हरिद्वार के 12 मंदिर जहां हर भक्त को एक बार अवश्य जाना चाहिए
Temples In Haridwar : हरिद्वार भारत के उन पवित्र नगरों में शामिल है जहां धर्म, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। “हरि का द्वार” कहलाने वाला हरिद्वार गंगा नदी के किनारे बसा है और इसे हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यहां के मंदिर न केवल पूजा-अर्चना का केंद्र हैं, बल्कि आत्मशांति, ध्यान, योग और संस्कृति से जुड़ने का माध्यम भी हैं।
हरिद्वार में अनेक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। गंगा स्नान, पूजा, ध्यान, यज्ञ और पर्वों के आयोजन से यह शहर जीवंत बना रहता है। विशेषकर गंगा आरती, नवरात्रि, कुंभ मेला जैसे धार्मिक आयोजनों में यहाँ हजारों-लाखों भक्त एक साथ दर्शन करते हैं।
चंडी देवी मंदिर
मनसा देवी मंदिर
वैष्णो देवी मंदिर
गंगा मंदिर
सती कुंड
पवन धाम मंदिर
दक्ष महादेव मंदिर
जैन मंदिर
भारत माता मंदिर
नीलेश्वर मंदिर
माया देवी मंदिर
महा मृत्युंजय मंदिर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हरिद्वार के प्रमुख मंदिरों की सूची
हरिद्वार रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) से ये मंदिर आसानी से पहुंचे जा सकते हैं। पहाड़ी पर स्थित कुछ मंदिरों तक उड़नखटोला सेवा से पहुंचा जा सकता है।
हरिद्वार का चंडी देवी मंदिर देवी चंडी (चंडी माता) को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और लोकप्रिय मंदिर है। यह मंदिर नील पर्वत की चोटी पर स्थित है और यहाँ से गंगा नदी तथा हरिद्वार का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। मान्यता है कि यहाँ माँ चंडी ने असुरों का वध कर पृथ्वी की रक्षा की थी। इसलिए इसे शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक एवं पौराणिक महत्व
चंडी देवी की कथा: देवी चंडी, मां दुर्गा का उग्र रूप मानी जाती हैं। पुराणों के अनुसार यहाँ देवी ने महिषासुर और शुंभ-निशुंभ जैसे दुष्टों का संहार किया था। इसी कारण यहाँ पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है और मानसिक बल प्राप्त होता है।
नवरात्रि और विशेष पर्व: नवरात्रि, चंडी चौदस और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहाँ भारी संख्या में श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। कहा जाता है कि देवी चंडी की आराधना करने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
तीर्थ स्थल: यह मंदिर पंच तीर्थों में शामिल है और इसे हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
मंदिर की विशेषताएं
नील पर्वत की चोटी पर स्थित: मंदिर तक पहुँचने के लिए रोपवे या पैदल मार्ग उपलब्ध है। चोटी से हरिद्वार का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है।
शक्ति की उपासना का केंद्र: यहाँ देवी चंडी की मूर्ति की पूजा से भक्तों को आत्मबल, सुरक्षा और संकल्प की प्राप्ति होती है।
रोपवे सेवा: मंदिर तक पहुँचने के लिए आधुनिक रोपवे की सुविधा उपलब्ध है। इसके माध्यम से आसानी से चोटी तक पहुँच सकते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य: पहाड़ी मार्ग, हरियाली और गंगा का दृश्य यात्रियों को शांति और ऊर्जा प्रदान करता है।
धार्मिक उत्सव: नवरात्रि, चंडी चौदस और शिवरात्रि पर विशेष पूजा, भजन, हवन और धार्मिक आयोजन होते हैं।
घूमने का सबसे अच्छा समय
फरवरी से अक्टूबर तक का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
नवरात्रि के समय विशेष सजावट और पूजा का आयोजन होता है।
सर्दियों में मौसम सुहावना होता है और यात्रा आसान रहती है।
मंदिर का समय
सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक – मंदिर प्रतिदिन खुला रहता है।
पर्वों के समय विशेष पूजा का आयोजन होता है।
आसपास घूमने की जगहें
अलकनंदा घाट – गंगा स्नान और ध्यान के लिए प्रसिद्ध।
परमार्थ आश्रम – योग और आध्यात्मिक साधना का केंद्र।
राजाजी राष्ट्रीय गार्डन– प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का स्थान।
चंडी देवी मंदिर हरिद्वार के धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह मंदिर न केवल देवी की पूजा का स्थल है बल्कि साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति का प्रतीक भी है। यहां आने से भक्तों को शक्ति, सुरक्षा और जीवन में सकारात्मकता का अनुभव होता है। यदि आप हरिद्वार की यात्रा कर रहे हैं तो चंडी देवी मंदिर का दर्शन अवश्य करें, यह आपके मन और आत्मा को नई ऊर्जा और श्रद्धा से भर देगा।
हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर देवी मनसा को समर्पित है और यह शहर का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह मंदिर बिल्व पर्वत की चोटी पर स्थित है और यहाँ से पूरे हरिद्वार शहर का मनमोहक नज़ारा दिखाई देता है। मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री माना जाता है। श्रद्धालु विश्वास करते हैं कि यहाँ दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
धार्मिक और पौराणिक महत्व
देवी मनसा की उत्पत्ति: मान्यता है कि देवी मनसा भगवान शिव के मन से प्रकट हुईं। इसलिए उन्हें मानसिक शक्तियों और इच्छाओं की पूर्ति का आशीर्वाद देने वाली देवी माना जाता है।
तीर्थ स्थल: यह मंदिर हरिद्वार के पंच तीर्थों में शामिल है। यहां श्रद्धालु विशेष पूजा, संकल्प और जप करते हैं।
मनोकामना पूर्ण स्थल: भक्त अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहां पूजा करते हैं। विशेष रूप से नवरात्रि, श्रावण मास और अन्य पर्वों में मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
मंदिर की विशेषताएं
ऊंचाई पर स्थित: बिल्व पर्वत की चोटी पर होने के कारण मंदिर से हरिद्वार का सुंदर व्यू दिखाई देता है।
मानसिक शांति का स्थल: यहां ध्यान, जप और पूजा करने से मन को गहरी शांति मिलती है।
प्राकृतिक वातावरण: आसपास हरियाली, पहाड़ी मार्ग और गंगा का सौंदर्य भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
रोपवे सेवा: मंदिर तक पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है जिससे श्रद्धालु आसानी से ऊपर पहुँच सकते हैं।
त्योहारों में विशेष आयोजन: नवरात्रि, शिवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहाँ विशेष पूजा, हवन और आरती का आयोजन होता है।
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च: मौसम सुहावना होता है और यात्रा के लिए परफेक्ट समय है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष उत्सव होता है।
मंदिर का समय
सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक – प्रतिदिन खुला रहता है।
पर्वों के समय पूजा और आरती के विशेष आयोजन होते हैं।
निकटवर्ती स्थल: गुरुद्वारा नादासाहिब, टाउन पार्क, कैक्टस गार्डन
यह मंदिर जम्मू-कश्मीर के वैष्णो देवी मंदिर जैसा है। यहां गुफाएं और सुरंगें हैं जिन्हें पार कर मंदिर तक पहुंचा जाता है.
घूमने का समय: अक्टूबर से मार्च
समय: सुबह 8 बजे – शाम 8 बजे
नजदीकी स्थल: बीटल्स आश्रम, राम तल बॉटनिकल गार्डन, सप्तऋषि आश्रम
हर की पौड़ी हरिद्वार का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र स्थल है। गंगा नदी के तट पर स्थित यह घाट न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और आरती में भाग लेने आते हैं। ‘हर की पौड़ी’ का अर्थ है – “हरि यानी भगवान विष्णु के चरणों का स्थान”। मान्यता है कि यहाँ स्वयं भगवान विष्णु के चरण पड़े थे, इसलिए इस घाट को विशेष पवित्र माना जाता है।
धार्मिक महत्व
अमृत बूँदों की कथा: समुद्र मंथन के समय अमृत की बूँदें इस स्थान पर गिरी थीं। इसलिए यहाँ स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु से जुड़ी मान्यता: ‘हर की पौड़ी’ शब्द का अर्थ भगवान विष्णु के चरणों से जुड़ा है। कहा जाता है कि यहाँ स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कुंभ मेला और अर्धकुंभ का आयोजन: हर की पौड़ी कुंभ और अर्धकुंभ मेले के मुख्य आयोजन स्थलों में शामिल है। यहाँ लाखों श्रद्धालु एक साथ स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
गंगा आरती – हर की पौड़ी का प्रमुख आकर्षण
हर की पौड़ी की शाम की गंगा आरती विश्व प्रसिद्ध है। यह आरती सूर्यास्त के समय प्रतिदिन होती है और इसमें दीप, फूल, मंत्रों और घंटियों की गूंज वातावरण को दिव्यता से भर देती है। श्रद्धालु गंगा जल में दीप प्रवाहित कर अपने जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। आरती का आयोजन बड़े विधि-विधान से होता है जिसमें पुरोहित वेद मंत्रों का उच्चारण करते हैं और भक्त तालियों के साथ उत्साह से भाग लेते हैं।
आरती का समय:
सुबह की आरती – सूर्योदय से पहले लगभग 5:00 बजे से 6:50 बजे तक
शाम की आरती – सूर्यास्त के समय लगभग 5:00 बजे से 7:00 बजे तक
(समय मौसम और सूर्य की गति के अनुसार बदल सकता है।)
प्रमुख विशेषताएं
गंगा स्नान: हर की पौड़ी पर गंगा स्नान करना पुण्य प्राप्ति का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है।
दीपदान: शाम की आरती में जलती हुई दीयों को गंगा में प्रवाहित करने की परंपरा है, जो जीवन में प्रकाश, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक है।
घंटियों और शंख की ध्वनि: आरती के समय मंदिरों की घंटियाँ और शंख की ध्वनि आध्यात्मिक वातावरण को और भी गहरा बनाती है।
फोटोग्राफी और पर्यटन: यहां की प्राकृतिक सुंदरता, गंगा का प्रवाह, पर्वों के समय सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
धार्मिक अनुष्ठान: श्रद्धालु यहां पूजा, हवन, जप, ध्यान और संकल्प लेकर गंगा जल से स्नान करते हैं।
घूमने का समय: फरवरी से अक्टूबर
समय: दिनभर खुला
नजदीकी स्थल: क्रिस्टल वर्ल्ड, राजाजी राष्ट्रीय गार्डन, भूमा निकेतन
सती कुंड, जिसे यज्ञ कुंड भी कहा जाता है, देवी सती की कथा से जुड़ा है। कहा जाता है कि यहां देवी सती ने अग्नि में अपने प्राण त्यागे थे।
घूमने का समय: फरवरी से अक्टूबर
समय: सुबह 9 बजे – रात 9 बजे
निकटवर्ती स्थल: गंगा घाट, भूमा निकेतन, आमरपुर घाट
यह मंदिर वायु देव को समर्पित है और अपनी सुंदर काँच की सजावट के लिए प्रसिद्ध है। आधुनिक निर्माण और प्राचीन परंपरा का सुंदर मिश्रण है।
घूमने का समय: अक्टूबर से मार्च
समय: सुबह 6 बजे – रात 8 बजे
निकटवर्ती स्थल: भीमगोडा टैंक, शांति कुंज, चिल्ला वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी
यह मंदिर दक्षेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ सती कुंड और हजार वर्ष पुराना बरगद का पेड़ है। महाशिवरात्रि पर मंदिर की साज-सज्जा अद्भुत होती है।
घूमने का समय: जुलाई – अगस्त
समय: सुबह 4 बजे – शाम 7 बजे
निकटवर्ती स्थल: कुंजापुरी मंदिर ट्रेक, लक्ष्मण झूला, नील धारा पक्षी विहार
दो मंज़िलों वाला यह मंदिर तीर्थंकर आदिनाथ और चिंतामणि पार्श्वनाथ को समर्पित है।
घूमने का समय: अप्रैल से जून
समय: सुबह 6 बजे – रात 8 बजे
निकटवर्ती स्थल: जय राम आश्रम, किमाड़ी, आनंदमयी आश्रम
आठ मंज़िला यह मंदिर भारत माता को समर्पित है। यहां देशभक्तों और देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
घूमने का समय: अक्टूबर से मार्च
समय: सुबह 5 बजे – रात 9 बजे
निकटवर्ती स्थल: फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, साई दरबार मंदिर, एडवेंचर पार्क
भगवान शिव के भक्त ‘नील’ द्वारा निर्मित यह प्राचीन मंदिर शिव को समर्पित है।
घूमने का समय: अक्टूबर से अप्रैल
समय: सुबह 6 बजे – रात 8 बजे
निकटवर्ती स्थल: भीमगोडा बैराज, पवन धाम, श्री प्रेम नगर आश्रम
यह मंदिर शक्ति पीठों में से एक है। कहा जाता है कि देवी सती का हृदय और नाभि यहां गिरी थी।
घूमने का समय: अगस्त से अक्टूबर
समय: सुबह 6 बजे – दोपहर 12 बजे और शाम 4 बजे – रात 8 बजे
निकटवर्ती स्थल: नील धारा पक्षी विहार, पराद शिवलिंग, क्रिस्टल वर्ल्ड
भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर उगते सूर्य की दिशा में स्थित है। शिवलिंग की आँख जैसी आकृति इसे भारत में अद्वितीय बनाती है।
घूमने का समय: सितंबर से नवंबर
समय: सुबह 4:30 बजे – दोपहर 12 बजे और दोपहर 1 बजे – शाम 7 बजे
निकटवर्ती स्थल: श्री प्रेम नगर आश्रम, राम झूला, गंगा घाट
हरिद्वार भारत की धार्मिक आस्थाओं और संस्कृति का प्रतीक है। यहाँ हर मंदिर भक्ति, परंपरा और संस्कृति का संगम है। चाहे मansa देवी हो या गंगा घाट – हर जगह मन को शांति और आत्मा को संतुलन प्रदान करती है।
प्रश्न 1: क्या मनसा देवी मंदिर तक पहुंचने का कोई और रास्ता है?
उत्तर: हां। जिन लोगों को उड़नखटोला से यात्रा करना पसंद नहीं है, उनके लिए टैक्सी और निजी वाहन की सुविधा उपलब्ध है।
प्रश्न 2: गंगा आरती का समय क्या है?
उत्तर: गंगा आरती दिन में दो बार होती है – सुबह 5 बजे से 6:50 बजे और शाम 5 बजे से 7 बजे के बीच। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार समय बदल सकता है।
प्रश्न 3: मंदिरों के घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर: अक्टूबर से फरवरी तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि मौसम ठंडा और सुहावना रहता है।
प्रश्न 4: हरिद्वार के पांच मुख्य तीर्थ कौन से हैं?
उत्तर: गंगाद्वार (हर की पौड़ी), कुशवर्त घाट, कांकhal, बिल्व तीर्थ (मansa देवी मंदिर), नील पर्वत (चंडी देवी)।
प्रश्न 5: हरिद्वार का सबसे पुराना मंदिर कौन सा है?
उत्तर: मansa देवी मंदिर 19वीं सदी में बना हरिद्वार का सबसे पुराना मंदिर है।
प्रश्न 6: हरिद्वार किस मंदिर के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: मansa देवी मंदिर हरिद्वार में सबसे प्रसिद्ध है। देवी मansa को शakti का स्वरूप माना जाता है।
प्रश्न 7: हर की पौड़ी किसके लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय अमृत की बूँदें यहाँ गिरी थीं। इसलिए यहाँ स्नान करने से पापों का नाश होता है।
प्रश्न 8: हरिद्वार के तीन देवी मंदिर कौन से हैं?
उत्तर: मansa देवी, चंडी देवी और माया देवी मंदिर।
प्रश्न 9: चंडी देवी दर्शन का समय क्या है?
उत्तर: सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक। आरती सुबह 5:30 बजे होती है।
प्रश्न 10: चंडी देवी रोपवे का टिकट कितना है?
उत्तर: एक व्यक्ति का टिकट ₹163 है। दोनों मंदिरों (चंडी देवी और मनसा देवी) का दो तरफा टिकट ₹350 में उपलब्ध है।
प्रश्न 11: क्या मंदिरों के पास रहने की व्यवस्था उपलब्ध है?
उत्तर: हाँ। यहाँ होटल, धर्मशाला, लॉज और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। धर्मशाला सबसे किफायती और मंदिरों के करीब होती है।
प्रश्न 12: क्या एक दिन में सभी मंदिर घूमे जा सकते हैं?
उत्तर: हां, लेकिन समय सीमित होगा। पहले से अपनी यात्रा की योजना बनाकर कुछ मंदिरों को ही प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
प्रश्न 13: मंदिरों में जाने का ड्रेस कोड क्या है?
उत्तर: यहाँ पारंपरिक कपड़े पहनना आवश्यक है। अधिकतर मंदिरों में वेस्टर्न या छोटे कपड़ों पर रोक है।
प्रश्न 14: हरिद्वार के पास कौन सा एयरपोर्ट है?
उत्तर: जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) सबसे नजदीक है, जो हरिद्वार से 37 किमी दूर है।
प्रश्न 15: क्या मंदिरों तक सार्वजनिक परिवहन से पहुंचा जा सकता है?
उत्तर: हां। बस, टैक्सी और ऑटो रिक्शा जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। कुछ विशेष बस सेवाएं मंदिर पर्यटन के लिए चलती हैं।
Basant Panchami 2026 : बसंत पंचमी 2026 कब है और इससे जुड़ी जानकारियां क्या क्या… Read More
Jhansi City in Uttar Pradesh : उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित झांसी एक… Read More
jain temple sonagiri datia मध्य प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक जैन तीर्थ क्षेत्र है. आइए… Read More
Shri Mahalakshmi Temple Jhansi : झांसी के महालक्ष्मी मंदिर का क्या है इतिहास? जानें मंदिर… Read More
Rani Mahal Jhansi History Fact Tour Guide : झांसी का रानी महल महारानी लक्ष्मीबाई के… Read More
Raja Gangadhar Rao ki Chatri : झांसी में स्थित गंगाधर राव की छत्री उनकी मृत्यु… Read More