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Places to Visit in Datia : दतिया में घूमने के लिए क्या क्या हैं Spots, जानिए यहां पर

Places to Visit in Datia : दतिया (Datia), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के Bundelkhand अंचल में बसा वह प्राचीन नगर है जहाँ इतिहास, आस्था और स्थापत्य एक साथ साँस लेते हैं। ‘लघु वृंदावन’ के नाम से प्रसिद्ध यह शहर अपने असंख्य मंदिरों और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित पीतांबरा पीठ (माँ बगलामुखी देवी मंदिर) देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है, जहाँ साधना और तंत्र परंपरा की विशेष मान्यता है। मान्यता है कि यहाँ की साधना शीघ्र फलदायी होती है, इसलिए देशभर से साधक और श्रद्धालु यहाँ आते हैं। दतिया का गौरव केवल धार्मिकता तक सीमित नहीं है—महाभारत काल से जुड़ा वंकखंडेश्वर शिव मंदिर इसकी प्राचीनता का प्रमाण देता है, जबकि पास ही स्थित सोनगिरी जैन तीर्थ अपनी शांत पहाड़ियों पर विराजमान श्वेत मंदिरों की श्रृंखला से आध्यात्मिक सौंदर्य रचता है।

इतिहास के पन्नों में झाँकें तो 17वीं सदी में बुंदेला शासक वीर सिंह देव द्वारा निर्मित सात-मंजिला दतिया महल (वीर सिंह देव पैलेस) स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। बिना लोहे और लकड़ी के सहारे बना यह विशाल महल राजपूत और मुगल शैली के समन्वय को दर्शाता है। इसकी ऊँची-ऊँची दीवारें, झरोखे और आंतरिक आँगन उस स्वर्णिम युग की गवाही देते हैं जब बुंदेलखंड अपनी समृद्ध संस्कृति और शौर्य के लिए प्रसिद्ध था। भौगोलिक दृष्टि से दतिया ग्वालियर (लगभग 75 किमी) और झाँसी (लगभग 34 किमी) के निकट स्थित है, जिससे यह ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन जाता है। दतिया केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, कला और विरासत का जीवंत संगम है, जहाँ हर गली किसी कथा और हर मंदिर किसी विश्वास की कहानी कहता है

श्री पीताम्बरा पीठ मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है. यह स्थल अपनी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक महत्ता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है. पीठ राज्य के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है और देशभर से श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं.0

श्री पीताम्बरा पीठ परिसर में कई मंदिर स्थित हैं, जिनकी अपनी अलग पहचान, स्थापत्य और इतिहास है. इस वीडियो में हम श्री पीताम्बरा पीठ के महत्व को जानेंगे। चाहे आप आध्यात्मिक शांति की तलाश में हों या भारत की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को करीब से देखना चाहते हों—यह स्थान अवश्य देखने योग्य है, साथ ही यहां स्थित सोनागिरी की यात्रा पर भी हम आपको लेकर चलेंगे. वीडियो में अंत तक बने रहें, आइए बढ़ते हैं सफर में आगे…

श्री पीताम्बरा पीठ को दतिया पीठ भी कहा जाता है और यह देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। वन्खंडेश्वर जैसे प्राचीन मंदिरों के कारण यह स्थल भारत के सबसे पुराने आध्यात्मिक केंद्रों में गिना जाता है।

पीठ की स्थापना की कथा वर्ष 1929 से जुड़ी है, जब ब्रह्मलीन पूज्यपाद राष्ट्रगुरु अनंत श्री विभूषित स्वामी जी महाराज दतिया नगर में एक रात के लिए रुके। उस समय दतिया संस्कृत के विद्वानों का प्रमुख केंद्र था। उनकी साधना और विद्वता से प्रभावित होकर युवा संन्यासी ने यहीं पाँच वर्षों तक तपस्या करने का निर्णय लिया।

तपस्या पूर्ण होने के बाद स्वामी जी ने दतिया में इस पवित्र धाम की स्थापना की। जहाँ उन्होंने साधना की, वह स्थान ‘माई मंदिर’ कहलाया और आश्रम को ‘श्री पीताम्बरा पीठ’ के नाम से जाना गया।

आज यह पीठ एक ट्रस्ट द्वारा संचालित है। यहाँ एक समृद्ध पुस्तकालय भी है, जिसमें आश्रम का इतिहास और मंत्रों के रहस्य संजोए गए हैं। साथ ही, यह आश्रम संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए भी जाना जाता है, विशेषकर बच्चों के बीच।

श्री पीताम्बरा पीठ श्रद्धालुओं और पर्यटकों—दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ वर्षभर भक्तों की आवाजाही बनी रहती है। आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। बगलामुखी और धूमावती मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के कारण विशेष आकर्षण हैं।

माँ बगलामुखी इस पीठ की प्रमुख देवी हैं। उन्हें बाधाओं और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी महिमा को समझने के लिए ‘बगलामुखी रहस्यम्’ नामक ग्रंथ का उल्लेख किया जाता है, जो महाविद्या साधना और आत्मज्ञान की दिशा दिखाता है।

मंदिर में माँ बगलामुखी की सुंदर प्रतिमा स्थापित है, जिसे भक्तों द्वारा अर्पित आभूषणों से सजाया गया है। मंदिर की वास्तुकला राजपूत और मराठा शैलियों का सुंदर मिश्रण है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहाँ देवी का आशीर्वाद लेने आते हैं।

हरिद्रा सरोवर

मुख्य मंदिर के सामने स्थित हरिद्रा सरोवर या हल्दी सरोवर परिसर का प्रमुख आकर्षण है। मान्यता है कि एक प्रलयंकारी तूफान को शांत करने के लिए माँ बगलामुखी इसी सरोवर से प्रकट हुई थीं। सरोवर के मध्य में भगवती पीताम्बरा को समर्पित एक सुंदर यंत्र स्थापित है और किनारों पर विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर हैं।

धूमावती मंदिर

जहाँ अन्य देवी स्वरूप सांसारिक सुख और मोक्ष प्रदान करते हैं, वहीं देवी धूमावती साधक को वैराग्य की ओर ले जाकर मोक्ष मार्ग पर अग्रसर करती हैं। यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला, सूक्ष्म नक्काशी और सुंदर मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। देश में देवी धूमावती के बहुत कम मंदिर हैं। मान्यता है कि भारत-चीन युद्ध के समय स्वामी जी ने भारत की विजय के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी।

श्री गुरु स्मृति संग्रहालय

मुख्य मंदिर परिसर के उत्तरी भाग में स्थित यह संग्रहालय पूज्यपाद स्वामी जी से जुड़ी वस्तुओं—पुस्तकों, चित्रों और अन्य स्मृतियों—को संजोए हुए है।

संस्कृत पुस्तकालय

पीठ परिसर में स्थापित यह संस्कृत पुस्तकालय स्वामी जी द्वारा प्रारंभ किया गया था। यहाँ 6,000 से अधिक ग्रंथ हैं, जिनमें आश्रम का इतिहास, विभिन्न साधनाओं और तंत्र-मंत्रों के रहस्य वर्णित हैं। मंदिर परिसर में ही एक गुरुकुल भी है जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए बच्चे भारतीय संस्कृति की शिक्षा लेते हैं.

दतिया के पीतांबरा पीठ पर ही एक भोजनालय भी है. यदि भक्तगण यहां दर्शन उपरांत भोजन लेना चाहते हैं तो यहां मात्र 10 रुपए में उत्तम आहार की सुविधा उन्हें मिलती है.

श्री पीताम्बरा पीठ, दतिया एक ऐसा आध्यात्मिक स्थल है जहाँ इतिहास, संस्कृति और साधना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ की यात्रा श्रद्धालुओं और पर्यटकों—दोनों के लिए प्रेरणादायक और ऊर्जा से भर देने वाली होती है।

मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है। इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं। राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं।

पीतांबरा पीठ से लगभग 16–17 किलोमीटर दूर दतिया जिले की शांत पहाड़ियों के बीच स्थित सोनागिरी जैन तीर्थ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि तप, त्याग और मोक्ष की साधना का जीवंत प्रतीक है। ‘सोनागिरी’ का अर्थ है — स्वर्णिम पर्वत। प्राचीन काल में इसे श्रवणगिरि या स्वर्णगिरि कहा जाता था। जैन परंपराओं के अनुसार, यहाँ असंख्य मुनियों ने कठोर तप कर निर्वाण प्राप्त किया। मान्यता है कि जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु यहाँ 17 बार पधारे थे, और इसी पर्वत पर राजा नग और अनंग कुमार ने मोक्ष प्राप्त किया। इसीलिए जैन समाज में सोनागिरी का नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान से लिया जाता है। यह स्थान विशेष रूप से दिगंबर जैन संप्रदाय का प्रमुख सिद्धक्षेत्र माना जाता है, जहाँ आज भी साधु-संतों की तपस्या और साधना का क्रम निरंतर चलता रहता है।

सोनागिरी की पहाड़ी पर बने 77 श्वेत संगमरमर और पत्थर के मंदिर दूर से ही एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करते हैं। ये मंदिर लगभग 132 एकड़ क्षेत्र में दो जुड़ी हुई पहाड़ियों पर फैले हैं। मुख्य मंदिर, जिसे 57 नंबर मंदिर के नाम से जाना जाता है, भगवान चंद्रप्रभु को समर्पित है। यहाँ विराजमान उनकी 17 फुट ऊँची मूलनायक प्रतिमा अत्यंत प्रभावशाली है। गर्भगृह की छत पर की गई काँच की सुंदर नक्काशी और सभा कक्ष में अंकित सभी 24 तीर्थंकरों के नाम इसकी आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाते हैं। पहाड़ी पर स्थित 43 फुट ऊँचा महास्तंभ श्रद्धा का प्रतीक है। मंदिरों तक पहुँचने के लिए लगभग 84 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो साधक को तप और धैर्य का संदेश देती हैं। पहाड़ी की तलहटी में बसे सोनागिर गाँव में भी 26 जैन मंदिर स्थित हैं, जिनमें धर्मशालाएँ, भोजनशालाएँ और यात्रियों के ठहरने की उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है।

ऐतिहासिक दृष्टि से यहाँ के मंदिरों का निर्माण मुख्यतः 9वीं–10वीं शताब्दी से प्रारंभ हुआ माना जाता है, जबकि समय-समय पर विभिन्न राजवंशों और जैन श्रावकों द्वारा इनके जीर्णोद्धार और विस्तार का कार्य किया गया। मंदिरों की स्थापत्य शैली सरल किन्तु आध्यात्मिक गरिमा से परिपूर्ण है—ऊँचे शिखर, शांत प्रांगण और स्वच्छ सफेद संरचनाएँ यहाँ की पहचान हैं। यहाँ प्रतिवर्ष होली के अवसर पर पाँच दिवसीय विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। मेले के दौरान रथ यात्राएँ, विशेष पूजन और धार्मिक प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।

पर्यटन की दृष्टि से भी सोनागिरी अत्यंत आकर्षक है। पहाड़ी से दिखने वाला बुंदेलखंड का विस्तृत दृश्य, सूर्योदय और सूर्यास्त का अलौकिक नज़ारा, तथा मंदिरों की श्वेत आभा मिलकर इसे फोटोग्राफी और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए आदर्श बनाते हैं। यहाँ पहुँचने के लिए सड़क और रेल मार्ग की सुविधा उपलब्ध है। सोनागिर रेलवे स्टेशन दिल्ली–भोपाल मार्ग पर स्थित है, जबकि ग्वालियर और झाँसी निकटतम बड़े शहर हैं। सोनागिरी केवल मंदिरों का समूह नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आंतरिक शांति की खोज का वह पवित्र स्थान है, जहाँ हर कदम साधना की ओर और हर शिखर मोक्ष की ओर संकेत करता है।

दोस्तों, आइए जानते हैं कि आप दतिया कैसे पहुंच सकते हैं. दतिया (मध्य प्रदेश) बुंदेलखंड क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है, जहां हवाई, रेल और सड़क—तीनों मार्गों से सुगमता से पहुँचा जा सकता है।

हवाई मार्ग से:
दतिया में वर्तमान में रेग्युलर कमर्शल उड़ानों की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नजदीकी प्रमुख हवाई अड्डा ग्वालियर एयरपोर्ट है जिसे राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता है, जो दतिया से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है। ग्वालियर एयरपोर्ट से दिल्ली और कुछ अन्य प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें उपलब्ध रहती हैं। एयरपोर्ट से दतिया तक टैक्सी या बस द्वारा लगभग दो से तीन घंटे में पहुँचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त आगरा का खेरिया एयरपोर्ट दतिया से लगभग 212किलोमीटर दूर है, लेकिन ग्वालियर एयरपोर्ट अधिक सुविधाजनक विकल्प माना जाता है।

रेल मार्ग से:
दतिया पहुँचने का सबसे सुविधाजनक और लोकप्रिय साधन रेल है। दतिया रेलवे स्टेशन (स्टेशन कोड: DAA) दिल्ली–मुंबई मुख्य रेल मार्ग के झांसी–ग्वालियर सेक्शन पर स्थित है। यह स्टेशन नई दिल्ली, आगरा, ग्वालियर, झांसी, भोपाल, मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। नई दिल्ली से दतिया तक यात्रा में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लगता है। कई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें यहाँ रुकती हैं। इसके अलावा सोनागिर रेलवे स्टेशन (स्टेशन कोड: SOR) भी निकट में स्थित है, जो विशेष रूप से सोनागिरी जैन तीर्थ जाने वाले यात्रियों के लिए सुविधाजनक है।

सड़क मार्ग से:
दतिया राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (NH-44) के निकट स्थित है, जो देश के प्रमुख उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर का हिस्सा है और श्रीनगर से कन्याकुमारी तक जाता है। झांसी और ग्वालियर से दतिया के लिए अच्छी सड़क सुविधा उपलब्ध है। झांसी से दतिया की दूरी लगभग 30–35 किलोमीटर है और यहाँ से 30–45 मिनट में पहुँचा जा सकता है। ग्वालियर से दूरी लगभग 70–75 किलोमीटर है, जिसे सड़क मार्ग से 1.5 से 2 घंटे में तय किया जा सकता है। मध्य प्रदेश राज्य परिवहन और निजी बस सेवाएँ नियमित रूप से संचालित होती हैं। टैक्सी और निजी वाहन से भी दतिया पहुँचना आसान और आरामदायक है।

इस प्रकार दतिया तक पहुँचने के लिए रेल सबसे सुविधाजनक विकल्प है, जबकि हवाई यात्रा करने वाले यात्री ग्वालियर तक पहुँचकर सड़क मार्ग से आसानी से दतिया आ सकते हैं. तो दोस्तों कैसी लगी हमारी ये पेशकश आपको, जरूर बताएं… ऐसे ही दिलचस्प जानकारी के लिए पढ़ते रहें ट्रैवल जुनून…

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