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Monte Piano Travel Blog : ‘पागलपन’ की इंतहां पार कर देने वाले ये लोग चाहते क्या हैं?

Monte Piano Travel Blog :  जिंदगी और ट्रैवलिंग दोनों ही जुनून का नाम है और इसीलिए हम ट्रैवल में जुनूनिंग को फॉलो करते हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक जुनून के बारे में बताने जा रहे हैं जो सनकपन से सिर्फ एक कदम पीछे है और इसकी वजह से इस जुनून का मकसद. बात शुरू करें उससे पहले जान लें कि ये Monte Piana क्या है? ऐसा इसलिए क्योंकि इस पहाड़ी को इसी नाम से जाना जाता है. ये 2,324 मीटर लंबा पहाड़ है जो Sextan Dolomites में है और दक्षिणी टाइरॉल और बेलुनो के बॉर्डर पर है. इस पहाड़ी के उत्तरी हिस्से को Monte Piano (2,305 मीटर) के नाम से जानते हैं. पहले विश्वयुद्ध के दौरान इस पहाड़ी को लेकर ऑस्ट्रिया और इटली की सेना में भयंकर युद्ध हुआ था. ऑस्ट्रिया ने उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया जबकि इसका दक्षिणी हिस्सा इटली के पास था. आज भी भयंकर युद्ध के अवशेष यहां देखे जा सकते हैं.

10-15 सितंबर 2015 तक मोंटे पियाना में एक हाईलाइन मीटिंग हुई थी. इस मीटिंग में 350 से भी ज्यादा हाईलाइनर्स ने हिस्सा लिया था. इसी में हाईलाइन का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना था जो हैमॉक रेनबो (झूले से इंद्रधनुष) बनाकर बनाया गया था. ऐसा करने का मकसद शांति का संदेश देना था. ये पूरा मामला पहले विश्व युद्ध की 100वीं बरसी पर हुआ था.

इस हाईलाइन मीटिंग की शुरुआत 2012 में हुई थी. इसका मकसद दो चोटियों Alessandro d‘Emilia (इटली), and Armin Holzer, (दक्षिणी टाइरॉल) को जोड़ना है. इस इवेंट का उद्देश्य प्रोफेश्नल एथलीट्स और जोशीले लोगों को पूरी दुनिया से यहां लाकर इसमें शामिल करना है. ये जगह सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही इसके लिए नहीं चुनी गई थी बल्कि ये इलाका एक खुला वार म्युजियम भी है. यहां उन 18 हजार सैनिकों के बलिदान से जुड़ी यादें आज भी जिंदा हैं. ये सैनिक पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए थे. 7 किलोमीटर लंबी खाई के ऊपर यह सब किया जाता है.

इस फेस्टिवल का कोई तय वक्त नहीं होता है. यह सब मौसम की स्थिति और उस दिन के मिजाज पर निर्भर करता है. फोटो कॉन्टेस्ट पिक्चर ऑफ द डे के लिए फोटोग्राफर्स को यहां मानों मुंह मागी मुराद मिल जाती है. (सभी फोटोः Daily Mail)

ऐसी अतुलनीय जगह पर जाकर झूले पर सोने का आइडिया सबसे पहली हाईलाइन मीटिंग 2012 में आया था. Armin Holzer, Alessandro d’Emilia और Igor Scotland इस एक्सपीरियंस को पहली बार दोस्तों से शेयर करते हुए बेहद एक्साइटेड थे. इसी के बाद एक कलेक्टिव गैदरिंग का आइडिया हकीकत में बदला.

इसके बाद इस कॉन्सेप्ट को डिवेलप किया गया और 10 सितंबर 2015 को ये यूनिक प्रोजेक्ट कामयाबी के साथ दोहराया गया, वो भी तीसरी बार… पूरी रात झूले पर बिताने तीनों फाउंडर्स को अगली सुबह अन्य एथलीटों का भी साथ मिला. 17 झूलों पर कुल 26 लोगों ने मिलकर एक रंग बिरंगी इंद्रधनुष बना डाला. ऐसा कर इतिहास को श्रद्धांजलि देते हुए भविष्य में शांति का संदेश दिया गया. ये लोकेशन सिर्फ अपने प्राकृति सौंदर्यता के लिए ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक महत्व के लिए चुना गया था. Monte Piana इस वक्त पूरी दुनिया के पैशनेट और फिलॉसफर्स की पसंद बन चुका है.

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