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Mathura Shahi Idgah Mosque Controversy : कृष्ण जन्मभूमि पर बनी थी मथुरा शाही ईदगाह मस्जिद?, जानें पूरा मामला

Mathura Shahi Idgah Mosque Controversy : मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण-जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद का विवाद सालों से कोर्ट में है, लेकिन न्याय की उम्मीद की एक किरण अब दिख रही है क्योंकि अदालत ने अब इमारत के सर्वेक्षण का आदेश दिया है. इस विवाद को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं. लोग लंबे समय से लंबित विवाद का इतिहास जानना चाहते हैं. आइए जानते हैं कृष्ण जन्मभूमि और ईदगाह मस्जिद विवाद के बारे में गहराई से.

कृष्ण जन्मभूमि – ईदगाह मस्जिद का विवाद क्या है? || what is the dispute of Krishna Janmabhoomi – Idgah Masjid?

फरवरी 2020 में सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ऊपर शाही ईदगाह मस्जिद बनी है, इसलिए इसे हटाया जाए. इसके साथ ही जमीन को लेकर 1968 में हुआ समझौता अवैध है.

लेकिन फिर याचिका खारिज कर दी गई. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कृष्ण विराजमान का फॉलोअर है और कृष्णा विराजमान खुद केस दर्ज नहीं कर सकता है. इसके बाद हिंदू पक्ष ने मथुरा जिला जज कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की. अब मथुरा कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा है कि सिविल कोर्ट इस पर सुनवाई करे.

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कृष्ण जन्मभूमि – ईदगाह मस्जिद विवाद की वजह || Krishna Janmbhoomi-Idgah Masjid controversy

ये मामला सिर्फ साल 2020 का नहीं है बल्कि इसकी जड़ें सालों पुरानी हैं. इस विवाद की जड़ 1968 में हुआ समझौता है, जिसमें श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह ने भूमि विवाद का निपटारा कर मंदिर और मस्जिद के लिए जमीन तय की थी.

लेकिन, पूरे स्वामित्व और मंदिर या मस्जिद में पहले किसे बनाया गया था इसे लेकर विवाद है. हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मामला साल 1618 से शुरू हुआ था और इसे लेकर कई मामले सामने आ चुके हैं.

क्या है याचिकाकर्ता की मांग || What is the demand of the petitioner

मस्जिद निर्माण को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद है. हिंदू पक्ष ने याचिका में कहा है, ”1815 में जमीन की नीलामी के वक्त वहां कोई मस्जिद नहीं थी. तभी कटरा केशव देव के किनारे एक जर्जर ढांचा बनाया गया. यहां तथाकथित शाही ईदगाह मस्जिद बनाई गई है. एक अवैध समझौते के बाद. लेकिन, सचिव तनवीर अहमद का कहना है कि उस जमीन पर 1658 से मस्जिद बनी हुई है.

एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री का कहना है, “यह पुराने मुद्दों को उठाने की बात नहीं है. विवाद खत्म नहीं हुआ है. आज भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां मस्जिदों या स्मारकों में ऐसी जगहों पर हैं जो पैरों के नीचे आती हैं. आस्था के साथ. , यह प्राचीन। गौरव को बनाए रखने का मुद्दा भी है.”

क्या कहती है सिविल कोर्ट की याचिका || What does the civil court petition say

हिन्दू समाज में यह मान्यता है कि श्री कृष्ण का जन्म कंस के कारागार में हुआ था और यही श्री कृष्ण का जन्म स्थान है. यह पूरा क्षेत्र ‘कटरा केशव देव’ के नाम से जाना जाता है जो मथुरा जिले के मथुरा बाजार शहर में स्थित है. कृष्ण की वास्तविक जन्मभूमि से संबंधित 13.37 एकड़ भूमि के एक हिस्से पर अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया गया है.

“1968 में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद के बीच हुआ समझौता अवैध था, इसे खारिज किया जाना चाहिए. कटरा केशव देव की जमीन श्रीकृष्ण को वापस दी जानी चाहिए. मुसलमानों को वहां जाने से रोका जाना चाहिए.उस जमीन पर ईदगाह का ढांचा मस्जिद को हटा देना चाहिए.”

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कृष्ण जन्मभूमि – ईदगाह मस्जिद का इतिहास क्या कहता है

कहा जाता है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्म स्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट करके उसी जगह 1669-70 में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था. 1770 में गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई. इसमें मराठा जीते थे.

जीत के बाद मराठाओं ने फिर से मंदिर का निर्माण कराया. 1935 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13.37 एकड़ की भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को आवंटित कर दी. 1951 में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ये भूमि अधिग्रहीत कर ली.

कृष्ण जन्मभूमि – ईदगाह मस्जिद केस में याचिकाकर्ता कौन हैं? || Who are the petitioners in ?

साखी रंजना अग्निहोत्री के माध्यम से विराजमान भगवान कृष्ण
अस्थान श्री कृष्ण जन्मभूमि सखी रंजना अग्निहोत्री द्वारा
रंजना अग्निहोत्री
प्रवेश कुमार
राजेश मणि त्रिपाठी
करुणेश कुमार शुक्ला
शिवाजी सिंह
त्रिपुरारी तिवारी

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