Kailash Mansarovar Yatra
Kailash Mansarovar: Kailash Mansarovar की यात्रा (केएमवाई) अपने धार्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक महत्व के कारण जानी जाती है. हर साल सैकड़ों यात्री इस तीर्थ यात्रा पर जाते हैं. भगवान शिव के निवास के रूप में हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ यह जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी धार्मिक महत्व रखता है. यह यात्रा उन पात्र भारतीय नागरिकों के लिए खुली है जो वैध भारतीय पासपोर्टधारक हों और धार्मिक प्रयोजन से कैलाश मानसरोवर जाना चाहते हैं. विदेश मंत्रालय यात्रियों को किसी भी प्रकार की आर्थिक इमदाद अथवा वित्तीय सहायता प्रदान नहीं करता है.
धार्मिक मान्यता और इतिहास
कैलाश पर्वत पर साक्षात भगवान शंकर विराजे हैं जिसके ऊपर स्वर्ग और नीचे मृत्यलोक है, इसकी बाहरी परिधि 52 किमी है। मानसरोवर पहाड़ों से घिरी झील है जो पुराणों में ‘क्षीर सागर’ के नाम से जाना जाता है। क्षीर सागर कैलाश से 40 किमी की दूरी पर है व इसी में शेष शैय्या पर विष्णु व लक्ष्मी विराजित हों पूरे संसार को संचालित कर रहे हैं। यह क्षीर सागर विष्णु का अस्थाई निवास है। कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चिम को रूबी और उत्तर को स्वर्ण रूप में माना जाता है।
मानसरोवर झील का इतिहास
मानसरोवर झील लगभग 320 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इसके उत्तर में कैलाश पर्वत तथा पश्चिम में रक्षातल झील है। संस्कृत शब्द मानसरोवर, मानस और सरोवर को मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है- मन का सरोवर। कहते हैं कि मानसरोवर वह झील है जहां माता पार्वती स्नान करती थीं और मान्यता के अनुसार, वह आज भी करती हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या कि ऐसा इन्हें बनाया गया?
हालांकि पुराणों के अनुसार, समुद्र तल से 17 हजार फुट की उंचाई पर स्थित 300 फुट गहरे मीठे पानी की इस मानसरोवर झील की उत्पत्ति भगीरथ की तपस्या से भगवान शिव के प्रसन्न होने पर हुई थी। पुराणों के अनुसार, भगवान शंकर द्वारा प्रकट किए गए जल के वेग से जो झील बनी, कालांतर में उसी का नाम ‘मानसरोवर’ हुआ।
इस में यात्रा को शारीरिक रूप से फीट लोग ही शामिल हो सकते हैं
कोई भी भारतीय नागरिक जिसके पास वैध भारतीय पासपोर्ट है और उसकी आयु चालू वर्ष की 01 जनवरी को कम से कम 18 और अधिक से अधिक 70 वर्ष होनी चाहिए वह आवेदन कर सकता है. इसके अलावा उसका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 या उससे कम होना चाहिए. यात्रा करने के लिए उसे शारीरिक रूप से स्वस्थ और चिकित्सा की दृष्टि से उपयुक्त होना चाहिए. विदेशी नागरिक इस यात्रा में शामिल नहीं हो सकते हैं. कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए यात्रियों का चयन निष्पक्ष कंप्यूटरीकृत प्रणाली के माध्यम से ड्रा करके किया जाता है.
यात्रा को पूरा होने में 23 से 25 दिन लगते हैं
कैलाश मानसरोवर यात्रा के यात्रिओ को विभिन औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए नई दिल्ली में तीन-चार दिन बिताने की जरूरत पड़ती है. चयनित मार्ग के अनुसार संपूर्ण यात्रा लगभग 23-25 दिनों में सम्पन्न हो जाती है. इस यात्रा में यात्रियों को 19,500 तक की ऊंचाई वाले क्षेत्र से पर्वतारोहण (ट्रैकिंग) करना पड़ता है. ऐसे स्थानों पर ऑक्ससीजन कम होती है और वातावरण में हवा का दबाव कम रहता है तथा इसके लोग हाइपोक्सिया (हवा में आकसीजन की कमी) से प्रभावित होते है. बहुत ही कम लोगों में पलमोनरी एडमोनरी एडेमा /सेरेब्रल एडेमा तथा अत्यधिक माउंटेन सिकनेस इत्यादि की बीमारी से लोग ग्रसित हो जाते हैं. जिन्हें पहले से ही कोरोनरी आर्टरी, विभिन्न फेफड़ों की बीमारी जैसे कि ब्रोन्कियल अस्थमा, उच्च रकत चाप तथा डायबिटीज की बीमारी है वह बेहोश हो सकते हैं और जीवन के लिए हानिकारक हो सकता है.
कठिन और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण है कैलाश मानसरोवर यात्रा
कैलाश मानसरोवर की यात्रा बहुत कठिन और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण है. यात्रियों को दुर्गम परिस्थितियों में 19,500 फीट तक की सीधी ऊंचाई से गुजरना होता है. इसमें लोगों की जान का खतरा भी होता है. यात्रा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, अन्य अस्पतालों की रिपोर्ट स्वीकृत नहीं है क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यात्रियों को नई दिल्ली स्थिति दिल्ली हार्ट एंड लंग इंस्टिट्यूट और आईटीबीपी बेस अस्पताल द्वारा आयोजित चिकित्सा जांच से गुजरना पड़ता है.
इस यात्रा के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है. यात्रियों को यात्रा से पहले तैयारियों और शारिरिक जांच के लिए दिल्ली में 3 या 4 दिन तक रूकना पड़ता है. दिल्ली सरकार केवल यात्रियों के लिए साझा तौर पर खान-पान और ठहरने की सुविधाओं का निःशुल्क प्रबंध करती है. यात्री यदि चाहे तो दिल्ली में खान-पान और ठहरने की व्यवस्था खुद से कर सकते हैं. कैलाश मानसरोवर के सभी यात्रियों को नई दिल्ली स्थित आईटीबीपी बेस अस्पताल और दिल्ली हार्ट एंड लंग इंस्टिट्यूट से अनिवार्य चिकित्सा जांच से गुजरना पड़ता है तथा नई दिल्ली में वीज़ा की सभी औपचारिकताओं को पूरा करना होता है.
यह यात्रा उत्तराखंड, दिल्ली और सिक्किम राज्य की सरकारों और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से आयोजित की जाती है. कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) तथा उनके संबद्ध संगठन भारत में यात्रियों के हर जत्थे के लिए सहायता और सुविधाएं मुहैया कराते हैं. दिल्ली हार्ट एवं लंग इंस्टीट्यूट (डीएचएलआई) इस यात्रा के लिए आवेदकों के स्वास्थ्य स्तरों के निर्धारण के लिए चिकित्सा जांच करता है.
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