क्या दुनिया की पहली सभ्यता भारत में शुरू हुई? इतिहासकार ने दिए नए तर्क
दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता की शुरुआत कहां से हुई, इस पर लंबे समय से इतिहासकारों के बीच बहस चलती रही है। आमतौर पर Mesopotamia को मानव सभ्यता का जन्मस्थान माना जाता है, लेकिन समुद्री इतिहासकार और लेखक Nick Collins ने इस धारणा को चुनौती दी है। उनका दावा है कि उपलब्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि मानव सभ्यता की असली शुरुआत भारतीय उपमहाद्वीप से हुई थी।
निक कॉलिन्स ने बताया कि उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार (Maritime Trade) से जुड़ा काम किया और इसी दौरान उन्होंने प्राचीन इतिहास का गहराई से अध्ययन किया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी पहले से तय ऐतिहासिक मान्यता का पालन नहीं किया, बल्कि जहां-जहां साक्ष्य मिले, उनका अध्ययन किया। उनके मुताबिक, अधिकतर प्रमाण भारत की ओर इशारा करते हैं।
कॉलिन्स का कहना है कि 19वीं सदी में पुरातत्वविदों ने मेसोपोटामिया में ज्यादा खुदाई इसलिए की क्योंकि वहां की जलवायु में पुरानी वस्तुएं सुरक्षित रहती थीं। साथ ही बाइबिल से जुड़े संदर्भ और उस समय के राजनीतिक हालात भी खुदाई के लिए अनुकूल थे। इसी वजह से मेसोपोटामिया को धीरे-धीरे दुनिया की पहली सभ्यता के रूप में स्वीकार कर लिया गया।
उनका कहना है कि भारत में उसी स्तर पर शोध और खुदाई काफी बाद में शुरू हुई। मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में हुई, लेकिन तब तक मेसोपोटामिया वाला सिद्धांत दुनिया भर में स्थापित हो चुका था।
निक कॉलिन्स का दावा है कि करीब 2600 ईसा पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग 300 बड़े शहर मौजूद थे और इनमें से दो-तिहाई शहर सरस्वती नदी के किनारे बसे हुए थे। उनके अनुसार, यह वही नदी है जिसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है और जो बाद में लगभग 1900 ईसा पूर्व सूख गई थी।
उन्होंने कहा कि उस समय का यह सभ्यता क्षेत्र अफगानिस्तान से लेकर महाराष्ट्र तक फैला हुआ था और इसका क्षेत्रफल करीब 15 लाख वर्ग मील था।
कॉलिन्स ने गुजरात के लोथल का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि यहां ऐसा प्राचीन डॉकयार्ड था जहां एक साथ 30 बड़े जहाज खड़े हो सकते थे। उनका दावा है कि यूरोप में इस तरह की सुविधा कई हजार साल बाद विकसित हुई। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती खुदाई में इस संरचना को गलती से स्नानागार (Bathing Pool) माना गया था।
इतिहासकार ने Aryan Migration Theory पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अब तक ऐसा कोई ठोस पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि बाहर से आए लोगों ने भारत में सभ्यता की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि ऋग्वेद में भी किसी बड़े आक्रमण का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।
निक कॉलिन्स ने 2019 में प्रकाशित एक Harvard-led Genetic Study का हवाला देते हुए कहा कि इस शोध में भी प्राचीन भारतीय सभ्यता के लोगों को स्थानीय (Indigenous) बताया गया था। उनके अनुसार, अध्ययन में यह जरूर कहा गया कि बाद के समय में कुछ बाहरी लोग भारत आए और स्थानीय आबादी के साथ उनका मिश्रण हुआ, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उन्होंने यहां सभ्यता की शुरुआत की थी।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि निक कॉलिन्स के ये विचार उनके व्यक्तिगत शोध और व्याख्या पर आधारित हैं। मानव सभ्यता की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों और वैज्ञानिकों के बीच अभी भी अलग-अलग मत मौजूद हैं और इस विषय पर शोध लगातार जारी है।
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