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Shankar’s International Dolls Museum जाकर खुश हो जाएंगे आपके बच्चे! जानें इसके बारे में विस्तार से

Shankar’s International Dolls Museum दिल्ली में स्थित एक ऐसा म्युजियम है जहां दुनिया भर की डॉल्स का कलेक्शन है. इसे K Shankar Pillai शंकर पिल्लै ने स्थापित किया था, जो एक राजनीतिक कार्टूनिस्ट थे. ये Children’s Book Trust बिल्डिंग में बहादुर शाह ज़फर मार्ग पर स्थित है, Shankar’s International Dolls Museum के लिए बिल्डिंग में एक अलग प्रवेश द्वार है, अंदर जाते ही आपको मिलती है एक घुमावदार सीढ़ी और ये सीढ़ी आपको लेकर जाती है फॉयर तक… बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर स्थित ये म्युजियम 5 हजार वर्ग फीट से ज्यादा के एरिया में है.

देश में जब डॉल्स म्युजियम की बात आती है, तो राजकोट में स्थित डॉल्स म्युजियम को जान लेना भी जरूरी है… इसे Rotary Dolls Museum के नाम से जाना जाता है. दुनिया भर के रोटरी क्लब्स ने यहां के लिए डॉल्स को डोनेट किया है. इसकी शुरुआत 2001 में Rotarian Deepak Agrawal ने की थी. आज यहां 1600 से ज्यादा ethnic और traditional dolls मौजूद हैं, और वो भी दुनिया भर के 102 देशों की….

आइए अब लौटते हैं Shankar’s International Dolls Museum पर… noted cartoonist के शंकर पिल्लई ने 1957 में चिल्ड्रेन लिट्रेचर की फील्ड में काम करने के लिए चिल्ड्रेन बुक ट्रस्ट की स्थापना की थी. बाद में उन्हें Hungarian diplomat ने एक डॉल गिफ्ट में दी. इसी गिफ्ट ने उन्हें विजन दिया एक डॉल म्युजियम बनाने का… वो जहां भी जाते, उस देश की डॉल लाकर इकट्ठा करने लगे. इसके बाद 30 नवंबर 1965 को इस म्युजियम की शुरुआत हुई.

इस म्युजियम के लिए डॉल को गिफ्ट करने वालों में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी भी शामिल हैं. इसके अलावा कई एंबेसीस और डिप्लोमैटिक मिशंस ने भी यहां के लिए डॉल तोहफे में दी. मैडम टीटो, ग्रीस की क्वीन फ्रेडेरिका, थाईलैंड की महारानी, ईरान के शाह की बहन, मैक्सिको और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति की पत्नियों ने भी यहां के लिए डॉल तोहफे में दी.

1965 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर एस राधाकृष्णन के हाथों इस म्युजियम की शुरुआत हुई तब यहां सिर्फ 500 डॉल थी और आज ये संख्या 6500 तक पहुंच गई है. शंकर पिल्लई को भारत सरकार ने 1976 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया.

अंदर म्युजियम दो बराबर हिस्सों में बंटा हुआ है. दोनों सेक्शंस में 160 से ज्यादा शीशे के केस हैं. एक सेक्शन में यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कॉमनवेल्थ नेशंस की डॉल्स हैं, जबकि दूसरा सेक्शन एशियाई देशों, मध्य पूर्व, अफ्रीका और भारत की डॉल्स को संजोए है. म्युजियम के अपने वर्कशॉप में बनाई गई भारतीय पारंपरिक पोशाकों वाली 150 तरह की डॉल्स इसकी मुख्य आकर्षण हैं. यहां भारत के शास्त्रीय नृत्य कथकली के किरदारों की डॉल्स भी हैं. आप यहां

जापान की काबुकी और सामुराई डॉल्स.
हंगरी की मेपोल डांस डॉल्स.
इंग्लैंड की क्वीन कलेक्शन की replicas
स्पेन की फ्लेमेंको डांसर्स
थाईलैंड की वुमन ऑर्केस्ट्रा
श्रीलंका की कैंडी पहारा जैसी तमाम डॉल्स देख सकते हैं.

म्यूज़ियम की डॉल्स को 1980 में पोलैंड के क्राको में आयोजित डॉल्स बिएनाले में गोल्डन पीकॉक फेदर अवॉर्ड भी मिल चुका है. यहां इंडियन डॉल्स के कलेक्शन में अलग राज्यों के दूल्हा-दुल्हन के जोड़े, साड़ी पहनने का प्रोसेस दिखाने वाली डॉल्स, और डांस कल्चर दिखाने वाले ग्रुप्स शामिल हैं. आज म्युजियम के वर्कशॉप में डॉल्स बनाई जाती हैं और विदेशी म्युजियम के साथ इन डॉल्स की अदला बदली की जाती है.

संग्रहालय में सिक डॉल क्लिनिक भी है, जहाँ दुर्लभ या पुरानी डॉल्स की मरम्मत की जाती है.

बात करें Shankar’s International Dolls Museum की टाइमिंग की तो ये सोमवार छोड़कर हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला होता है, हालांकि टिकट काउंटर शाम 5:30 बजे बंद हो जाता है. gazetted holidays पर भी ये म्युजियम बंद रहता है.

दिल्ली का ITO मेट्रो स्टेशन यहां से बेहद करीब है. मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर चार से बाहर आते ही आपको म्यूजियम दिखाई देता है. आप चंद कदम चलकर यहां पहुंच सकते हैं… यहां की टिकट बड़ो के लिए 25 रुपए और बच्चों के लिए 10 रुपए है. 18 पर्सेंट जीएसटी भी लगती है.

बहादुर शाह जफर मार्ग, जहां शंकर्स डॉल्स म्युजियम स्थित है, ये जगह काफी हैपनिंग है. आप यहां कई तरह के फूड्स आजमा सकते हैं. उडुपी भी पास में है, आप यहां साउथ इंडियन डिशेज ट्राई कर सकते हैं. एक्सप्रेस बिल्डिंग के सामने एक जगह आपको नारियल पानी भी मिलता है. नारियल पानी के अंदर नारियल काटकर डाले जाते हैं. इसे पीकर मानो सारी थकान दूर हो जाती है…

दोस्तों, कब आ रहे हैं आप डॉल्स म्युजियम घूमने… हमें जरूर बताइएगा…

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