Dharamshala Travel Blog Day 1 : धर्मशाला में कैसा रहा हमारी यात्रा का पहला दिन, जानें पूरा ट्रैवल ब्लॉग
Dharamshala travel Blog Day 1 : Dharamshala उत्तर भारत का एक शहर है. यह Himachal Pradesh की शीतकालीन राजधानी है और कांगड़ा घाटी की ऊपरी ढलानों में स्थित है. मठों, बर्फ से ढके पहाड़ों,Tibetan Architecture और देवदार और चीड़ के पेड़ों की घनी वनस्पतियों के शानदार नज़ारों के साथ, Dharamshala प्रकृति प्रेमियों के लिए एक परफेक्ट जगह है. यहां हर साल बड़ी संख्या में यात्रियों को आकर्षित करता है. दोस्तों आज मैं आप लोगों से अपनी तीन दिन की Dharamshala यात्रा का एक्सपीरियंस शेयर करने जा रही हूं. जिसमें आपको में हर प्रकार की जानकारी दूंगी. हमारी यात्रा की शुरुआत 21 फरवरी से हुई. सुबह 8 हमने Kashmere gate bus stand से लिए कैब बुक किया. कैब आने के बाद मैं, पति चिन्मय और 3 साल की बेटी के साथ घर से निकल गए. Kashmere gate bus stand के लिए फिर 9: 30 के आस-पास Kashmere gate bus stand पहुंच गए.
वहां हमें थोड़ी देर Bus का इंतजार करना पड़ा, इसी बीच बेटी रोने लगी और फिर जैसे तैसे उसे चुप कराया फिर बस में बैठ गए. दोस्तों बता दें हमने Bus की टिकट ऑनलाइन बुक की थी. एक टिकट की कीमत 1500 रु है. हम लोग रात के 11 बजे Dharamshala पहुंच गए. बस ने हमलोगों को Petrol Pump के पास उतारा. फिर टैक्सी वाले हमारे पास आए पूछने के लिए कहां जाना हम लोगों मना कर दिया और बोले हमलोग खुद से चले जाएंगे. क्योंकि हमनें Circuit House बुक किया था जो Petrol Pump से डेढ़ किलोमीटर दूरी पर था. हमने समान उठाया और चल दिए Circuit House की ओर.
थोड़ी दूर तक चलने के बाद हमलोग रूक गए क्योंकि पहाड़ी रास्ते पर चलने की आदत हमें नहीं है . फिर Circuit House पहुंचे और रिसेप्शन पर बैठे राजेश से रूम की चाभी ली और रूम में जाकर सो गए. 22 फरवरी की सुबह हमलोग 7 बजे उठे और जल्दी- जल्दी फ्रेश हुए उसके बाद नाश्ते में आलू पराठा और दही खाया और Tea Garden घूमने निकल पड़े. Tea Garden अभी बंद था तो हमलोग अंदर नहीं जा सके, क्योंकि आम पब्लिक मार्च से खुलता है. हमलोग बुरी तरह से थक गए थे फिर सड़क किनारे हमने नीचे जाने के लिए एक गाड़ी वाले से लिफ्ट ली उसने हमसे 100 रूपए लिए और धर्मशाला टैक्सी स्टैंड पर छोड़ दिया, फिर हमने स्कूटी रेंट पर लेने की सोची और मेरे पति चिन्मय स्कूटी को पता करने चले गए. मां- बेटी Taxi Stand के पास में खड़े होकर उनका इंतजार करने लगे.
फिर वो आए और बोले की स्कूटी बिना लाइसेंस नहीं मिलेंगी. आपको बता दें हमलोग लाइसेंस लेकर नहीं गए थे. फिर मैक्लोड़गज के लिए शेयरिंग टैक्सी में बैठ गए. धर्मशाला से मैक्लोड़गज जाने के लिए टैक्सी वाले 20 रूपए चार्ज करते हैं. Mcleodganj Taxi Stand पर उतरकर हमलोग चाय पीने के लिए एक शॉप पर रूके इसी बीच एक टैक्सी ड्राइवक हमारे पास आया और बोला सर टैक्सी बुक करनी है फिर चिन्यम ने बात की उसने चार प्वाइंट घूमाने के लिए 1500 रूपए मांगे मैंने बारगेनिंग की फिर वो 1200 में मान गया और चाय पीने के बाद हमलोग पहले प्वाइंट Namgyal Monastery के लिए निकल गए और रास्ते में हमारी नजर पड़ी रोपवे पर हमने फिर ड्राइवर से पूछा ये कहा तक जाती है तो उसने बताया कि ये Mcleodganj से धर्मशाला जाती है, ये सुनने के बाद हमलोगों ने डिसाइड किया कि घर्मशाला रोपवे से जाएंगे.
अब आपको Namgyal Monastery के बारे में बतातें हैं. यह 14वें दलाई लामा का निजी मठ है. इस मंदिर परिसर का दूसरा नाम नामग्याल तांत्रिक महाविद्यालय है. यहां हमलोग घूमें और बहुत सारी फोटोस क्लिक करवाई.
उसके बाद में हमलोग दूसरे प्वाइंट Bhagsu fall के लिए निकल गए. Bhagsu fall जाने के लिए थोड़ी चढ़ाई करनी पड़ी हमलोग निकल तो पड़े लेकिन चढ़ाई देखकर हमलोगों की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि बेटी को लेकर जाना पोसिबल नहीं था. आपको बता दें Bhagsu fall में पानी न के बराबर ही आ रहा था दूर से देखने के बाद हमलोग निकल पड़े तीसरे प्वाइंट Naddi view point के लिए. ये हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला क्षेत्र में स्थित एक आकर्षक गांव नड्डी है. यह हिमालय के शानदार नज़ारों के लिए जाना जाता है. यह कांगड़ा घाटी की ऊपरी पहुंच में समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. हमलोग टैक्सी से उतरे और हमारी नजर चना बेचने वाले पर पड़ी फिर हमने 50 को चना खरीदा फिर चलते रहे. उसके बाद Naddi view point पहुंच गए.
वहां हमने फोटो क्लिक की थोड़ा घूमा फिर वहां की लोकल दुकान से बेटी के लिए जैकट खरीदा उसके बाद हम निकल पडे़ चौथे और आखरी प्वाइंट के लिए St. John in the Wilderness Church के लिए ये धर्मशाला के खूबसूरत शहर में स्थित, सेंट जॉन इन द वाइल्डरनेस चर्च एक ऐतिहासिक स्थल है. भारत के औपनिवेशिक इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है. 1852 में निर्मित और इसके संस्थापक रेवरेंड जॉन हेनरी केर के नाम पर, यह चर्च एक अनूठी कहानी के साथ वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण नमूना है.यहां पहुंचे के बाद हमलोग थोड़ा घूमें आस-पास बहुत सारे देवदार के पेड़ थे वहां भी मैनें और बेटी ने फोटो किल्क करवाई.
फिर ड्राइवर से कहा कि रोपवे जहां से लेते हैं वहां छोड़ दे उसने कहां वहां जाने के लिए एक्सट्रा पैसे लगेगे फिर मैंने पूछा कितना उसने कहा 200 मैनें कहां 100 ले लो भईया उसने नहीं माना फिर मैनें कहा ठीक 200 ले लोना. उसने Ropeway के पास छोड़ दिया. टैक्सी उतरने के बाद मैं टिकट पता करने गई तो एक व्यक्ति का किराया 482 था, फिर चिन्मय नें टिकट लिया फिर हमलोग चैंकिग प्वाइंट पर पहुंचे जहां पर बैग खोलकर चैक किया जिसमें खाने का समान था महिला गार्ड ने कहा खाने का समान खोलना नहीं ऊपर में मैंने कहा ठीक. फिर हमलोग अपनी टर्न का इंतजार करने लगे. जब Ropeway में बैठकने की बारी आई तो मैं बहुत एक्साइटिड थी लेकिन जब स्टार्ड हुआ तो मेरी हालत खराब हो गई. मेरी बेटी बहुत इंज्वॉय कर कर रही थी तो मैनें सोचा चलो पैसा वसूल हो गया. 12 मिनट में हमलोग धर्मशाला पहुंच गए. उसके बाद हमलोग सर्किट हाउस पहुंचे और डिनर किया फिर सो गए…
अब हम दूसरे दिन कहां- कहां घूमने इसके बारे में अब आपको जल्द ही बताएंगे…
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