इस आर्टिकल में मैं आपको अयोध्या से रौनाही कस्बे ( Raunahi Town ) में पड़ने वाले धन्नीपुर गांव ( Dhannipur Village in ayodhya ) की अपनी यात्रा के बारे में बताऊंगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने, सुन्नी वक्फ बोर्ड ( Sunni Waqf Board ) को पांच एकड़ भूमि यहीं पर दी है
अयोध्या देश में इस वक्त धर्मिक शहरों की सूची में सबसे ज़्यादा चर्चा में है. मुझे भी हाल में अयोध्या घूमने ( Ayodhya Tour ) का अवसर मिला. हालांकि, अयोध्या की मेरी ये यात्रा ( My Ayodhya Tour ) कोरोना काल में और लॉकडाउन के बीच ही रही. अयोध्या की अपनी इस यात्रा ( My Ayodhya Tour ) में, मैं राम घाट ( Ram Ghat ), लक्ष्मण घाट ( Laxman Ghat ), राम जन्मभूमि ( Shri Ram Janmbhoomi ), हनुमानगढ़ी ( Hanumangarhi ) , आदि जगहों पर गया. मैंने स्टे सुग्रीव किले ( Sugreev Fort ) के सामने बने बिड़ला धर्मशाला ( Birla Dharmshala in Ayodhya ) में किया था. इस आर्टिकल में मैं आपको सिर्फ अयोध्या से रौनाही कस्बे ( Raunahi Town ) में पड़ने वाले धन्नीपुर गांव ( dhannipur village in ayodhya ) की अपनी यात्रा के बारे में बताऊंगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने, सुन्नी वक्फ बोर्ड ( Sunni Waqf Board ) को पांच एकड़ भूमि यहीं पर दी है.
सुन्नी वक्फ बोर्ड ( Sunni Waqf Board ) को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत थाना रौनाही के पास स्थित ग्राम धन्नीपुर ( dhannipur village in ayodhya ) में पांच एकड़ जमीन आवंटित की गई है. यह भूमि लखनऊ-अयोध्या राजमार्ग ( Lucknow Ayodhya Highway ) पर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर थाना रौनाही के 200 मीटर पीछे है, जबकि रामलला जन्म स्थान से इसकी दूरी करीब 25 किलोमीटर है. सोहावल तहसील में पड़ने वाली इस जमीन के आस-पास मुस्लिम आबादी है. इस भूमि पर सुन्नी वक्फ बोर्ड मस्जिद एवं उससे जुड़ी सुविधाओं के विकास के लिए स्वतंत्र होगा.
मैं अगस्त 2020 में, अयोध्या के दौरे ( Ayodhya Tour ) पर था. अयोध्या में हम कुल तीन दिन रुके थे. दो दिन, अयोध्या में बिताकर हम जब लखनऊ की तरफ लौटते हैं, वहीं रास्ते में धन्नीपुर गांव ( dhannipur village in ayodhya ) है. इस गांव में आपको संपन्नता का अहसास प्रवेश के साथ ही हो जाएगा. गांव की आबादी भी बहुत है. गांव पहुंचने से पहले, मुझे उस ज़मीन के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं थी जिसे सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ( Sunni Waqf Board ) को यूपी सरकार ने दिया था. हालांकि, प्रवेश करते ही पुलिस चौकी के पीछे आपको वही जमीन आसानी से दिख जाती है. इस ज़मीन को क्योंकि मैं टीवी चैनलों में बहुत देख चुका था इसलिए तुरंत ही इसकी पहचान हो गई.
मैं इसके बाद, गांव में ही एक मदरसे में पहुंचा. मदरसे में कुछ बच्चे इस्लामिक शिक्षा की तालीम ले रहे थे. धन्नीपुर गांव ( Sunni Waqf Board ) की यही खासियत है. यहां आपको सभी धर्म की शिक्षा का प्रचार और प्रसार देखने को मिलता है. मदरसे में कुछ देर रुककर, मैं एक स्थानीय बच्चे की मदद से सरयू के घाट पहुंच गया. सरयू के इस घाट पर, मुझे बच्चे खेलते हुए दिखाई दिए. मैंने उन सभी से बात को करनी चाही लेकिन कोई तैयार ही नहीं हुआ.
इसके बाद, दो बोलैरो के आगे, दो और लोग खड़े दिखाई दिए. मैंने उनसे भी बात करने की कोशिश की. यहां भी ना ही सुनने को मिली. इसके बाद, मैंने वहीं सरयू के किनारे पर खड़े होकर, रौनाही गांव के व्लॉग का इंट्रो शूट किया और आगे बढ़ चला. आगे चलते चलते, मुझे गांव के ही कुछ युवा बैठे मिले. मैंने उनसे बातचीत का अनुरोध किया तो उनमें से एक शख्स सहजता से तैयार हो गए. हालांकि, बाकी लोग अब भी सहज नहीं थे.
अब मैंने, उनसे कुछ कहने का अनुरोध किया तो वह हिचकिचाए. हालांकि पीछे से धन्नीपुर गांव के ही उनके कुछ संगी साथी उन्हें बोलने के लिए कहते रहे. मेरे भी बार बार अनुरोध पर उन्होंने कहा कि गांव में हर तरह की शांति है. उन्होंने बताया कि धन्नीपुर गांव में 60 फीसदी मुस्लिम हैं और 40 फीसदी हिंदू. सामने खड़े, प्रताप नाम के शख्स की तरफ उन्होंने इशारा किया और कहा कि आप इनसे भी पूछ सकते हैं. मैंने कैमरा प्रताप जी की तरफ घुमाया. प्रताप जी ने कहा- हम यहीं पैदा हुए और यहां से कहीं गए भी नहीं. यह सुनकर, सचमुच दिल को बहुत सुकून मिला.
यहां पर, मेरे साथियों का फोन आना शुरू हो गया. मुझे यहां से उस ज़मीन के पास पहुंचना था जिसे सुन्नी वक्फ़ बोर्ड को दिया गया था. मैं चल रहा था कि मेरी नज़र एक मस्जिद पर गई. मस्जिद के ठीक सामने एक जैन मंदिर बना हुआ था. दोस्तों, मैं हैरान रह गया. मेरे साथ चल रहे उस बच्चे से मैंने सवाल किया, क्या गांव में सब आराम से रहते हैं. उस बच्चे ने कहा, बहुत आराम से. गांव में सभी धर्मों के बीच एक परस्पर संवाद देखखर मैं अभिभूत था.
मैं यहां से निकलकर आगे बढ़ा और एक बाइक वाले से लिफ्ट लेकर गांव के प्रवेश द्वार तक आया. बाइक वाले शख्स ने मुझे थाने के बाईं तरफ उतारा था लेकिन मुझे थाने से दाहिनी तरफ वाले द्वार पर आना था. मैं धन्नीपुर गांव की तरफ जाने वाले रास्ते पर रखी एक कुर्सी पर बैठ गया. यह कुर्सी एक पान के खोखे के बराबर में थी. मैं दौड़ दौड़कर थक चुका था. मैंने दुकान से ही एक पानी की बोतल खरीदनी चाही. हालांकि, वहां कनस्तर में पानी रखा हुआ था, सो इसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ी.
अब दुकानदार ने मुझसे बतियाना शुरू कर दिया. दोस्तों, यकीन मानिए, मेरे हाथ में एक कैमरा देखकर उन खोखे वाले भैया का भरोसा बढ़ गया था. ये भरोसा सिस्टम पर था. उन्होंने कहा कि आप लोगों की वजह से ही देश चल रहा है. उन्होंने पान बनाया और मेरी तरफ बढ़ा दिया. मैंने पान खाया और पैसे निकालकर उन्हें देने लगा. मेरे बार बार अनुरोध पर भी उन्होंने पैसे लिए नहीं. उल्टा कहने लगे, अरे आप लोगों से पैसे कैसे लेंगे! मैंने भी ये महसूस किया कि भले ही यूट्यूब चैनल के लिए व्लॉग बनाऊं लेकिन कर्तव्य ये भी ज़िम्मेदारी भरा है और मैंने निश्चय किया कि सदैव इसका ख्याल रखूंगा.
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