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Angkor wat : इस शहर में है दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर, आपको दे रहा है कमाने का मौका!

Angkor wat : भारत में भारतीय लोग उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्व से भलीभांति परिचित हैं लेकिन उत्तर-पूर्व का जिक्र आते ही उनकी रुझान थोड़ा कम सा हो जाता है. और बात जब उत्तर-पूर्व से आगे किसी दूसरे देश की हो तो बात ही क्या करें. हम बात कर रहे हैं कंबोडिया की. आमतौर पर भारतीय इसे थाइलैंड, म्यांमार से जोड़कर ही देखते हैं. हालांकि हकीकत कुछ और ही है. ये बात हम सभी को जान लेनी चाहिए कि दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर और धार्मिक स्मारक इसी देश में है. कंबोडिया के अंकोर में ही अंकोरवाट (Angkor wat) मंदिर है, इसका प्राचीन नाम ‘यशोधरपुर’ था. इस मंदिर का निर्माण सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में हुआ था जो 1112-53 ईस्वी के बीच था. कंबोडिया में बना यह विष्णु मंदिर दुनिया में मशहूर है लेकिन यहां आपको यह जान लेना भी जरूरी है कि सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय से पहले के शासकों ने देश में शिवमंदिरों का ही निर्माण कराया था.

कंबोडिया में आज भी बड़ी संख्या में हिंदू मंदिर हैं जो इस बात की गवाही देते हैं कि कभी हिंदू धर्म का विस्तार यहां तक भी था और था ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म यहां चरम पर पहुंचा था. पुरातन काल का कंबोजदेश, मध्यकाल का कंपूचिया और फिर वर्तमान का कंबोडिया. कभी यहां हिंदू धर्म की पौध लहलहाती थी जो बौद्ध धर्म के उदय के बाद लुप्त सी हो गई. सदियों का कालखंड तलाशने पर मालूम चलता है कि यहां पर 27 राजाओं ने शासन किया था. कभी हिंदू तो कभी बौद्धों के हाथ में यहां की सत्ता रही. इसी वजह से पूरे कंबोडिया में दोनों ही धर्मों को निशान मिलते हैं और इससे संबंधित देवी-देवताओं की मूर्तियां भी बिखरी मिलती हैंय

कंबोडिया में बौद्ध धर्म प्रमुख है तो भगवान बुद्ध का होना स्वाभाविक है लेकिन हर जगह में से कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश में से कोई विराज न हो. अंगकोरवाट की बात ही सबसे अलग है. यहां का विष्णु मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा विष्णु मंदिर है और सबसे बड़ा मंदिर परिसर है. ये मंदिर वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में भी है.

यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि 14वीं सदी में बौद्ध धर्म का देश में प्रभाव तेजी से बढ़ा. इस दौरान यहां के बौद्ध शासकों ने अंकोरवाट मंदिर को बौद्ध स्वरूप में ढाल दिया. इसके बाद के कालखंड में यह मंदिर गुमनामी के गोते लगाता रहा लेकिन एक फ्रांसीसी पुरातत्वविद् ने इसे तलाशा.

Siem Reap, Cambodia में है ये शानदार होटेल

मंदिर का आज जो रूप है उसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का योगदान सबसे अहम है. सन् 1986 से 1993 तक एएसआई ने इस मंदिर के लिए संरक्षण का कार्य किया. अंगकोरवाट मंदिर की दीवारें हिंदू धर्म में पवित्र स्थान रखने वाले रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाती हैं.

सीएम रिप (Siem Reap), कंबोडिया में एक शानदार रेस्टोरेंट

Siem Reap कंबोडिया के उत्तर पश्चिम में स्थित है. यह अंकोर प्रांत का प्रवेश द्वारा है रिसॉर्ट टाउन के रूप में खासा मशहूर है. यहां पर आप औपनिवेशिक और चीन स्टाइल का आर्किटेक्चर देख सकते हैं. शहर में म्यूजियम हैं, पारंपरिक अप्सरा डांस परफॉर्मेंस है, कंबोडियन सांस्कृतिक गांव है, हेंडिक्राफ्ट शॉप हैं, शिल्क फार्म हैं, फिशिंग विलेज है और बर्ड सेंचुरी भी है. सीएम रिप आज एक मशहूर ट्रेवल डेस्टिनेशन है, यहां बड़ी संख्या में होटल, रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट हैं.

सीएम रिप में कई इंडियन रेस्टोरेंट भी है. इसी में से एक है जोधपुर रेस्टोरेंट. यहां हर कस्टमर को इंडिया की झलक देने की कोशिश होती है. यहां प्रवेश करते ही आपको लगेगा कि आप भारत के ही राजस्थान प्रांत में हैं. ये एक शानदार हवेली के आकार का है जिसमें एक छोटी सी कॉफी मशीन है. यहां नीलगिरी के अत्तिंकन एस्टेट से लाई गई खास कॉफी पिलाई जाती है. यहां भारत के खास मसालों से एक विशेष कॉकटेल भी टूरिस्ट्स को पिलाई जाती है. यहां एक मीना बाजार भी है जहां भारतीय वस्तुएं बिकती हैं.

कंबोडिया में है शानदार होटेल

जोधपुर रेस्टोरेंट में तवा तंदूर कढ़ाही पर बनाये गए तरह तरह के व्यंजन मिलते हैं. कोशिश ये की जाती है कि उत्तर भारत के राजघरानों की रेसपीज से पर्यटकों को रूबरू कराया जाए. खास व्यंजनों में मंडोर मास, अमृतसरी मछली और बत्तख कढ़ाही है. इसके इलावा यहां आयुर्वेदा टेक्निक से बनाये गए खानों का भी स्पेशल मेनू है. तरह तरह की चटनियां और तरह तरह की रोटियां भी यहां पर मिलती हैं. भारत से बाहर भारतीयों को भारतीय खाने की तलाश रहती है जो कम ही मिलता है. भारतीयों की ये तलाश इस रेस्टोरेंट में भरपूर तरीके से पूरी होती है.

जोधपुर रेस्टोरेंट को नीले रंग से सजाया गया है. कहा जाता है कि राजस्थान में घर को रंग करने के लिए नील का उपयोग ब्राह्मण घरानों में किया जाता था. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि नीला रंग शुभ माना जाता था. यह भी कहा जाता है कि नील के इस्तेमाल से घर ठंडे रहते थे. पुराने वक्त में नील महंगी थी इसलिए संपन्न घरों पर ही इससे पुताई होती थी. 348 स्क्वेयर मीटर में बना ये शानदार रेस्टोरेंट किराये के लिए उपलब्ध है. अगर आप इस बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो इस नंबर +85586408720 पर वॉट्सऐप कॉल कर सकते हैं. रेफरेंस और ऑफर का लाभ उठाने के लिए Travel Junoon का नाम जरूर लें.

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