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Manali Travel Blog – सिर्फ 500 रुपये में मिल गया होटल का कमरा

Manali Travel Blog – मैं और मेरे हस्बैंड एक दिन ऐसे ही प्लान कर रहे थे कि चलो कही पहाड़ों में घूमकर आया जाए. हमारा मन जाने का था और हम दूर भी नहीं जाना चाहते थे. ऐसा इसलिए क्योंकि ऑफिस से दोनों को इतनी छुट्टी नहीं मिल पाती. हम दोनों ने जगहों के बारे में बहुत सोचा, फिर दोनों के दिमाग में एक बार में ही हिमाचल प्रदेश में मौजूद मनाली ( Manali Travel Blog ) जाने का प्लान किया.

फ्राइडे की रात को जगह डिसाइड करके, उसी समय हमने ऑनलाइन टिकटें बुक कर ली. अगली सुबह उठकर नाश्ता करने के बाद, दोनों लोगों ने पैकिंग करनी शुरू कर दी. हमारी बस, रात को 11 बजे की थी. हम लोगों ने 9 बजे डिनर किया, फिर ओला बुक करके मजनूं का टीला स्थित बस स्टैंड पहुंच गए. यहां वोल्वो में बैठे और शुरू हो गई हमारी मनाली तक की यात्रा.

Manali Tour Guide – घूमने के लिए मनाली जा रहे हैं, तो यहां लें पूरी जानकारी

सुबह 6 बजे हम लोग मनाली उतर गए और होटल की तलाश करने लगे. फिर मुझे याद आया कि यहां तो सस्ते होटल भी मिल जाने चाहिए. हमें महंगे होटल लेने का मन नहीं था क्योंकि पूरे दिन तो हमलोगों को बाहर ही रहना है, तो महंगा होटल क्यों लें.   =फिर हम दोनों ने सस्ते होटल की तलाश शरू की. हमें बहुत देर बाद अच्छा और सस्ता होटल मिल गया. एक कमरे में एक बैड और साफ- सुथरा बाथरुम हमें मिल गया. इस रूम की कीमत जानकर आप हैरान हो जाएंगे. क्योंकि 2 दिन के लिए महज हमें 500 रुपए देने पड़े.

होटल के कमरे में आने के बाद हमलोग फ्रेश हुए फिर बाहर निकलकर कुछ खाया. उसके बाद सबसे पहले हमलोग हिडिंबा टेंपल गए. यहां जाने के लिए थोड़ी चढाई करनी पड़ती हैं. हिडिम्बा का नाम तो शायद सुना ही होगा. जी हां, महाभारत के महाबली भीम की पत्नी. कुल्लु राजवंश हिडिम्बा को कुलदेवी के रूप में मानता है. इस मन्दिर का निर्माण 1553 ईस्वी में महाराज बहादुर सिंह ने कराया था. पगोड़ा शैली इस मन्दिर की खासियत है.

लकड़ी से निर्मित इस मन्दिर की चार छतें है. नीचे की तीन छतों का निर्माण देवदार की लकड़ी के तख्तों से हुआ है जबकि उपर की चौथी छत तांबे एवं पीतल से बनी है. नीचे की छत सबसे बड़ी, दूसरी उससे छोटी, तीसरी उससे भी छोटी और चौथी सबसे छोटी है.मन्दिर में दर्शन करके थोड़ा फोटो खिंचवाया और वापस आ गए. पहला दिन था और थके भी थे तो वहां से वापस आकर मॅाल रोड घूमे और होटल जाने के लिए निकल गए.

दूसरे दिन हमलोगों ने रोहतांग पास के लिए गाड़ी बुक कराई इस गाड़ी में हमलोगों के साथ और भी कुछ लोग जा रहे थे. रोहतांग पास मेरी पसंदीदा जगहों में से एक है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह दर्रा, दुनिया की सबसे ऊंची चलने वाली रोड़ है जहां हर साल लाखों पर्यटक इस लॉफी पहाड़ पर भ्रमण करने आते हैं.

यह दर्रा समुद्र स्‍तर से 4111 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जहां से मनाली का शानदार दृश्‍य दिखाई पड़ता है. मनाली से इस दर्रा की दूरी 51 किमी. है. यहां से पहाडों, सुंदर दृश्‍यों वाली भूमि और ग्‍लेशियर का शानदार दृश्‍य देखा जा सकता है. इन सभी के अलावा इस पर्यटन स्‍थल में आकर पर्यटक ट्रैकिंग, माउंटेन बाइकिंग, पैरालाइडिंग और स्किंईंग भी कर सकते हैं.

वहां से आने के बाद हम अपने होटल में आराम किए क्योंकि उसी दिन रात को हमलोगों की दिल्ली वापस जाने की बस थी.

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