Travel Guide to Delhi Baolis : दिल्ली की बावली और उसका महत्व
Travel Guide to Delhi Stepwells : दिल्ली न केवल भारत की राजधानी है बल्कि इतिहास और संस्कृति का समृद्ध केंद्र भी है. यहां की प्राचीन और मध्यकालीन वास्तुकला में बावलियां (stepwells) एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। बावलियां न केवल पानी के संरक्षण का माध्यम थीं, बल्कि सामाजिक, धार्मिक और वास्तुशिल्प दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान रखती थीं, इस आर्टिकल में हम दिल्ली में मौजूद बावलियों की संख्या, उनका इतिहास, वास्तुकला और यात्रा मार्ग के बारे में विस्तार से जानेंगे.
दिल्ली सिर्फ़ ऐतिहासिक क़िले और स्मारकों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अद्भुत Baolis (Baolis in Delhi) के लिए भी जानी जाती है. इन बावलियों ने न सिर्फ़ पानी को संरक्षित करने का काम किया बल्कि समय के साथ कला और स्थापत्य का बेहतरीन उदाहरण भी बन गईं.
यदि आप दिल्ली घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इन 10 मशहूर Baolis in Delhi को ज़रूर अपनी लिस्ट में शामिल करें.
1321-22 में बनी यह बावली पहले Chashma Dilkusha के नाम से जानी जाती थी। कहा जाता है कि इसकी खुदाई के दौरान चिराग़ पानी से जलाए जाते थे, जो इसके रहस्यमयी इतिहास को दर्शाता है। यह बावली Sufi Saint Hazrat Nizamuddin Auliya से जुड़ी है और आज भी श्रद्धालुओं व पर्यटकों का आकर्षण बनी हुई है।
कैसे पहुचें:
मेट्रो: ITO/Indraprastha (Blue Line)
वहाँ से ऑटो या रिक्शा ले सकते हैं।
14वीं सदी में पानी की किल्लत दूर करने के लिए बनाई गई यह बावली, Ghiyas-ud-din Tughlaq के समय का अहम जल स्रोत रही। क़िले के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में स्थित यह बावली इतिहास प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए बेहतरीन जगह है।
कैसे पहुंचें:
मेट्रो: Tughlakabad Metro Station (Violet Line)
वहां से ऑटो लेकर क़िला पहुंचें।
Connaught Place के पास स्थित यह बावली दिल्ली की सबसे मशहूर stepwells in India में गिनी जाती है। कहा जाता है कि इसे राजा अग्रसेन ने बनवाया था। इसकी तीन मंज़िलें और 104 सीढ़ियाँ आज भी देखने लायक हैं। यह जगह फिल्म PK में भी दिखाई गई थी।
कैसे पहुंचें:
मेट्रो: Barakhamba Road Metro Station (Blue Line)
स्टेशन से पैदल जा सकते हैं।
यह बावली Feroz Shah Kotla Fort का हिस्सा है और कभी यहाँ से किले के भीतर पानी की आपूर्ति होती थी। वर्तमान में इसे लोहे की ग्रिल से सुरक्षित किया गया है और यह ग्राउंड्स की सिंचाई के लिए प्रयोग होती है।
कैसे पहुंचें:
मेट्रो: Pragati Maidan Metro Station (Blue Line)
वहां से ऑटो या टैक्सी ले सकते हैं।
Mehrauli Archaeological Park में स्थित यह चार-स्तरीय आयताकार बावली दिल्ली की सबसे सुंदर बावलियों में से एक है। इसे लोदी शासकों के समय बनाया गया था। पत्थरों की नक्काशी और शांत वातावरण इसे घूमने वालों के लिए खास बनाता है।
मेट्रो: Qutub Minar Metro Station (Yellow Line)
वहां से ऑटो लेकर पार्क जाएं।
Sher Mandal और Qila-e-Kohna Masjid के बीच स्थित यह बावली लगभग 89 सीढ़ियों वाली है। कहा जाता है कि यह वही जगह है जहाँ कभी पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ थी। यहाँ की गहराई और संरचना आपको प्राचीन जल प्रबंधन तकनीक की झलक दिखाती है।
कैसे पहुंचें:
मेट्रो: Pragati Maidan Metro Station (Blue Line)
वहां से ऑटो लेकर पुराना क़िला पहुँचे।
यह L-shaped Stepwell लाल क़िले से भी पुरानी है। इसकी अनोखी संरचना और ऐतिहासिक महत्व इसे दिल्ली की सबसे महत्वपूर्ण बावलियों में शामिल करता है।
कैसे पहुँचें:
मेट्रो: Lal Qila/Red Fort Metro Station (Violet Line)
स्टेशन से सीधे लाल क़िले के प्रांगण में जा सकते हैं।
यह बावली 1354 में Feroz Shah Tughlaq के क़िले का हिस्सा थी। इसका ऐतिहासिक महत्व सिर्फ स्थापत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 1857 की क्रांति में भी अहम रही। उस समय यह बावली ब्रिटिश सैनिकों के लिए पानी का एकमात्र स्रोत थी, जब वे विद्रोही भारतीय सिपाहियों से घिरे हुए थे।
समय बीतने के साथ यह बावली कूड़े-कचरे और जंगली झाड़ियों में दबकर लगभग नष्ट हो गई। हालाँकि हाल ही में ASI (Archaeological Survey of India) ने इसका पुनरुद्धार किया। अब यहाँ Rainwater Harvesting की तकनीक का उपयोग कर पानी फिर से जमा होना शुरू हुआ है, भले ही मात्रा सीमित हो।
कैसे पहुंचें:
यह बावली हिंदू राव हॉस्पिटल (Civil Lines, Delhi) के परिसर में स्थित है।
नज़दीकी मेट्रो: Civil Lines Metro Station (Yellow Line)।
आज का द्वारका भले ही दिल्ली का मॉडर्न रेज़िडेंशियल हब है, लेकिन 1980 के दशक से पहले यह एक गाँव हुआ करता था। इसी गाँव Loharehri में यह बावली बनी थी, जिसे माना जाता है कि यह Lodi Era Stepwell है।
समय के साथ यह बावली गुम हो गई और कूड़े से भर गई। 2011 में यह दोबारा खोजी गई जब यह एक सूनी ज़मीन पर मिली, ठीक एक स्कूल और रेज़िडेंशियल कॉम्प्लेक्स के पास। आज भी यह अपेक्षाकृत छोटी बावली है, जिसकी वास्तुकला बेहद साधारण है और यह अपनी बड़ी समकालीन बावलियों जैसी भव्य नहीं है।
कैसे पहुंचें: नज़दीकी मेट्रो: Dwarka Sector 12/13 (Blue Line) मुख्य सड़क से खेतों के रास्ते आसानी से पहुँचा जा सकता है।
1560 में Hamida Banu Begum, जो मुग़ल सम्राट हुमायूँ की बेगम थीं, ने Arab Ki Sarai बनवाया था। यह परिसर उन 300 अरबी कारीगरों के लिए था जो मक्का से हुमायूँ का मक़बरा बनाने के लिए दिल्ली आए थे। उन्हीं कारीगरों के लिए यहाँ एक बावली भी बनाई गई थी, जो बाद में सदियों तक मलबे और मिट्टी में दब गई। हाल ही में जब Humayun’s Tomb Complex का पुनरुद्धार हुआ, तो Arab Ki Sarai Baoli भी मलबे से बाहर निकाली गई। अब यह बावली साफ़ की जा चुकी है और इसमें बारिश व भूजल का पानी जमा होना शुरू हो गया है।
कैसे पहुंचें:
यह बावली Humayun’s Tomb Complex (Nizamuddin East, Delhi) के भीतर स्थित है।
नज़दीकी मेट्रो: JLN Stadium या Jor Bagh (Violet Line)।
दिल्ली की ये बावलियां न सिर्फ़ पानी के संरक्षण का प्रतीक हैं, बल्कि कला, संस्कृति और स्थापत्य के भी गवाह हैं। अगर आप दिल्ली ट्रिप पर हैं तो इन 10 Famous Baolis in Delhi को ज़रूर explore करें।
Timing: सुबह जल्दी या शाम को जाएँ, ताकि भीड़ से बचा जा सके।
Guided Tour: Heritage walks और guided tours अधिक जानकारी देंगे।
Photography: अधिकतर बावलियां photography-friendly हैं, लेकिन Red Fort में permission लेना जरूरी है।
Footwear: Comfortable shoes पहनें क्योंकि सीढ़ियाँ खड़ी और पतली होती हैं।
Safety: बावलियों में पानी का स्तर गहरा होता है, बच्चों को ध्यान में रखें।
दिल्ली की बावलियां न केवल historical और architectural heritage हैं, बल्कि ये जल संरक्षण और सामाजिक संस्कृति की झलक भी देती हैं। Agrasen ki Baoli और अन्य stepwells दिल्ली की ancient engineering marvels के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।
Delhi में स्थित बावलियां यह दिखाती हैं कि किस प्रकार प्राचीन भारत में water management और social architecture का बेहतरीन उदाहरण मिलता था। ये स्थल आज भी पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक heritage experience प्रदान करते हैं।
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