jhansi mein ghumne ki 10 jaghen best 10 places to visit in jhansi
Jhansi Travel Guide – Jhansi Mein Ghumne ki 10 Jaghen : उत्तर प्रदेश का शहर झांसी इतिहास प्रेमियों और यात्रियों के लिए राज्य में आने पर ज़रूर देखने लायक जगह है. बुंदेलखंड क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से में स्थित झांसी, बेतवा और पहूज नदियों के किनारे बसा हुआ है. यह शहर विशेष रूप से रानी लक्ष्मीबाई, जिन्हें “झांसी की रानी” कहा जाता है, के निवास और शासन स्थल के रूप में फेमस है.
झांसी का नाम राजा बीर सिंह देव द्वारा बनवाए गए झांसी किले से पड़ा. कहा जाता है कि दूर पहाड़ी से देखने पर किला केवल धुंधली-सी परछाईं जैसा दिखाई देता था, जिसे स्थानीय भाषा में ‘झांसी’ कहा गया. यह ऐतिहासिक नगर कभी चंदेल वंश की सत्ता का केंद्र भी रहा. पहले झांसी को बलवंतनगर कहा जाता था, जो किले के चारों ओर बसी एक चारदीवारी वाली नगरी थी.
शहर की गलियों से लेकर ऐतिहासिक इमारतों तक फैले साक्ष्य बताते हैं कि झांसी की जड़ें इतिहास में बहुत गहराई तक फैली हुई हैं, यही कारण है कि लोग इस शहर की ओर आकर्षित होते हैं.
झांसी के सबसे नज़दीकी बड़ा शहर ग्वालियर है, ये मध्य प्रदेश में 99 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के चलते झांसी के विकास को गति मिली है, जिससे आधुनिक समय में रियल एस्टेट का भी तेज़ी से विस्तार हुआ है. वर्तमान में झांसी उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे स्वच्छ शहर है.
झांसी का इतिहास 18वीं शताब्दी से जुड़ा है. इसका पुराना नाम बलवंत नगर था. 11वीं शताब्दी में यह चंदेल राजाओं के अधीन था और बुंदेलखंड का प्रवेश द्वार माना जाता था. राजा गंगाधर राव ने मणिकर्णिका से विवाह किया, जो आगे चलकर रानी लक्ष्मीबाई के नाम से प्रसिद्ध हुईं.
झांसी को उत्तराधिकारी न मिलने के कारण अंग्रेजों ने इस रियासत को अपने अधीन कर लिया. इस दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया. वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में वे प्रमुख सेनानियों में शामिल रहीं और 1858 में देश की आज़ादी के लिए लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं.
इसके बाद झांसी किले पर अंग्रेजों का कब्ज़ा हो गया और 1861 में इसे जियाजी राव सिंधिया को सौंप दिया गया. आज भी झांसी अपनी वीर रानी के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें भारत की जोन ऑफ आर्क भी कहा जाता है. वर्तमान में झांसी, मंडल आयुक्त का मुख्यालय है और इसके अंतर्गत जालौन, ललितपुर और झांसी जिले आते हैं.
झांसी के नामकरण से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा भी है. कहा जाता है कि ओरछा और जैतपुर के राजा एक पहाड़ी पर बैठे थे. ओरछा के राजा ने नए किले को पहचानने को कहा, जिस पर जैतपुर के राजा ने उत्तर दिया—“झांसी” (अर्थात साफ़ दिखाई नहीं दे रहा). यही नाम आगे चलकर झांसी बन गया. किले की विशेषता यह है कि यह ऊँची चट्टान पर बना है और पूरा शहर इसके चारों ओर फैला हुआ है.
झांसी में मुख्य रूप से हिंदी, अंग्रेज़ी और बुंदेली बोली जाती है. बुंदेली की ध्वनियाँ हिंदी से मिलती-जुलती हैं लेकिन सुनने में अधिक मधुर लगती हैं. यहाँ अधिकांश लोग हिंदू धर्म को मानते हैं, जबकि कुछ लोग इस्लाम और ईसाई धर्म का भी पालन करते हैं.
यहाँ के प्रमुख समाचार पत्र हैं—दैनिक जागरण, अमर उजाला और पत्रिका. रेडियो स्टेशन जैसे रेडियो मिर्ची, बिग एफएम, एयर एफएम और रेड एफएम लोकप्रिय हैं. एलाइट, खिलौना और नटराज जैसे सिनेमा हॉल भी शहर में मौजूद हैं.
कला और शिल्प
झांसी में लोकनृत्य और लोकगीतों की समृद्ध परंपरा है. प्रमुख नृत्य रूप हैं—बधाई और अकाई. बधाई नृत्य आमतौर पर बच्चे के जन्म या फसल कटाई के समय किया जाता है, जबकि अकाई नृत्य में बांस की लकड़ियों का प्रयोग होता है और यह युद्ध कला से प्रभावित है. इसके अलावा राई, नौरता और दीवाली नृत्य भी प्रचलित हैं. ग़ज़ल, आल्हा गीत और सुआटा गीत त्योहारों पर गाए जाते हैं.
राज्य पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित झांसी महोत्सव आधुनिक समय का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें हस्तशिल्प मेले का भी आयोजन होता है.
त्योहार
यहाँ आयुर्वेद झांसी महोत्सव, सब्ज़ी और पुष्प प्रदर्शनी (नारायण बाग), और रानी लक्ष्मीबाई जयंती बड़े उत्साह से मनाई जाती है. झांसी के लोग सरल, विनम्र और मिलनसार स्वभाव के होते हैं, जिससे पर्यटक खुद को सहज महसूस करते हैं.
झांसी का रानी महल रानी लक्ष्मीबाई का पूर्व निवास और शाही महल था. 18वीं शताब्दी में निर्मित यह महल भारतीय विद्रोह के दौरान काफी हद तक नष्ट हो गया था. बाद में इसका पुनर्निर्माण कर इसे एक संग्रहालय में बदल दिया गया, जहां 9वीं शताब्दी से जुड़े अवशेषों और रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से संबंधित वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है.
झांसी किला उत्तर प्रदेश में बांगिरा (बागीरा) पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. यह 17वीं शताब्दी का एक भव्य स्थापत्य स्मारक है, जिसने शाही निर्माण से लेकर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान व्यापक विनाश तक का दौर देखा है. किले के भीतर बारादरी, काल कोठरी जैसे कई ऐतिहासिक स्मारक मौजूद हैं, जो इसकी उत्कृष्ट और रचनात्मक वास्तुकला को दर्शाते हैं.
झांसी संग्रहालय, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार संग्रहालय भी कहा जाता है, भारत के प्रमुख ऐतिहासिक संग्रहालयों में से एक है. इसका निर्माण 19वीं शताब्दी के अंत में हुआ था. यहां 4वीं शताब्दी ईसा पूर्व से संबंधित कलाकृतियां, औपनिवेशिक भारत का इतिहास और पूर्व-आधुनिक भारत की उत्कृष्ट कलाकृतियाँ देखने को मिलती हैं.
पंचतंत्र पार्क विशेष रूप से बच्चों के लिए बनाया गया एक पशु-थीम आधारित पार्क है, जिसकी प्रेरणा विष्णु शर्मा द्वारा रचित ‘पंचतंत्र’ ग्रंथ से ली गई है. यहाँ बच्चों के लिए पशु-आकार की फिसलपट्टियाँ हैं, वहीं बड़ों के लिए जॉगिंग ट्रैक की भी सुविधा उपलब्ध है.
राजा गंगाधर राव, जो झांसी के राजा थे, की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी रानी लक्ष्मीबाई ने वर्ष 1853 में यह छतरी बनवाई थी. यह स्मारक महालक्ष्मी मंदिर के पास, लक्ष्मी तालाब के किनारे स्थित है. हरियाली से घिरा यह स्थल एक सुंदर उद्यान, तालाब और समृद्ध स्थापत्य कला से सुसज्जित है.
झांसी से 16 किमी दूर मध्य प्रदेश के छोटे से शहर ओरछा में स्थित ओरछा किला परिसर एक भव्य ऐतिहासिक धरोहर है. इसका निर्माण 1501 ईस्वी में बुंदेला वंश के राजा रुद्र प्रताप सिंह ने कराया था. यह राजपूत और मुगल स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें जालीदार खिड़कियाँ, झरोखे, बालकनियाँ और छतों पर शीशे की सजावट देखने को मिलती है.
सेंट जूड्स श्राइन झांसी छावनी क्षेत्र में स्थित एक रोमन कैथोलिक चर्च है, जो संत जूड थैडियस को समर्पित है. इसका निर्माण फ्रांसिस जेवियर फेनेक द्वारा कराया गया था. यह उत्तर प्रदेश के कैथोलिक समुदाय के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है.
बरुआ सागर झांसी जिले का एक छोटा सा कस्बा है, जो बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित है. यहाँ का प्रमुख आकर्षण झील है, साथ ही यहाँ कई प्राचीन किलों और मंदिरों के अवशेष भी मौजूद हैं, जो कभी इस क्षेत्र की समृद्धि का प्रतीक थे.
करगुवांजी जैन मंदिर लगभग 700 वर्ष पुराना एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल है. यह दिगंबर जैन संप्रदाय का एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है, जो मोक्ष प्राप्ति के लिए भौतिक त्याग में विश्वास करता है. इसका पूरा नाम श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र संवलिया पारसनाथ करगुवांजी है, जहाँ ‘अतिशय क्षेत्र’ का अर्थ चमत्कारी स्थल होता है.
महालक्ष्मी मंदिर झांसी के प्रसिद्ध लक्ष्मी तालाब के किनारे स्थित है. यह प्राचीन मंदिर धन, वैभव और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी को समर्पित है. सुंदर वास्तुकला, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और जटिल नक्काशी इस मंदिर को झांसी के सबसे प्रतिष्ठित विरासत स्थलों में शामिल करती हैं.
दिन 1
सुबह नाश्ते के बाद झांसी किला देखें (रेलवे स्टेशन से 4 किमी). इसके बाद पास ही स्थित रानी महल और फिर रानी झांसी संग्रहालय जाएँ. दोपहर के बाद स्थानीय बाज़ारों में खरीदारी और घूमने का समय रखें.
दिन 2
स्थानीय नाश्ते के साथ दिन की शुरुआत करें. फिर सेंट जूड्स चर्च, राजा गंगाधर राव की समाधि और रानी झांसी तालाब देखें. शाम को बरुआ सागर और परिछा डैम में सूर्यास्त का आनंद लें. चाहें तो 16 किमी दूर स्थित ओरछा भी जा सकते हैं.
हवाई मार्ग से कैसे पहुंचे झांसी || How to reach Jhansi by Air
झांसी का हवाई अड्डा सैन्य उपयोग के लिए है. नजदीकी नागरिक हवाई अड्डा ग्वालियर (103 किमी) और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली (320 किमी) है.
सड़क मार्ग से कैसे पहुंचे झांसी || How to reach Jhansi by Road
झांसी NH-27, NH-75 और NH-44 पर स्थित है और ग्वालियर, दिल्ली, कानपुर, भोपाल, प्रयागराज, ओरछा आदि से अच्छी तरह जुड़ा है.
रेल मार्ग से कैसे पहुंचे झांसी|| How to reach Jhansi by Train
झांसी जंक्शन देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, भोपाल आदि से जुड़ा हुआ है.
स्थानीय परिवहन से कैसे पहुंचे झांसी || How to reach Jhansi by local transport
टेम्पो, ऑटो रिक्शा और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं.
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