Deoghar Travel Blog : देवघर भारत में मौजूद ज्योतिर्लिंगों में से एक है. आइए जानते हैं कि देवघर में आप और कहां कहां घूम सकते हैं...
Deoghar Travel Blog : देवघर भारत के झारखंड राज्य में स्थित एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है. यह भारत में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों (12 Jyotirlingas In India) में से एक है. इसे बैद्यनाथ मंदिर (Baidyanath Mandir) के रूप में जाना जाता है. बैद्यनाथ धाम (Baidyanath Dham) में हिंदू चंद्र कैलेंडर के श्रावण महीने के दौरान लाखों भक्त आते हैं.
बैद्यनाथ मंदिर के नाम पर इस शहर को बैद्यनाथ धाम, बाबा धाम याvदेवघर भी कहा जाता है. इस शहर की उत्पत्ति का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन प्राचीन हिंदू ग्रंथों में इसका उल्लेख हरितकी वन या केतकी वन के रूप में मिलता है. देवघर हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. हिंदू महीने श्रावण में दुनिया भर से भक्त इस शहर में आते हैं. यह शहर झारखंड के संथाल परगना डिवीजन में मयूराक्षी नदी (Mayurakshi River) के ठीक बगल में स्थित है.
अगर आप झारखंड के इस धार्मिक स्थल देवघर की यात्रा करना चाहते हैं या इसके फेमस जगहों के बारे में जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल कोbपढ़ें जिसमें हम आपको देवघर के फेमस जगहों की जानकारी देने जा रहें हैं.
प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ देवघर को बैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है. देवघर के मुख्य मंदिर परिसर में 22 मंदिर हैं और यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. बाबा बैद्यनाथ के इस प्राचीन मंदिर में सावन के महीने में हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करने आते हैं. कई श्रद्धालु सुल्तानगंज से मंदिर तक 100 किमी पैदल चलकर मंदिर जाते हैं और बासुखीनाथ के दर्शन कर अपनी तीर्थ यात्रा पूरी करते हैं. देवघर को देवताओं का घर माना जाता है. जमुना जोर और धारुआ दो नदियां हैं जो देवघर के पास बहती हैं.
मंदिर के खुलने का समय सुबह 4:00 बजे से दोपहर 3:30 और शाम 6 से 9 बजे तक है. यहां परिवहन के स्थानीय साधनों का उपयोग करके पहुंचा जा सकता है.
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नंदन पहाड़ देवघर के बाहरी इलाके में स्थित एक छोटी सी पहाड़ी है और नंदी मंदिर नामक एक अन्य देवघर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. नंदी भगवान शिव के वाहन हैं. पहाड़ी हर दिन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहती है. प्रति व्यक्ति फेयर रु. 5. देना होता है. यहां तक पहुंचने के लिए आप रेलवे स्टेशन या टावर चौक से कैब या रिक्शा ले सकते हैं.
सत्संग आश्रम भी एक धार्मिक स्थान है. बच्चे इस आश्रम के परिसर में स्थित म्यूजियम और चिड़ियाघर का मजा ले सकते हैं.
बाबा बैद्यनाथ मंदिर से यह मंदिर 1.5 किमी की दूरी पर स्थित है . यह मंदिर बेलूर में स्थित रामकृष्ण के मंदिर जैसा दिखता है. इसके अंदर राधा-कृष्ण की मूर्तियां हैं . इसकी ऊंचाई 146 फीट है. मंदिर के निर्माण में लगभग नौ लाख रुपये (9 लाख) खर्च किए गए थे. इसलिए इसे नौलखा मंदिर के नाम से जाना जाने लगा.
यह राशि पूरी तरह से रानी चारुशीला द्वारा दान की गई थी. चारुशीला कोलकाता के पथुरिया घाट राजा के परिवार से ताल्लुक रखती थीं. कम उम्र में ही उन्होंने अपने पति अक्षय घोष और बेटे जतिंद्र घोष को खो दिया. बेटे और पति की मौत से दुखी होकर, उसने अपना घर छोड़ दिया और संत बालानंद ब्रह्मचारी से मिली, जिन्होंने उसे इस मंदिर के निर्माण के लिए कहा.
बासुकीनाथ मंदिर भारत के बेहतरीन मंदिरों में से एक है. यह देवघर-दुमका हाईवे पर स्थित है और स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना है. इस मंदिर में साल भर में हजारों भक्तों का आना-जाना लगा रहता है. शाम के समय जगमगाते गलियारे इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देते . बासुकीनाथ मंदिर देवघर से 50 किमी दूर स्थित है. जगह तक पहुंचने के लिए आप कैब का ले सकते हैं.
यह स्थान देवघर से 10 किमी दूर स्थित है और यहां एक तपोनाथ महादेव मंदिर है. इसमें कई प्राकृतिक गुफाएं और चट्टानें भी हैं. कहा जाता है कि इन गुफाओं का ऐतिहासिक और दैवीय महत्व है.
त्रिकुट पहाड़ी हिंदुओं के लिए दैवीय महत्व का है. इस पहाड़ी की तीन जुड़ी हुई चोटियां पर्यटकों अपनी ओर अट्रेक्ट करती है. पर्यटकों को पहाड़ी की चोटी पर ले जाने के लिए यहां केबल कार लगाई गई है. त्रिकूट पर्वत जाने के लिए आप ट्रैकिंग भी कर सकते हैं. ट्रैकिंग में आम तौर पर 2 घंटे लगते हैं.
मयूराक्षी नदी को ‘मोड’ नाम से भी जाना जाता है. यह नदी दुमका, झारखण्ड की एक प्रमुख नदी है. इस नदी के किनारे पर आयोजित होने वाला ‘हिजला मेला’ अपने कल्चर विरासत के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है.
झारखंड कभी बिहार का हिस्सा था. इसी वजह से देवघर के खाने में बिहारी भोजन हावी है. यह शहर भारतीय शाकाहारी व्यंजनों जैसे लिट्टी-चोखा, बांस के अंकुर, रुगरा, कांडा, महुआ, अरसा रोटी और दुभनी रोटी के लिए फेमस है. चावल के गुच्छे और मकई से बने हल्के नाश्ते भी बहुत सारे स्ट्रीट फूड विक्रेताओं द्वारा बेचे जाते हैं.
अगर आप देवघर की यात्रा करने जा रहें हैं तो बता दें कि यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन बैद्यनाथ धाम है जो मुख्य शहर से 7 किमी दूर है. इसके अलावा जसीडीह जंक्शन देवघर से 7 किमी दूर है और यह दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर स्थित है. यह जंक्शन देश के कई प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से कनेक्टेड है. यहां का नजदीकी हवाई अड्डा पटना में स्थित है.
फ्लाइट से कैसे पहुंचें देवघर- देवघर में अब नया हवाईअड्डा बन चुका है. देवघर हवाईअड्डा बैद्यानाथ धाम से 9 किलोमीटर की दूरी पर है. हवाई अड्डे से देवघर पहुचंने के लिए आप टैक्सी और बस की मदद ले सकते हैं.
सड़क मार्ग से कैसे पहुंचें देवघर – जो भी टूरिस्ट सड़क मार्ग से देवघर शहर की यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें बता दे कि यहां के लिए नियमित रूप से बस सेवाएं उपलब्ध हैं. दिन हो या रात कोई भी पर्यटक पटना, रांची आदि स्थानों से बस, साझा टैक्सी या टैक्सी ले सकते हैं.
ट्रेन से कैसे पहुंचें देवघर – जो भी यात्री ट्रेन से देवघर की यात्रा करने की योजना बना रहें हैं उनके लिए बता दें कि यह शहर रेलवे के माध्यम से भारत के सभी राज्यों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. बैद्यनाथ धाम जंक्शन (Baidyanath Dham Junction) यहां का प्रमुख रेलवे स्टेशन है जहां के लिए एक्सप्रेस ट्रेन, और सुपरफ़ास्ट दोनों तरह की ट्रेन उपलब्ध हैं.
जो भी भक्त देवघर की पवित्र तीर्थ यात्रा पर जाने की योजना बना रहें हैं, उन्हें बता दें कि यहां की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय सर्दियों में होता है, खासकर अक्टूबर के महीनों से लेकर मार्च तक. गर्मी के समय यहां भीषण गर्मी पड़ती है इसलिए इस मौसम में आपको देवघर के धर्मिक स्थलों की यात्रा करने के लिए नहीं आना चाहिए. मॉनसून के मौसम में भी यहां की यात्रा करना सही नहीं है क्योंकि बारिश आपकी योजनाओं को खराब कर सकती है.
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