Sonagiri Jain Temple: मध्य प्रदेश का पवित्र जैन तीर्थ स्थल
Jain Temple Sonagiri Datia : सोनागिरि उत्तर मध्य प्रदेश में स्थित जैन धर्म का एक पवित्र तीर्थ स्थल है। यह दतिया जिले में, ग्वालियर शहर से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। सोनागिरि अपने जैन मंदिरों के विशाल समूह के लिए फेमस है। यहां के मंदिर 9वीं शताब्दी से लेकर विभिन्न कालखंडों में निर्मित किए गए हैं। यह स्थान जैन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जहां आत्म-संयम, तपस्या और साधना के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
“सोनागिरि” नाम दो शब्दों से मिलकर बना है-“सोना” अर्थात स्वर्ण और “गिरि” अर्थात पर्वत, यानी “स्वर्ण पर्वत”। जैन मान्यताओं के अनुसार इस भूमि पर अनेक संतों ने निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया है। जैन ग्रंथों के अनुसार आठवें तीर्थंकर के काल से ही बड़ी संख्या में संतों ने यहां मोक्ष प्राप्त किया, इसलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
सोनागिरि जैन धर्म का एक प्राचीन और पवित्र स्थल है, जो मध्य प्रदेश के दतिया जिले में, ग्वालियर से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सोनागिरि का अर्थ है स्वर्ण शिखर। मान्यता है कि यहां से लगभग पांच करोड़ तपस्वी संतों ने मोक्ष प्राप्त किया। यह पवित्र स्थान जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु के समय से फेमस है।
सोनागिरि की पहाड़ी पर स्थित इस स्थल को भगवान चंद्रप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त माना जाता है। यहां 9वीं और 10वीं शताब्दी के सुंदर श्वेत जैन मंदिर स्थित हैं। ऐसा विश्वास है कि राजा नंगनाग कुमार ने अपने डेढ़ करोड़ अनुयायियों के साथ यहीं मोक्ष प्राप्त किया।
सोनागिरि में कुल 77 श्वेत मंदिर हैं, जो इस स्थान के प्रमुख आकर्षण हैं। इनमें से मंदिर संख्या 54 (कुछ मान्यताओं में मुख्य मंदिर) भगवान चंद्रप्रभु को समर्पित है। यह मंदिर भव्य और सुंदर नक्काशी से युक्त है। यहां भगवान शीतलनाथ और पार्श्वनाथ की लगभग 11 फीट ऊंची प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो प्रमुख आकर्षण हैं।
यह स्थान “लघु सम्मेद शिखर” के नाम से भी जाना जाता है और लगभग 133 वर्ग एकड़ क्षेत्र में फैली दो पहाड़ियों पर स्थित है। आचार्य भर्तृहरि और शुभचंद्र जैसे प्रसिद्ध आचार्यों ने यहां रहकर आध्यात्मिक साधना की। अनेक विद्वान संतों ने इस स्थल पर मोक्ष प्राप्त किया। जैन संतों और श्रद्धालुओं के लिए मोक्ष सर्वोच्च लक्ष्य रहा है और सोनागिरि की शांत, आध्यात्मिक वातावरण ध्यान और साधना के लिए आदर्श माना जाता है।
सोनागिरि का प्रत्येक मंदिर अपनी शैली और वास्तुकला में अलग है। यहां एक नारियल के आकार का कुंड भी है, जो चट्टान को काटकर बनाया गया है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा “रिंगिंग रॉक” भी एक प्रसिद्ध स्थल है, जहां एक विशेष पत्थर पर प्रहार करने से धातु जैसी ध्वनि निकलती है।
सोनागिरि की पहाड़ी पर कुल 77 मंदिर स्थित हैं। सभी मंदिर श्वेत रंग के हैं और ऊँचे शिखरों से सुशोभित हैं। मंदिर संख्या 57 को मुख्य मंदिर माना जाता है। आचार्य शुभचंद्र और भर्तृहरि ने यहां रहकर आध्यात्मिक साधना की थी। कुंडलपुर, गिरनार जैन मंदिर, दिलवाड़ा मंदिर और शिखरजी की तरह सोनागिरि मंदिर परिसर भी अपनी समृद्ध वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
मुख्य मंदिर और प्रतिमा
मंदिर संख्या 57 सोनागिरि का मुख्य मंदिर है। यह विशाल आकार का है और इसका शिखर अत्यंत आकर्षक है। इस मंदिर में मुख्य देवता भगवान चंद्रप्रभु की 11 फीट (3.4 मीटर) ऊँची प्रतिमा स्थापित है, जिन्हें “बड़े बाबा” के नाम से जाना जाता है। मुख्य वेदी के दोनों ओर शीतलनाथ और पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं के साथ दो वेदियाँ स्थित हैं।
मंदिर परिसर में 43 फीट ऊँचा मानस्तंभ और समवसरण का सुंदर मॉडल भी स्थापित है। समवसरण मंदिर में समवसरण का भव्य शिल्प रूप देखने को मिलता है, जिसमें आधार पर गोलाकार स्तर, ऊपर वर्गाकार मंडप और मध्य में चतुर्मुखी जिन प्रतिमा स्थापित है।
यह मंदिर जैन श्रद्धालुओं में अत्यंत लोकप्रिय है और इसे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन सहित यूरोप के कई राष्ट्राध्यक्षों ने भी देखा है।
सोनागिरि मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित जैन धर्म का अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। जैन मान्यताओं के अनुसार यह वह भूमि है, जहां हजारों नहीं बल्कि असंख्य जैन संतों और मुनियों ने कठोर तपस्या, संयम और साधना के माध्यम से मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण सोनागिरि को जैन श्रद्धालु गहरी आस्था और श्रद्धा के साथ “मोक्षभूमि” के रूप में पूजते हैं।
जैन ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु के समय से ही यह स्थान साधना और निर्वाण का केंद्र रहा है। मान्यता है कि राजा नंगनाग कुमार ने अपने करोड़ों अनुयायियों के साथ यहीं से मोक्ष प्राप्त किया था। इसी वजह से सोनागिरि को “लघु सम्मेद शिखर” भी कहा जाता है, जो जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ शिखरजी की तरह ही मोक्ष से जुड़ा स्थल माना जाता है।
सोनागिरि की पहाड़ी पर स्थित 77 श्वेत जैन मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि उन संतों की तपोभूमि भी माने जाते हैं, जिन्होंने जीवनभर संयम और त्याग का पालन किया। यहां का शांत वातावरण, पहाड़ियों की ऊंचाई और मंदिरों की शुद्धता ध्यान और आत्मिक शांति के लिए परफे मानी जाती है।
आज भी देश-विदेश से जैन श्रद्धालु सोनागिरि पहुंचकर ध्यान, उपवास और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। उनका विश्वास है कि इस पावन भूमि पर की गई साधना आत्मा की शुद्धि और मोक्ष मार्ग को सुदृढ़ करती है। यही कारण है कि सोनागिरि दतिया न केवल एक तीर्थ स्थल है, बल्कि जैन धर्म की आस्था, त्याग और मोक्ष परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है।
होली के बाद चैत्र प्रतिपदा से रंग पंचमी तक यहां रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही वार्षिक “ध्वजारोहण” समारोह भी होता है, जिसमें शिखर पर लगी पुरानी ध्वजा को नई स्वर्ण रंग की ध्वजा से बदला जाता है।
सोनागिरि जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे पहाड़ी पर स्थित जैन मंदिरों के दर्शन और पैदल भ्रमण करना आसान होता है।
अक्टूबर से फरवरी: सर्दियों का मौसम, ठंडक और शांति के कारण तीर्थयात्रा और ध्यान-साधना के लिए आदर्श समय।
मार्च: गर्मी शुरू होती है, लेकिन सुबह और शाम दर्शन के लिए उपयुक्त रहते हैं। इसी समय होली के बाद चैत्र प्रतिपदा से रंग पंचमी तक रथ यात्रा और धार्मिक आयोजन भी होते हैं, जो देखने योग्य होते हैं।
अप्रैल से जून: अत्यधिक गर्मी के कारण यात्रा थोड़ी कठिन हो सकती है।
जुलाई से सितंबर: मानसून में हरियाली बढ़ जाती है, लेकिन फिसलन और उमस के कारण यात्रा में असुविधा हो सकती है।
यदि आप आरामदायक मौसम और धार्मिक आयोजनों का अनुभव करना चाहते हैं, तो सर्दियों का समय (अक्टूबर–मार्च) सोनागिरि यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त है।
सोनागिरि जैन मंदिर कैसे पहुंचें
पर्यटन की दृष्टि से सोनागिरि के मंदिरों की दिन में आसानी से यात्रा की जा सकती है। पर्यटक ग्वालियर, झांसी या ओरछा में होटल में ठहरकर एक दिन की यात्रा के रूप में सोनागिरि जा सकते हैं। यदि कोई श्रद्धालु रात्रि ठहराव करना चाहता है, तो उसे धर्मशालाओं में व्यवस्था करनी होती है।
यह पवित्र स्थल दतिया नगर के निकट स्थित है। ग्वालियर-झांसी मार्ग पर दतिया से लगभग 15 किलोमीटर का मोड़ लेकर सोनागिरि पहुँचा जा सकता है।
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