पर क्यों खेलती हैं महिलाएं सिंदूर?

Sindoor Khela : दुर्गा पूजा का उत्सव पश्चिम बंगाल सहित पूरे देश में धूमधाम से… Read More

1 week ago

Devi Durga Temples in India : भारत में 16 प्रसिद्ध दुर्गा मंदिरों के दर्शन जरूर करें

Devi Durga Temples in India : भारत में देवी दुर्गा के ऐसे मंदिर जहां नवरात्रि… Read More

2 weeks ago

History of Ramlila Maidan : दिल्ली का वह मैदान, जहां से कई बड़े आंदोलन हुए

History of Ramlila Maidan : दिल्ली का रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) केवल धार्मिक आयोजनों के… Read More

2 weeks ago

Kali Gandaki River flood in Nepal: हिमालय से निकलकर गंगा में मिलने वाली नदी की पूरी कहानी

History of the Kali Gandaki River: भारत और नेपाल की प्रमुख नदियों में शामिल काली… Read More

3 weeks ago

सरोजिनी नगर का Shri Vinayak Mandir क्यों है खास? जानें इतिहास और मान्यताएं

Shri Vinayak Mandir : दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित Shri Vinayak Mandir इन दिनों चर्चा… Read More

3 weeks ago