15 एकड़ में फैला Jhansi Fort: क्यों है यह किला इतना खास?
झांसी का किला (Jhansi Fort) उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित बगीरा (Bagira) पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. यह 17वीं शताब्दी का एक भव्य स्थापत्य स्मारक है, जिसने शाही निर्माण के दौर के साथ-साथ British East India Company के खिलाफ हुए First War of Independence (1857) के दौरान भारी विनाश भी देखा है.
किले की चारदीवारी के भीतर कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं. इनमें बारादरी (Baradari) अपनी बारीक और रचनात्मक वास्तुकला के लिए जानी जाती है. काल कोठरी (Kal Kothari), जिसे कैदियों के लिए अंधकोठरी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, उस दौर की कठोर न्याय व्यवस्था की झलक देती है. किले परिसर में स्थित गणेश मंदिर और शिव मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं.
यहां मौजूद म्यूज़ियम (Museum of Jhansi Fort) में चंदेल वंश (Chandela Dynasty) से जुड़े हथियार, वस्त्र और ऐतिहासिक पेंटिंग्स संरक्षित हैं, जो बुंदेलखंड के गौरवशाली अतीत को दर्शाती हैं. किले के आसपास की गलियां पुराने बाज़ारों और मंदिरों से सजी हुई हैं.
इसके अतिरिक्त, यहां स्थित War Memorial देश के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जबकि रानी लक्ष्मीबाई पार्क (Rani Lakshmibai Park) भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमिट योगदान की याद को संजोए हुए है.
झांसी का किला (Jhansi Fort) ओरछा के शासक राजा बीर सिंह जूदेव (Raja Bir Singh Ju Deo) ने बनवाया था. इतिहासकारों के अनुसार, इस किले का निर्माण 17वीं शताब्दी (लगभग 1613 ई.) में बंगरा पहाड़ी पर करवाया गया था. बाद में यह किला झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शासनकाल में खास तौर पर 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (First War of Independence) के दौरान अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख केंद्र बना.
झांसी का किला (Jhansi Fort) लगभग 15 एकड़ में फैले विशाल क्षेत्र में स्थित है, भारत में किलों की Northern Style of Architecture और Southern Fort Architecture में स्पष्ट अंतर देखने को मिलता है. दक्षिण भारत में अधिकांश किले समुद्र तटों के पास बनाए गए थे, जैसे कि Bekal Fort, Kerala, जबकि उत्तर भारत के किले पहाड़ियों और ऊंचे स्थानों पर निर्मित किए गए, और झांसी किला इसका प्रमुख उदाहरण है.
यह किला लगभग 312 मीटर लंबा और 225 मीटर चौड़ा है. इसकी दीवारें ठोस Granite Stone से बनी हैं, जिनकी मोटाई 16 से 20 फीट तक है,जो इसे सैन्य दृष्टि से बेहद मजबूत बनाती हैं. किले में कुल 10 प्रवेश द्वार (Gates of Jhansi Fort) हैं, जिनमें प्रमुख रूप से खंडेराव गेट (Khanderao Gate), दतिया दरवाज़ा (Datia Darwaza), उन्नाव गेट (Unnao Gate), बड़ागांव गेट (BadaGaon Gate), लक्ष्मी गेट (Laxmi Gate), सागर गेट (Sagar Gate), ओरछा गेट (Orchha Gate), सैन्यार गेट (Sainyar Gate) और चांद गेट (Chand Gate) शामिल हैं.
किले के प्रवेश द्वार पर स्थित गणेश मंदिर और शिव मंदिर यहां के शासकों की गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाते हैं. बारादरी (Baradari) एक विशेष संरचना है, जो राजा गंगाधर राव के भाई रघुनाथ राव को समर्पित है. कला और वास्तुकला के प्रति उनके प्रेम को दर्शाने वाली यह इमारत stucco work से निर्मित है. इसकी छत को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह तालाब जैसी संरचना बनाती थी, जिससे पानी छिड़ककर पूरे भवन को ठंडा रखता था.
Execution Tower का उपयोग उस समय कैदियों को दंड देने के लिए किया जाता था, जो उस युग की कठोर व्यवस्था को दर्शाता है. वहीं, Jumping Spot वह ऐतिहासिक स्थान है, जहां से रानी लक्ष्मीबाई किले की दीवार फांदकर अपने घोड़े बादल (Badal) पर सवार हुईं और अंग्रेज़ों से बच निकलने में सफल रहीं.
किले के प्रवेश पर सजी कड़क बिजली तोप (Kadak Bijli Cannon), जिसे 1857 की क्रांति के दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने इस्तेमाल किया था, देशभक्ति, शहादत और आज़ादी के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है.
Opening Time: 10:00 AM
Closing Time: 05:00 PM
Closed: सोमवार और हर महीने का दूसरा शनिवार
झांसी किला केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत दस्तावेज़ है। यहां मौजूद कड़क बिजली तोप (Kadak Bijli Cannon), जो शेर के मुख जैसी आकृति वाली है, 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है। इसे दागे जाने पर गूंजने वाली आवाज़ किले की सामरिक ताकत को दर्शाती है।
किले के भीतर स्थित रानी झांसी गार्डन हरियाली और शांति से भरपूर है। यहीं वह ऐतिहासिक ‘Jumping Point’ भी है, जहां से रानी लक्ष्मीबाई अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर घोड़े पर सवार होकर किले से कूदी थीं।
यहां मौजूद प्राचीन शिव मंदिर और गणेश मंदिर में सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था गूंजती रही है। साथ ही, गुलाम गौस खान, मोती बाई और खुदा बख्श की मजारें भी किले के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैविध्य को दर्शाती हैं।
झांसी के गौरवशाली अतीत को और करीब से जानने के लिए किले का Museum जरूर देखें, जहां ऐतिहासिक हथियार, मूर्तियां, दुर्लभ तस्वीरें और Rani Lakshmi Bai Gallery मौजूद है।
साहस और शौर्य की कहानी || A story of courage and heroism
शाम ढलते ही झांसी किला एक अलग ही रंग में नजर आता है। यहां होने वाला Sound and Light Show इतिहास को जीवंत कर देता है। रोशनी और आवाज़ के माध्यम से रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा, उनका अद्भुत साहस और 1857 का संग्राम आंखों के सामने सजीव हो उठता है। यह अनुभव न सिर्फ रोमांचक है, बल्कि भावनात्मक भी।
झांसी महोत्सव || Jhansi Mahotsav
झांसी की प्राचीन संस्कृति और गौरवशाली विरासत को सम्मान देने के लिए UP Tourism Government हर साल झांसी महोत्सव का आयोजन करती है. यह उत्सव आमतौर पर फरवरी या मार्च महीने में आयोजित होता है और लगभग एक सप्ताह तक चलता है.
इस महोत्सव में dance performances, folk music, singing और theatre के माध्यम से बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत किया जाता है.
देश-विदेश से कई प्रसिद्ध कलाकार, सांस्कृतिक हस्तियां और इतिहास प्रेमी इस आयोजन में हिस्सा लेते हैं. इसके साथ ही, workshops और seminars भी आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य झांसी के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है.
विरासत की खोज || Exploring Heritage
झांसी किले के चारों ओर लगभग 7.3 किलोमीटर के दायरे में कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल स्थित हैं, जो पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक हैं.
पंचकुइयां मंदिर ||Panchkuian Temple
यह मंदिर मां लक्ष्मी को समर्पित है। आज भी हर महीने सैकड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता है कि रानी लक्ष्मीबाई प्रतिदिन इस मंदिर में पूजा करने आया करती थीं।
सिटी चर्च ||City Church
भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाले धार्मिक स्थलों में City Church एक अहम उदाहरण है, जो झांसी के बहुधार्मिक स्वरूप को दर्शाता है।
रानी महल ||Rani Mahal
ओरछा फोर्ट कॉम्प्लेक्स में स्थित रानी महल, झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की स्मृतियों को संजोए हुए है। उनके शयनकक्ष की चारों दीवारों पर रामायण से जुड़े दृश्य उकेरे गए हैं।
यहां भगवान विष्णु के दशावतार (Dashavatar) की भित्तिचित्र शैली में सजावट यह दर्शाती है कि रानी एक अनुशासित और गहरी आस्था रखने वाली भक्त थीं।
UP Government Museum
उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट म्यूज़ियम में चौथी शताब्दी तक पुराने ऐतिहासिक अवशेष सुरक्षित हैं. यहां मुख्य रूप से चंदेल वंश (Chandela Dynasty) से जुड़े हथियार, वस्त्र और रसोई से संबंधित वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं. कुछ मूर्तियां और कलाकृतियां 11वीं शताब्दी से भी पुरानी हैं, जो उस समय के राजाओं और रानियों के जीवन की झलक देती हैं.
Note: यह म्यूज़ियम हर सोमवार और महीने के दूसरे शनिवार को बंद रहता है.
झांसी के अन्य दर्शनीय स्थल ||Other tourist attractions in Jhansi
झांसी में घूमने लायक कई अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल भी हैं, जैसे: ISKCON Temple, War Memorial,Gayatri Temple, Murli Manohar Temple, Shankar Mandir, Mahalakshmi Temple, Mehendibagh Temple, Satyanarayana Temple
October से March का समय झांसी किला घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है.
खासकर February में आयोजित होने वाला Jhansi Mahotsav देशभर से सैकड़ों पर्यटकों को आकर्षित करता है.
Jhansi Fort शहर के बिल्कुल केंद्र में स्थित है, जिससे यहां पहुंचना बेहद आसान है.
By Train:
झांसी रेलवे स्टेशन किले से लगभग 3 किलोमीटर दूर है. यहां से बस, टेंपो, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं. बस और टेंपो सबसे सस्ते साधन हैं.
By Air:
झांसी का नजदीकी एयरपोर्ट Gwalior Airport है, जो लगभग 103 किलोमीटर दूर स्थित है. एयरपोर्ट से टैक्सी किराए पर ली या पहले से बुक की जा सकती है.
Local Transport:
रेलवे स्टेशन स्टॉप, City Bus Stand (Talpura) या Elite Crossing से बस सेवाएं उपलब्ध हैं. Jhansi Museum Bus Stop झांसी किले के सबसे नजदीक पड़ता है.
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