Teerth Yatra

Famous Krishna Temples in India: मथुरा से द्वारका तक जानें मंदिरों का इतिहास और जन्माष्टमी का महत्व

Famous Krishna Temples in India : भारत में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा मथुरा से शुरू करना सबसे खास माना जाता है, क्योंकि धार्मिक परंपरा में मथुरा को श्रीकृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है। इसके बाद वृंदावन, गोकुल, द्वारका, नाथद्वारा, पुरी और गुरुवायूर जैसे प्रमुख कृष्ण तीर्थों को क्रमवार देखा जा सकता है। 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी और मथुरा-वृंदावन में इस मौके पर विशेष आयोजन होते हैं। भारत के प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मंदिर: मथुरा से द्वारका और वृंदावन से उडुपी तक पूरी जानकारी

Table of Contents

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा || Shri Krishna Janmabhoomi Temple, Mathura

मथुरा से श्रीकृष्ण मंदिरों की यात्रा शुरू करना सबसे खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। श्रीकृष्ण जन्मस्थान इसी परंपरा से जुड़ा प्रमुख तीर्थ है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिला प्रशासन की पर्यटन जानकारी में भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि को शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल किया गया है।

जन्माष्टमी के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रात में श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है और मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना होती है। 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जा रही है।

कैसे पहुंचें?

मथुरा रेल मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। Mathura Junction यहां का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। सड़क मार्ग से दिल्ली, आगरा और आसपास के शहरों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। हवाई यात्रा के लिए आगरा का खेरिया एयरपोर्ट विकल्प है।

द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा || Dwarkadhish Temple, Mathura

मथुरा में ही स्थित द्वारकाधीश मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित प्रमुख मंदिरों में से एक है। मथुरा जिला प्रशासन इसे शहर के पुराने और महत्वपूर्ण मंदिरों में गिनता है। यहां भगवान कृष्ण की द्वारकाधीश स्वरूप में पूजा की जाती है।

जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में सजावट, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का माहौल देखने को मिलता है। जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा आने वाले श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मभूमि के साथ इस मंदिर के दर्शन भी करते हैं।

बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन || Banke Bihari Temple, Vrindavan

मथुरा के बाद अगला प्रमुख पड़ाव वृंदावन है। मथुरा से लगभग 15 किलोमीटर दूर वृंदावन को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और भक्ति परंपरा से जोड़ा जाता है।

वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर भगवान कृष्ण के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है। यहां कृष्ण को बांके बिहारी के रूप में पूजा जाता है। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है, इसलिए त्योहार के समय दर्शन की व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों को ध्यान में रखना जरूरी है।

प्रेम मंदिर, वृंदावन || Prem Mandir, Vrindavan

वृंदावन का प्रेम मंदिर आधुनिक समय के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में शामिल है। यह मंदिर राधा-कृष्ण और सीता-राम को समर्पित है। मंदिर परिसर में भगवान कृष्ण के जीवन और लीलाओं से जुड़े दृश्य भी देखने को मिलते हैं। मथुरा जिला प्रशासन के अनुसार मंदिर परिसर करीब 54 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसका उद्घाटन 2012 में हुआ था।

मंदिर की वास्तुकला और शाम के समय रोशनी से सजा परिसर पर्यटकों के बीच खास आकर्षण है। जन्माष्टमी के दौरान यहां भी भक्तिमय वातावरण देखने को मिलता है।

इस्कॉन कृष्ण-बलराम मंदिर, वृंदावन || ISKCON Krishna-Balaram Temple, Vrindavan

वृंदावन का इस्कॉन मंदिर श्रीकृष्ण और बलराम को समर्पित है। इसका आधिकारिक नाम श्री कृष्ण-बलराम मंदिर है। मथुरा जिला प्रशासन के अनुसार इसका निर्माण 1975 में हुआ था और इसकी स्थापना इस्कॉन के संस्थापक ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद से जुड़ी है।

यहां नियमित रूप से भजन, कीर्तन और पूजा होती है। जन्माष्टमी के समय मंदिर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

राधा रमण मंदिर, वृंदावन || Radha Raman Temple, Vrindavan

राधा रमण मंदिर वृंदावन के प्राचीन और महत्वपूर्ण मंदिरों में शामिल है। यहां भगवान कृष्ण की राधा रमण स्वरूप में पूजा होती है। वृंदावन की धार्मिक परंपरा में इस मंदिर का विशेष स्थान है और यह सप्त देवालयों से जुड़ी मंदिर परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

जन्माष्टमी के दौरान यहां भी विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं।

राधा दामोदर मंदिर, वृंदावन || Radha Damodar Temple, Vrindavan

राधा दामोदर मंदिर राधा और कृष्ण को समर्पित है और वृंदावन के प्रमुख गोस्वामी मंदिरों में गिना जाता है। मथुरा जिला प्रशासन के अनुसार इसकी स्थापना जीव गोस्वामी से जुड़ी है और यह वृंदावन के सात प्रमुख गोस्वामी मंदिरों में शामिल है।

यह मंदिर उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है जो वृंदावन की पुरानी वैष्णव परंपरा और कृष्ण भक्ति से जुड़े स्थलों को देखना चाहते हैं।

मदन मोहन मंदिर, वृंदावन || Madan Mohan Temple, Vrindavan

मदन मोहन मंदिर वृंदावन के प्राचीन और श्रद्धा के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां भगवान कृष्ण को मदन मोहन स्वरूप में राधा और ललिता गोपी के साथ पूजा जाता है। मंदिर यमुना नदी के पास काली घाट क्षेत्र में स्थित है और इसकी वास्तुकला नागर शैली से प्रभावित है।

राधा गोपीनाथ और राधा गोविंद देव मंदिर || Radha Gopinath and Radha Govind Dev Temple

वृंदावन में राधा-कृष्ण को समर्पित कई प्राचीन मंदिर हैं। राधा गोविंद देव मंदिर और राधा गोपीनाथ मंदिर ब्रज की पुरानी वैष्णव परंपरा से जुड़े प्रमुख स्थल हैं। इन मंदिरों को वृंदावन के धार्मिक इतिहास और गौड़ीय वैष्णव परंपरा को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

गोकुल के कृष्ण मंदिर || Krishna Temple of Gokul

मथुरा से कुछ दूरी पर स्थित गोकुल को श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कृष्ण के जन्म के बाद उन्हें गोकुल लाया गया था, जहां नंद बाबा और यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया।

गोकुल में नंद भवन और रमण रेती प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। उत्तर प्रदेश पर्यटन के अनुसार गोकुल, मथुरा-वृंदावन के साथ ब्रज क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गोवर्धन के मंदिर और गिरिराज जी || Govardhan temples and Giriraj Ji

गोवर्धन का संबंध भगवान कृष्ण की गोवर्धन लीला से माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया था।

यहां गिरिराज जी की परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है। गोवर्धन, राधाकुंड और श्यामकुंड भी ब्रज यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका || Dwarkadhish Temple, Dwarka

मथुरा-वृंदावन के बाद यदि आप भगवान कृष्ण से जुड़े दूसरे बड़े तीर्थ की यात्रा करना चाहते हैं तो गुजरात की द्वारका महत्वपूर्ण है। धार्मिक परंपरा में द्वारका को श्रीकृष्ण के राज्य और उनके जीवन के बाद के चरण से जोड़ा जाता है।

द्वारकाधीश मंदिर भारत के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में से एक है और चार धामों में शामिल है। जन्माष्टमी पर यहां विशेष पूजा और उत्सव का आयोजन होता है।

बेट द्वारका

द्वारका यात्रा में बेट द्वारका को भी शामिल किया जा सकता है। यह द्वीप श्रीकृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण महत्वपूर्ण माना जाता है। द्वारका पहुंचने वाले श्रद्धालु आमतौर पर यहां भी दर्शन के लिए जाते हैं।

श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा || Shreenathji Temple, Nathdwara

राजस्थान के नाथद्वारा का श्रीनाथजी मंदिर भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की भक्ति परंपरा से जुड़ा प्रसिद्ध मंदिर है। यहां श्रीनाथजी की पूजा विशेष वैष्णव परंपरा के अनुसार होती है।

जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम और दर्शन की व्यवस्था रहती है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु इस अवसर पर नाथद्वारा पहुंचते हैं।

जगन्नाथ मंदिर, पुरी || Jagannath Temple, Puri

ओडिशा का पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर भी कृष्ण भक्ति की व्यापक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थ है। वैष्णव परंपरा में भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्ण के स्वरूप से जोड़ा जाता है।

पुरी में जन्माष्टमी के दौरान भी धार्मिक आयोजन होते हैं। हालांकि मंदिर में प्रवेश से जुड़े नियमों का पालन करना पड़ता है।

गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर, केरल || Jagannath Temple, Puri

केरल का गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में से एक है। इसे कई बार दक्षिण की द्वारका भी कहा जाता है। यहां भगवान कृष्ण की पूजा विशेष वैष्णव परंपराओं के अनुसार होती है।

जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर और आसपास के क्षेत्र में विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है।

उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर, कर्नाटक || Udupi Sri Krishna Temple, Karnataka

कर्नाटक का उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर भी देश के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में शामिल है। यह मंदिर माध्वाचार्य की वैष्णव परंपरा से जुड़ा है। यहां भगवान कृष्ण के दर्शन कनकना किंडी नामक छोटी खिड़की से किए जाने की परंपरा विशेष आकर्षण है।

हम्पी का बालकृष्ण मंदिर || The Balakrishna Temple of Hampi

कर्नाटक के हम्पी में स्थित बालकृष्ण मंदिर भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को समर्पित ऐतिहासिक मंदिर है। यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ विजयनगर साम्राज्य की स्थापत्य कला के लिए भी प्रसिद्ध है।

जन्माष्टमी पर कौन-सी जगह सबसे खास || Which place is the most special on Janmashtami?

अगर आपका मुख्य उद्देश्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव देखना है तो मथुरा और वृंदावन सबसे प्रमुख विकल्प हैं। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और द्वारकाधीश मंदिर, जबकि वृंदावन में बांके बिहारी, इस्कॉन और प्रेम मंदिर जैसे स्थान यात्रा को खास बना सकते हैं। 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर को है और इस अवसर पर मथुरा-वृंदावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

Komal Mishra

मैं हूं कोमल... Travel Junoon पर हम अक्षरों से घुमक्कड़ी का रंग जमाते हैं... यानी घुमक्कड़ी अनलिमिटेड टाइप की... हम कुछ किस्से कहते हैं, थोड़ी कहानियां बताते हैं... Travel Junoon पर हमें पढ़िए भी और Facebook पेज-Youtube चैनल से जुड़िए भी... दोस्तों, फॉलो और सब्सक्राइब जरूर करें...

error: Content is protected !!