Shree Pitambara Peeth Datia श्री पीतांबरा पीठ दतिया: माँ बगलामुखी का दिव्य शक्तिपीठ और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र
Shree Pitambara Peeth Datia : श्री पीतांबरा पीठ, मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित एक प्रमुख आध्यात्मिक स्थल है. यह स्थान अपनी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक महत्ता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है. श्री पीतांबरा पीठ राज्य के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है और देशभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.
श्री पीतांबरा पीठ में कई मंदिर स्थित हैं, जिनकी अपनी-अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है. इस ब्लॉग में हम पीतांबरा पीठ के महत्व, हरिद्रा सरोवर, धूमावती मंदिर और अन्य प्रमुख आकर्षणों के बारे में जानेंगे. चाहे आप आध्यात्मिक शांति की तलाश में आए भक्त हों या भारत की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को जानने वाले पर्यटक पीतांबरा पीठ एक ऐसा स्थल है जिसे अवश्य देखना चाहिए.
श्री पीतांबरा पीठ को दतिया पीठ के नाम से भी जाना जाता है और इसे देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में गिना जाता है. वंखंडेश्वर जैसे मंदिरों के कारण यह स्थल भारत के प्राचीनतम आध्यात्मिक केंद्रों में से एक माना जाता है.
पीतांबरा पीठ की स्थापना की कहानी वर्ष 1929 से जुड़ी है, जब ब्रह्मलीन पूज्यपाद राष्ट्रगुरु अनंत श्री विभूषित स्वामी जी महाराज दतिया नगर में एक रात्रि के लिए रुके थे. उस समय दतिया संस्कृत के महान विद्वानों का प्रमुख केंद्र था. उनकी विद्वत्ता और आध्यात्मिक साधना से प्रभावित होकर युवा संन्यासी स्वामी जी ने वहीं पांच वर्षों तक तपस्या करने का निर्णय लिया.
तपस्या पूर्ण होने के पश्चात स्वामी जी ने दतिया में इस पावन धाम की स्थापना की. जिस स्थान पर उन्होंने साधना की, वह माई का मंदिर कहलाया और आश्रम को श्री पीतांबरा पीठ के नाम से जाना गया.
वर्तमान में यह पीठ एक ट्रस्ट द्वारा संचालित है. यहां एक लाइब्रेरी भी है, जिसमें आश्रम का इतिहास और मंत्रों से जुड़े रहस्य संगृहीत हैं. इसके साथ ही यह आश्रम बच्चों में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए भी फेमस है.
श्री पीतांबरा पीठ भक्तों और पर्यटकों—दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. यह स्थल वर्षभर श्रद्धालुओं को अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा से आकर्षित करता है.
आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान अपनी भव्य वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है. परिसर में स्थित बगलामुखी और धूमावती मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र हैं.
माँ बगलामुखी श्री पीतांबरा पीठ की प्रमुख आराध्य देवी हैं. वे दिव्य शक्ति का स्वरूप मानी जाती हैं और भक्तों को बाधाओं व शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी के रूप में पूजित हैं.
इस धाम से जुड़ी विस्तृत जानकारी ‘बगलामुखी रहस्यम्’ नामक ग्रंथ में मिलती है, जिसमें महाविद्या साधना के गुणों का वर्णन करते हुए आत्मबोध का मार्ग बताया गया है.
माँ बगलामुखी के मंदिर में देवी की अत्यंत सुंदर प्रतिमा स्थापित है, जिसे भक्तों द्वारा अर्पित आभूषणों और वस्त्रों से सजाया गया है. मंदिर की वास्तुकला राजपूत और मराठा शैली का अद्भुत संगम है.
देश-विदेश से भक्त माँ बगलामुखी के दर्शन हेतु यहाँ आते हैं. मान्यता है कि देवी अपने भक्तों को शत्रुओं से रक्षा और विजय प्रदान करती हैं.
हरिद्रा सरोवर || Haridra Lake
मुख्य मंदिर के सामने स्थित हरिद्रा सरोवर परिसर का प्रमुख आकर्षण है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, माँ बगलामुखी एक विनाशकारी तूफान को शांत करने के लिए इसी सरोवर से प्रकट हुई थीं.
सरोवर के मध्य में भगवती पीतांबरा को समर्पित एक सुंदर यंत्र स्थापित है तथा दोनों ओर विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं.
जहां अन्य देवी रूप सांसारिक सुख और मोक्ष प्रदान करते हैं, वहीं देवी धूमावती साधक को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती हैं.
इस मंदिर की वास्तुकला, बारीक नक्काशी और सुंदर मूर्तियाँ इसे पर्यटकों के लिए विशेष बनाती हैं. देश में देवी धूमावती के बहुत कम मंदिर हैं. मान्यता है कि इस मंदिर का संबंध भारत-चीन युद्ध से है. कहा जाता है कि स्वामी जी ने भारत की विजय सुनिश्चित करने के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी.
यह संग्रहालय पूज्यपाद स्वामी जी की व्यक्तिगत वस्तुओं को संजोए हुए है, जिनमें पुस्तकें, चित्र और अन्य स्मृतिया शामिल हैं. यह संग्रहालय मुख्य मंदिर के उत्तर दिशा में परिसर के भीतर स्थित है.
इस पावन परिसर में स्वामी जी द्वारा स्थापित एक संस्कृत पुस्तकालय भी है, जिसे आश्रम द्वारा संरक्षित किया जा रहा है. इसमें 6,000 से अधिक ग्रंथ हैं, जो आश्रम के इतिहास, साधनाओं और तंत्र-मंत्रों के रहस्यों को समझाते हैं.
श्री पीतांबरा पीठ दतिया एक ऐसा आध्यात्मिक स्थल है, जिसकी यात्रा अवश्य करनी चाहिए. यह स्थान इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से भरपूर है. चाहे आप श्रद्धालु हों या पर्यटक यह यात्रा आपको मानसिक शांति, ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करेगी.
दतिया पैलेस ||Datia Palace
दतिया का किला-बढ़ा महल, राजा वीर सिंह देव बुंदेला द्वारा निर्मित सात मंजिला भव्य संरचना है. यह बुंदेला स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है और पीतांबरा पीठ से मात्र 10 मिनट की दूरी पर स्थित है.
सोनागिरी मंदिर || Sonagiri Temple
सोनागिरी जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां पहाड़ी पर 77 और नीचे गांव में 26 मंदिर स्थित हैं. इनमें सबसे प्रसिद्ध मंदिर आठवें तीर्थंकर चंद्रनाथ को समर्पित है.
श्री पीतांबरा पीठ ग्वालियर से 75 किमी और झांसी से 25 किमी की दूरी पर स्थित है.
दतिया रेलवे स्टेशन से आश्रम की दूरी लगभग 3 किमी है. ग्वालियर या झांसी से टैक्सी द्वारा भी आसानी से पहुंचा जा सकता है.
अतिरिक्त रूप से आप सोनागिरी के जैन मंदिरों, भव्य दतिया महल या ओरछा की ऐतिहासिक धरोहरों की यात्रा भी कर सकते हैं.
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