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Dobra Chanti Bridge Tour Blog – ड्राइवर ने पैसे तो लिए, मगर दिल भी जीत लिया

कुंजापुरी मंदिर की यात्रा हमने तय समय में पूरी कर ली थी. पहुंचने में हमें डेढ़ घंटे लगे लेकिन वापस उसी रास्ते से लौटने में, आधे घंटे से थोड़ा ही ज़्यादा. हमने सोचा तो ये था कि आकर झटपट लंच करके डोबरा चांटी पुल ( Dobra Chanti Bridge ) के लिए निकल जाएंगे. लेकिन, हमेशा की तरह इस बार भी प्लानिंग किसी और की वजह से गड़बड़ाते गड़बड़ाते बची. डोबरा चांटी पुल ( Dobra Chanti Bridge ), देश का सबसे लंबा सस्पेंशन पुल है.
दरअसल, सुबह जिस शॉप से हमने नाश्ता किया था, वहां पर हमारे परिचित और वहीं गांव के स्थानीय निवासी पुंढीर जी भी आ गए थे. पुंढीर जी ने हमारे इनकार के बावजूद बिल चुकाया. पता नहीं क्या वजह रही कि वापसी में वो दुकानदार भैया हमें वहां मिले ही नहीं. जबकि हमने उनसे लंच बना देने की बात पहले ही कह दी थी.
अब उनकी दुकान पर उनका बेटा और उसके कुछ दोस्त थे. हालांकि, हमारे रिक्वेस्ट पर उन्होंने भी लंच बनाना शुरू कर दिया. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में हमारे बेशकीमती डेढ़ घंटे चले गए. लंच बन रहा था इसी बीच मेरी निगाह सामने महिलाओं के स्टॉल पर पड़ी जो मसाले बेच रही थीं. मैंने वहां जाकर उनसे उसे बनाने के बारे में पूछा तो जानकारी मिली कि सरकार की योजना है जिसमें स्थानीय स्तर पर महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा रहा है. इस मिशन के तहत वो आचार और मसाले बनाती हैं. इसके लिए कच्चा माल वो खुद खेतों में उगाती भी हैं.
मैंने ऐसी कम ही सरकारी योजनाएं देखी हैं जो ज़मीन पर इस तरह से साकार हो रही हों. इस योजना को देखकर मैंने सरकार को दिल से शाबाशी दी. लोगों को स्थानीय स्तर पर काम मिले तो पलायन हो ही क्यों. और पहाड़ों पर तो ऐसे मिशन की बेहद सख्त ज़रूरत है.
इतने में हमारा लंच तैयार हो गया था. छोले-चावल, सलाद, देसी अंदाज में हमारा लंच ऐसा था कि हमसे रहा नहीं गया और हम उसपर ऐसे टूटे कि ज़रूरत से ज़्यादा ही खा लिया. इतना कि न बैठते बन रहा था और न उठते. खैर, मंज़िल पर पहुंचना भी ज़रूरी था. सो, सड़क पर खड़े हो गए. दो-चार बसें गुज़रीं, किसी ने नहीं रोका. गाड़ियां भी गुज़री लेकिन नहीं रुकीं.

डोबरा चांटी पुल तक की यात्रा

डोबरा चांटी पुल ( Dobra Chanti Bridge ) हमारे लिए दिन के उजाले में पहुंचना बेहद ज़रूरी था और इधर समय था कि बीतता ही जा रहा था. गाड़ियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. इतने में एक सरकारी गाड़ी आई. सरकारी मतलब, सरकारी सेवा में लगी हुई एक गाड़ी. गाड़ी प्राइवेट ही थी लेकिन जैसे ही उसने मेरा हाथ देखकर कुछ फीट आगे जाकर गाड़ी रुकी, उसपर लिखा डोबरा चांटी देखकर, मैंने सोच लिया, मिल गई सवारी. 
 
गाड़ी में वो शिलाएं रखी थीं जो डोबरा चांटी पुल ( Dobra Chanti Bridge ) पर लगनी थीं. हालांकि हमें जैसा बताया गया था कि डोबरा चांटी पुल ( Dobra Chanti Bridge ) तक के लिए, हमें पहले चंबा जाना होगा और फ़िर वहां से आगे की सवारी मिलेगी. हमने इन ड्राइवर भैया से चंबा तक के लिए ही किराया पूछा, उन्होंने कोई 140 रुपये बताए दो सवारी के. मैंने भागकर संजू को बुलाया और हम दोनों बैठ गए गाड़ी में.
 
अब एक तो इनोवा कार, ऊपर से सरकारी सेवा में लगी हुई कार, तो उसमें बैठते ही अहसास हुआ कि भैया पैसे वसूल हो गए. संजू तो बैठते ही नींद में चला गया लेकिन मैं उस ड्राइवर से बतियाता रहा. 
 

ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट

हिंडोलाखाल से आगे चंबा वाले रास्ते पर मैं, बीते एक साल में तीसरी बार आया था. पहली बार में ये एक आम पहाड़ी रास्ता ही था, दूसरी बार की यात्रा में यहां ऑल वेदर रोड का काम शुरू हो चुका था और हमारा सामना धूल मिट्टी से हुआ था. ये तीसरा टाइम ऐसा था कि इठलाती सड़के ऐसा अहसास दिला रही थी कि हम किसी दूसरे देश में चले आए हों. कमाल का काम किया है भारत सरकार और नितिन गडकरी ने. भई वाह.
 
मैंने सड़क की वीडियो बनाई, जमकर बनाई और आराम से सफर का आनंद भी लेता रहा. अब भैया से बात शुरू हुई दूसरी. मतलब, चंबा से आगे डोबरा चांटी तक के लिए वो कितना पैसा लेंगे. उन्होंने हमसे कहा कि वो नई टिहरी ही जाएंगे, शिलाएं पहुंचाने वो कल डोबरा चांटी जाएंगे. उन्होंने हमसे कहा कि अगर हमें वो छोड़ेंगे तो 1400 रुपये लेंगे.
 
मैं सुनकर हैरान रह गया. 300 रुपये के किराए में तो हम मोहन नगर, गाजियाबाद से ऋषिकेश पहुंच गए थे और अब यहां लगभग 35 किलोमीटर (चंबा से डोबरा चांटी) तक के 1400! मैं चुप हो गया और उनसे कहा कि हमें चंबा ही उतार दीजिएगा. हम वहां से सवारी ले लेंगे.
 
रास्ते में एक दो बार और मोलभाव किया, तो पहले वो 1200 पर आए और फिर लास्ट 1100. कुछ देर बाद चंबा भी आ ही गया था. मैं गाड़ी से बाहर आ गया, संजू भी आ गया लेकिन मेरे मन में कसक थी. अगर दूसरी सवारी लेता तो भी आधे घंटे का गैप निश्चित था और वहां होटल या होमस्टे बुक करने और वहां पहुंचने में रात हो ही जाती. 
 
मैंने भैया से कहा- 900 फाइनल, पूरा. हिंडोलाखाल से डोबरा चांटी. संजय की तरफ भी देखा. वो न तो कहना चाह रहा था लेकिन समय की मजबूरियां भी थी. मैंने उसे कहा कि बैठ जाते हैं. 900 में डील फाइनल हो गई थी.
 

चंबा से डोबरा चांटी पुल तक का सफर

मैं चंबा से डोबरा चांटी पुल ( Dobra Chanti Bridge ) के लिए बढ़ चुका था. हम आगे पहुंचे ही थे, कि ड्राइवर भैया के फोन पर घंटी बजी और उन्हें आज ही डोबरा चांटी (Dobra Chanti Bridge) आने के लिए कहा गया. अब उनसे निवेदन करने का कोई मतलब तो था नहीं. लेकिन मैंने उनसे ये ज़रूर कहा कि भैया होमस्टे ज़रूर दिलवा देना.
 
ड्राइवर भाई साहब निश्चित ही हेल्पफुल थे. उन्होंने कहा कि डोबरा चांटी पुल में ही जो स्टाफ क्वार्टर है, मैं वहीं आपको रुकवा देता लेकिन वहां अभी बाकी लोग हैं. लेकिन निश्चिंत रहें मैं होम स्टे दिलवा दूंगा. इतने में वो सोचकर बोले कि पुल से 9 किलोमीटर पहले ही होमस्टे है, उसके बाद कुछ नहीं. हमें ये बात और भी लोगों ने बताई थी.
 

डोबरा चांटी में ऐसे मिला होमस्टे

डोबरा चांटी पुल (Dobra Chanti Bridge) दूर से दिखना शुरू हो चुका था. इतने में एक होमस्टे आया. कुछ जंगल जैसा क़ॉन्सेप्ट था उसका. जिम कॉर्बेट की तस्वीरें लगी हुई थीं. मैं अंदर पहुंचा, इतने में दूसरी तरफ से उसके ओनर आ गए. मैंने पूछा कि क्या है रेट. उन्होंने कहा कि 1500. मैंने फिर कहा कि हमें सिर्फ रात काटनी है, सुबह निकल जाना है. क्या ये कम हो सकता है? वो नहीं माने.
 
इसके बाद हम आगे बढ़ चले. थोड़ी ही दूर पर श्री होम स्टे मिला. यहां एक रात का किराया यूं तो 1000 बताया गया लेकिन हमने जब रिक्वेस्ट की तो वो 500 पर मान गए. हमने कहा कि वीडियो में उनके होमस्टे की जानकारी भी दे दी जाएगी और हम सुबह सुबह निकल जाएंगे. 
 
हालांकि, एक समस्या अब भी थी. वो ये कि हमें डोबरा चांटी पुल (Dobra Chanti Bridge) पर रात हो जानी थी. और उसके बाद 9 किलोमीटर दूर कैसे आते. हमने होमस्टे के ओनर से कहा कि यदि हमें सवारी नहीं मिली तो क्या आप आ सकेंगे हमें लेने के लिए? उन्होंने हमारा अनुरोध स्वीकार कर लिया और कहा कि हां, वो आ जाएंगे. हमने उनका नंबर और विजिटिंग कार्ड दोनों रख लिए. 
 

डोबरा चांटी पुल

डोबरा चांटी पुल (Dobra Chanti Bridge) पर हम ऐसे पहुंचे कि बस पहुंचने के 5 मिनट बाद ही अंधेरा हो गया. मैंने इंट्रो उसी रात जैसे डेलाइट माहौल में शूट किया और फिर हम दोनों पुल पर वॉक करने लगे. आधे घंटे तक वॉक करने के बाद भी जब पुल की लाइटें नहीं जली तो मुझे लगा कि कहीं यहां आना बेकार न हो जाए.
 
मैं वापस मुड़ा ही था कि पुल की ट्यूबलाइट्स जल पड़ी. मैंने सोचा शायद कलरफुल लाइट्स को बंद कर दिया गया है, और इसी से काम चलाया जा रहा होगा. आखिर खर्चा भी तो होता होगा. लोग भी कम दिखे मुझे वहां, सो मैं उसी ट्यूबलाइट को दिखाने लगा.
 
लेकिन दोस्तों अगले 20 मिनट में जो हुआ यकीन मानिए, आनंद की कोई सीमा नहीं रही. पुल रोशनी से जगमगा उठा. लाल, हरी, नीली, पीली, इस जगमग रोशनी में पुल ऐसा नहाया कि हम भी उसकी खूबसूरती में खो बैठे. 
 
हमने हर लाइट को, हर मोमेंट को कैप्चर किया. पूरा दो घंटा वहां रहे. फ़िर पकड़ी वापसी की राह.
 
ड्राइवर ने पैसे तो लिए, लेकिन दिल भी जीत लिया
 
ड्राइवर ने जब हमें पुल (Dobra Chanti Bridge) पर उतारा था, तभी ये कह दिया था कि जब हम निकलें तो उसे कॉल ज़रूर कर लें. अगर, वो यहां रहें तो हमें छोड़ते हुए चले जाएंगे और अगर निकल गए होंगे तो भी जुगाड़ अवश्य ही करा देंगे.
 

हमने उन्हें फोन किया तो पता चला कि वो जा चुके थे. उन्होंने कहा कि एक चौधरी नाम के शख्स से हम मिल लें, वो व्यवस्था करा देंगे. बस क्या था, हमें प्रोजेक्ट की कंसल्टेंट कंपनी के इंजीनियर को छोड़ने जा रही गाड़ी में जगह मिल गई.

वापसी के इस रास्ते में, इंजीनियर से काफी अच्छी बातचीत भी हुई. उन्होंने सरकारी स्तर पर देश में मौजूद कमियों और करप्शन के बारे में हमें बताया. वो क्योंकि इस सिस्टम को देख रहे थे इसलिए कई बारीक बातें उन्होंने बताई. खैर, क्या कर सकते हैं, सबकुछ हमेशा से ऐसे ही चलता आया है. और करप्शन बहुत गहरे तक बैठा है. इसे दूर कर पाना बेहद नामुमकिन जैसी बात है.

इंजीनियर से बात करते करते, हमारा होमस्टे भी आ गया. हम उतरे, इंजीनियर को बाय किया और शुक्रिया किया उस ड्राइवर का जिसने हमारी मदद की. पैसों का गम सचमुच कम हो गया था.

डोबरा चांटी पुल कैसे पहुंचें

ऋषिकेश से चंबा और चंबा से डोबरा चांटी

डोबरा चांटी पुल देखने जाएं तो कहां ठहरें

पुल से कोई 9 किलोमीटर पहले होमस्टे हैं. बुकिंग पक्की कराकर ही रात को वहां जाएं.

डोबरा चांटी पुल के लिए साधन कौन सा लें

अच्छा रहेगा कि निजी कैब या वाहन से ही वहां जाएं. हालांकि अगर आप दिन में जाते हैं तो सवारी की कोई दिक्कत नहीं होगी.
अगले आर्टिकल में पढ़िएगा, होमस्टे की पहली रात और सुबह की चाय कैसी थी.
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