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Kakanmath Mandir Tour Blog – निजी साधन के बिना मुश्किल है ककनमठ मंदिर पहुंचना, जानें मेरा अनुभव

हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप? स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है. अपनी सेहत का लगातार ख्याल रखिए. मुरैना यात्रा की मेरे वृत्तांत में अभी तक आप सभी ने पान सिंह तोमर के गांव तक की यात्रा को जाना है. मैंने आप सभी से पान सिंह तोमर के गांव भिड़ौसा पहुंचने के अनुभव को शेयर किया, अब इस ब्लॉग में, मैं आपसे भिड़ौसा गांव से ककनमठ मंदिर ( Kakanmath Mandir in Sihoniya Morena ) तक की यात्रा का अनुभव शेयर करूंगा.

इस ब्लॉग से आपको ये जानकारी मिल पाएगी कि आप ककनमठ मंदिर ( Kakanmath Mandir in Sihoniya Morena ) कैसे पहुंच सकते हैं? अगर आप ककनमठ ( Kakanmath Mandir in Sihoniya Morena ) का इतिहास जानना चाहते हैं, तो उसके लिए भी हम एक अलग से आर्टिकल लेकर आएंगे. इस आर्टिकल में आपको ककनमठ मंदिर के निर्माण, उसके इतिहास, कालखंड, मिथ्या और तथ्य की जानकारी मिलेगी.

उम्मीद करता हूं कि आप मुरैना की यात्रा पर मेरे ब्लॉग को पसंद कर रहे होंगे और आपने हमारे Youtube चैनल Travel Junoon पर इसके सभी वीडियो भी देखे होंगे. अगर आपने अभी तक वीडियो नहीं देखे हैं, तो वेबसाइट के ऊपर मौजूद Youtube आइकॉन पर टैप करके आप हमारे चैनल पर पहुंच सकते हैं. आइए ककनमठ मंदिर ( Kakanmath Mandir in Sihoniya Morena ) का यात्रा वृत्तांत शुरू करते हैं…

भिड़ौसा गांव में मंदिर के स्वामी जी की बाइक तैयार हो चुकी थी. स्वामी जी कुछ ही पलों बाद मुझे उसकी सवारी करा रहे थे. शुक्र है उनका जो बिना कहे मुझे अपनी बाइक से ककनमठ ( Kakanmath Mandir in Sihoniya Morena ) ले जाने का फैसला किया. ऐसा न होता तो मैं न जाने कैसे पहुंचता.

भिड़ौसा गांव से बाहर आकर ककनमठ के रास्ते में मैंने बीहड़ों के नजारे देखे. दूर दूर तक फैले खेत. एक सार्वजनिक वाहन नहीं दिखा. मन में ख्याल आया, जब आज ये हाल है तो 40-50 साल पहले कैसा माहौल होगा! डकैतों को पुलिस कैसे पकड़ पाती होगी. दूर से ही सब दिखाई दे जाता है. पुलिस आती भी तो कैसे. ऐसे कई विचार मन में कौंधने लगे. हां, यहां मुझे सड़क अच्छी मिल रही थी तो मजे से बैठकर नजारे देखता जा रहा था.

मुरैना के इस हिस्से में भी और जहां भी मैं गया, खेती शानदार थी. हर ओर हरियाली ही नज़र आ रही थी. कमाल का दृश्य था. सफर में स्वामी जी से बतियाते बतियाते कुछ देर में हम सिहोनिया पहुंच चुके थे. स्वामी जी ने यहां पर मुझे एक दुकान से तोमरघाल की मशहूर घोटा सब्ज़ी खिलाई.

जिस दुकान पर मैंने इस घोटा सब्ज़ी को खाया, वहां इसे सर्व कर रहे दुकानदार बहुत मोटे थे. हद्द मोटापा देखकर पहले तो मैंने उनसे बात शुरू करने की कोशिश की. मैंने पूछा- भैया घोटा सब्ज़ी क्या होती है ये, और नाम कैसे पड़ा ये. उन्होंने कहा कि आलू को घोटते हैं और इसी वजह से इसका नाम घोटा सब्ज़ी पड़ गया. वहां और भी लोग कचौड़ी और बेदम पूड़ी को घोटा सब्ज़ी के साथ खा रहे थे. मैंने उनसे बात करने की कोशिश की, वे बोले- हर शादी-उत्सव में यह सब्ज़ी ज़रूर बनती है. यह यहां की पहचान है.

मैं फिर दुकानदार भाई साहब से मुखातिब हुआ. मैंने पूछा भाई साहब पेट बहुत निकला हुआ है आपका? उम्र तो वही 40-42 होगी आपकी? वह बोले, हां, 42 साल है. आगे ऐसा लगा, जैसे उनका दर्द बाहर आ गया हो. बोले- जब लॉकडाउन में सब बंद हो गया था तब मैं हर रोज़ सुबह शाम को टहलता था. एक महीने में 8 किलो वजन घटा लिया था. अब फिर वही हाल…

मैंने कहा- भैया लॉकडाउन हो या नहीं, पेट कम करना बेहद ज़रूरी है. हर बीमारी पेट से ही तो जुड़ी हुई है. वह बोले – हां, लेकिन क्या करूं, यहां कौन संभालेगा. मैंने कहा कि एक लड़का रख लीजिए. सुबह, दोपहर, शाम को वह दुकान का गल्ला देख लिया करेगा और आप टहल लिया करना. पतला होने का टारगेट रख लो. घोटा सब्ज़ी तो बिकती रहेगी. वह बोले- करता हूं. उम्मीद करता हूं कि वह अपनी बात पर कायम रहकर वजन कम करने के प्रयास में जुट चुके होंगे.

अब बाइक ने सिहोनिया चौक से यूटर्न लिया और फिर 100 मीटर बाद ही बाईं ओर एक रास्ते पर आगे बढ़ गई. इस रास्ते पर लिखा था- ककनमठ मंदिर ( Kakanmath Mandir in Sihoniya, Morena ) के लिए… बाएं मुड़ते ही मुझे तो लगा था कि बस पहुंच ही गए. लेकिन ये क्या दोस्तों. अंदर काफी किलोमीटर के बाद मुझे वह मंदिर दूर से दिखाई दिया.

अब मैं समझ चुका था कि भिड़ौसा गांव के स्वामी जी ने क्यों कहा था कि बिना निजी साधन के नहीं पहुंच पाओगे ककनमठ. यहां भी वही बीहड़ और दूर तक मैदानी इलाके के दर्शन हो रहे थे. खेती कमाल की थी ही. अगले कुछ पल में मैं ककनमठ मंदिर ( Kakanmath Mandir in Sihoniya, Morena ) पहुंच चुका था. मंदिर को देखते ही मैं स्तब्ध रह गया दोस्तों. बिना किसी जोड़ के एक नायाब सरंचना आज भी सदियों पुराने उज्जवल इतिहास की गवाही दे रही है. आप भी यहां होकर आइए.

मैंने ककनमठ मंदिर में मौजूद स्तंभों को गिनने की कोशिश की. लोग कहते हैं कि इन्हें कोई गिन नहीं पाता है. लेकिन फिर भी वहां आए दूसरे विज़िटर्स की मदद से मैंने 54 का आंकड़ा जाना. 54 खंभे हैं परिसर में. मंदिर शानदार है लेकिन कहते हैं कि इसे भूतों ने एक रात में बनवाया था और सुबह होते ही वे काम अधूरा छोड़कर चले गए थे.

आपको इसका अहसास भी मंदिर को देखने पर होता है. हालांकि, तथ्य ये है कि ककनावती रानी के नाम पर इस मंदिर को बनाया गया था. मुझे मंदिर के हर ओर मौजूद मूर्तियों को देखकर दुख का अहसास हुआ. इस सभी प्रतिमाओं के मुख को खंडित कर दिया गया है. जिसने भी ये किया, उसने अपनी बर्बर सभ्यता को हम सभी के सामने लाने का ही कार्य किया है. मंदिर में मैंने सदियों पुराने शिवलिंग पर जलाभिषेक भी किया.

जब निकला तो मुझे फिर वही पत्थर पर पत्थर रखे दिखाई दिए. ऐसा हमने केदारनाथ मंदिर, तुंगनाथ और यहां कुतवार में कुंती मंदिर में भी देखा था. लोग ऐसा, शायद संतान या घर की चाहत में करते हैं. ककनमठ मंदिर के बाहर एक परिवार भी मिला. ये परिवार स्थानीय ही था. इसने गिलहरियों को बिस्किट खिलाने की कोशिश की. पहले तो गिलहरियां भागी लेकिन बाद में ऐसा माहौल बन गया कि गिलहरियां इनके हाथ पर चढ़ चढ़कर बिस्किट खाने लगी थी. कमाल है दोस्तों, प्रेम का रिश्ता है ही ऐसा.

आप भी इस मंदिर में ज़रूर घूमने आइए. यदि किसी तरह की जानकारी चाहिए हो तो बेझिझक हमें gotraveljunoon@gmail.com पर ईमेल लिख दें. हम ज़रूर उत्तर देंगे. आप Youtube वीडियो के कॉमेंट सेक्शन में भी अपने सवाल पूछ सकते हैं, या प्रतिक्रिया दे सकते हैं.

आप ककनमठ मंदिर की यात्रा का पूरा वीडियो नीचे देख सकते हैं. आपको ये ब्लॉग कैसा लगा, ज़रूर बताएं. अगले ब्लॉग में, मैं आपसे सिहोनिया में जैन मंदिर ( दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र ) की यात्रा कराउंगा.

इस जैन मंदिर का वीडियो भी आपको ककनमठ वाले वीडियो में मिलेगा. देखकर प्रतिक्रिया ज़रूर दें दोस्तों. मिलते हैं अगले ब्लॉग में, धन्यवाद

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