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History of Delhi : क्या ‘ढिल्लिका’ से बना है ‘दिल्ली’ का नाम?

दिल्ली के नाम की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों के बीच लंबे समय से चर्चा होती रही है। सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि ‘दिल्ली’ का नाम प्राचीन शब्द ‘ढिल्लिका’ (या ‘ढिल्लिक/ढिल्ली’) से निकला है। आइए इस विषय को ऐतिहासिक साक्ष्यों और मतों के आधार पर समझते हैं।


तोमर शासकों और ‘ढिल्लिका’ का उल्लेख

इतिहासकारों के अनुसार 8वीं–12वीं शताब्दी के बीच दिल्ली क्षेत्र पर अनंगपाल तोमर जैसे तोमर राजाओं का शासन था। कई अभिलेखों और परंपराओं में ‘ढिल्लिका’ नाम मिलता है, जिसे उसी समय की बस्ती या नगर माना जाता है।

कुछ विद्वान बताते हैं कि तोमर शासकों ने जिस नगर को बसाया, उसे ‘ढिल्लिका’ कहा गया, जो समय के साथ अपभ्रंश होकर ‘दिल्ली’ बन गया।


अभिलेखीय साक्ष्य

  • मध्यकालीन शिलालेखों में ‘ढिल्लिक’, ‘ढिल्लिका’ और ‘धिल्ली’ जैसे रूप मिलते हैं।
  • 12वीं शताब्दी के आसपास के ग्रंथों में भी इस नाम का उल्लेख पाया गया है।
  • बाद में फारसी लेखन में यही शब्द ‘देहली’ या ‘दिल्ली’ के रूप में दिखाई देता है।

मुस्लिम शासन के दौरान भी इस क्षेत्र को ‘देहली’ कहा गया, जो आगे चलकर अंग्रेजी में ‘Delhi’ हो गया।


‘ढीली कील’ वाली कथा

लोककथा के अनुसार अनंगपाल तोमर ने यहाँ एक लौह स्तंभ (जो आज कुतुब मीनार परिसर में स्थित है) गाड़ा था। कहा जाता है कि वह स्तंभ ढीला हो गया, इसलिए नगर का नाम ‘ढिल्ली’ पड़ गया।

हालांकि इतिहासकार इस कहानी को पौराणिक मानते हैं और इसे नामकरण का ठोस प्रमाण नहीं मानते।


अन्य मत भी मौजूद

कुछ विद्वानों का मानना है कि ‘दिल्ली’ शब्द संभवतः ‘देहली’ (अर्थात दहलीज या चौखट) से आया हो, क्योंकि यह क्षेत्र उत्तर भारत के मैदानों का प्रवेशद्वार माना जाता था।
लेकिन भाषाई और ऐतिहासिक साक्ष्य ‘ढिल्लिका’ से ‘दिल्ली’ बनने की परंपरा को अधिक समर्थन देते हैं।


इतिहास के उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ‘दिल्ली’ नाम का संबंध ‘ढिल्लिका’ से होना अधिक संभावित है। समय के साथ उच्चारण और भाषाई परिवर्तन ने इसे ‘दिल्ली’ का रूप दे दिया।

यही वजह है कि आज भी दिल्ली को एक ऐसा शहर माना जाता है, जिसकी जड़ें प्राचीन राजपूत काल और मध्यकालीन इतिहास में गहराई से जुड़ी हुई हैं।

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