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Nongriat Village in Cherrapunji: न न करते रुक गए गांव में… मिला बेहतरीन खाना, बेहतरीन लोग

Nongriat Village in Cherrapunji: भारत के उत्तर पूर्व ( north-eastern India ) में स्थित मेघालय राज्य ( Meghalaya State ) के ईस्ट खासी हिल्स डिस्ट्रिक्ट ( East Khasi Hills district ) में नॉन्गरिअट गांव ( Nongriat Village ) है. इस गांव को यहां के living root bridges के लिए जाना जाता है. ये living root bridges एक तरह से मेघालय का ताजमहल है. इस गांव के एक living root bridges को Jingkieng Nongriat के नाम से जाना जाता है.

मेघालय के इस गांव में 3 लिविंग रूट ब्रिज हैं. कमाल की बात तो ये है कि इन्हें हाथ से ही बनाया गया है. Khasi Hills में ये परंपरा सदियों से रही है. Khasi लोग इसे लंबे वक्त से करते रहे हैं. Jingkieng Nongriat को Double Decker Bridge के नाम से भी जाना जाता है. इसे आपने कई व्लॉग या डॉक्युमेंट्रीज में देखा होगा. गांव में कई दूसरे भी लिविंग रूट ब्रिज हैं.

Nongriat के पास, सबसे शानदार नजारे वाला गांव है Laitkynsew. मानसून में यहां कमाल की खूबसूरती दिखाई देती है. waterfall of Ka Likai यहां का यूएसपी है. एक पगडंडी Tyrna गांव तक भी जाती है जो Cherrapunji-Laitkynsew bridle-path के नीचे है.

Nongriat Village Tour Experience

डबल डेकर ब्रिज ( Double Decker Bridge ) तक का ट्रेक इतना मुश्किल नहीं था, जितना कि उस पुल पर लड़कों से बात करना, जो हमें इग्नोर पर इग्नोर किए जा रहे थे. आखिरकार इस पुल का दरवाजा खुला और हम नॉन्गरिअट गांव में दाखिल हुए. पिछले ब्लॉग में आप पूरे ट्रेक का सफर पढ़ पाएंगे… वीडियो को हमने इसी आर्टिकल में एंबेड कर दिया है.

नॉन्गरिअट गांव ( Nongriat Village ) में हम जैसे ही दाखिल हुए, यहां तो अलग ही माहौल था. छोटे छोटे कॉटेज थे. इन्हें होमस्टे कहते हैं. यहां वही लड़के जो पुल पर रास्ता रोके खड़े थे, वह हमें Santina Homestay लेकर आए. यहां सैंटीना जी इसकी मालकिन हैं. भला हो रोहित का, जो उन्होंने उनसे संवाद करना शुरू किया.

पुल पर ताला खुलने की शर्त ही यही थी कि हमें गांव में स्टे करना पड़ेगा. मैंने पहले तो सोचा कि इससे बच जाएंगे लेकिन सैंटीना जिद पर अड़ गईं. मैंने उन्हें 500 रुपये दिए और कहा कि हम डबल डेकर ब्रिज देखकर जाएंगे और सामान लेकर फिर वापस आएंगे. वह हमारी चालाकी समझ गईं, बोलीं कि अगर आप यहां स्टे नहीं करेंगे तो मैं ये पैसे भी नहीं लूंगी. ऐसी ईमानदारी कहां मिलेगी भला? आखिर में हमने तय कर लिया कि रुक ही लेते हैं.

सैंटीना जी से बातचीत करके हम आगे बढ़ चले डबल डेकर ब्रिज की ओर. कुछ मीटर के ट्रेक के बाद हम डबल डेकर ब्रिज ( Double Decker Bridge ) पहुंच गए. डबल डेकर ब्रिज पर हमारे अलावा सिर्फ 1 कपल था. रात भी होने को थी. डबल डेकर ब्रिज ( Double Decker Bridge ) पर मैंने देखा कि पानी में मछलियां बिना किसी डर के तैर रही थीं. दूर झरने से पानी गिर रहा था, जो नीचे आकर पुल के नीचे से गुजर रहा था.

डबल डेकर ब्रिज पर हम आधे घंटे रुके. यहां जमकर फोटो खिंचाई. मैंने व्लॉग का कुछ हिस्सा यहां शूट किया. यहां हमने रोहित, दीपक को अलविदा कहा. यहां से हम चल दिए कुछ और एक्सप्लोर करने.

Rainbow Waterfalls in Cherrapunji

नॉन्गरिअट गांव में ही हमने सुना कि पास में कोई Rainbow Waterfalls है. फोन की डेड होती बैटरी के बीच भी मन की चाहत हिलोरे मारती रही कि चलो देख आते हैं कि ये वाटरफॉल है कैसा. हम डबल डेकर ब्रिज से आगे बढ़ चले. आगे गांव था और यहां भी होमस्टे बने हुए थे. जंगलों के बीच में हमें एक स्टेडियमनुमा मैदान दिखा. यहां गांववाले मजे से फुटबॉल खेल रहे थे और महिलाएं उन्हें देख रही थीं.

बच्चों संग हमने फोटो खिंचवाई. हालांकि भाषा का संकट कायम था. लोग न तो भाषा समझ पा रहे थे और न बात कर पा रहे थे. गौरव के मोबाइल के भरोसे हम आगे बढ़े जा रहे थे. आगे कंक्रीट की सीढ़ियां थी. हम काफी दूर तक गए… लेकिन बढ़ता अंधेरा देखकर हमने फैसला बदला. हम काफी दूर से वापस लौट आए. हम Rainbow Waterfalls तक नहीं पहुंच सके.

Homestay in Nongriat Village, Cherrapunji

अब हम फिर से डबल डेकर ब्रिज से होते हुए वापस सैंटीना होमस्टे तक आ चुके थे. सैंटीन होमस्टे पर हमने देखा कि दीपक, रोहित ने रात वहीं रुकने का फैसला किया है. इसकी वजह ये थी कि रात को नॉन ट्राइबल्स के लिए ये इलाका सेफ नहीं है. टूरिस्ट को तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन बंगाली, पंजाबी आदि कम्युनिटी जो वहीं रहती है, उसके लिए खतरा हो सकता है.

रोहित, दीपक और गौरव तीनों हमारे बगल वाले रूम में ही रुके. मैं और गौरव थोड़ा रिलेक्स होने के लिए बैठे और वे तीनों चल दिए गांव घूमने. जब वे घूमकर आए तो कमरे के बाहर बनी गैलरी में हम पांचों बैठ गए. यहां बगल में ही नीचे जाती सीढ़ियां हैं. सीढ़ियों से चढ़कर तीन लोग आते दिखे. इसमें एक लड़की वही थी जिसे हमने अपना डंडा दिया था. तीनों से बात हुई. ये दिल्ली से थे.

इनके पीछे पीछे वह शख्स था जो हमारा 15 किलो का बैग लेकर आ रहा था. हम इसे ट्रेक से पहले ही छोड़कर आए थे. हमें क्या पता था कि रात यहीं रुकना पड़ेगा. भारी भरकम और बेहद कीमती बैग को खोलकर देखा तो एक एक सामान सही मिला. कमाल के लोग हैं यहां के. ईमानदारी ने तो दिवाना कर दिया. इस शख्स को अगले दिन हमने बैग लेकर आने और वापस लेकर जाने के एवज में 500 रुपये दिए.

Dinner in Nongriat Village, Cherrapunji

मेघालय में जिस बात ने थोड़ा परेशान किया, वह भोजन ही था. मैं कंप्लीट वेजिटेरियन ठहरा और यहां का फूड कल्चर टोटली डिफ्रेंट. अब Nongriat गांव में भी यहीं चिंता सता रही थी. खैर रात में खाने की टेबल सज चुकी थी. पूर्वांचल से मैं, महाराष्ट्र से गौरव और बंगाल से रोहित, दीपक और उनका एक और साथी… कमाल का पल था दोस्तों. वीडियो जरूर देखिएगा.

डिनर भी बहुत लाजवाब था. बाकी लोगों ने ऑमलेट लिया. मैंने दाल और चावल, साथ में सब्जी और आचार. कमाल का स्वाद था. मेघालय में पहली बार इतना बेहतरीन भोजन मिला था. खाना खाकर चैन मिला. डिनर करके अघा चुके थे. सब टहलने लगे.

गांव में एक बात रह गई. डिनर से पहले मुझे एक चर्च से प्रार्थना की आवाज आई. मैं अंधेरे रास्तों से होता हुआ प्रार्थना वाली आवाज की ओर बढ़ता चला. साथ में गौरव भी थे. चर्च में देखा तो बच्चे हाथों में बाइबल लेकर प्रार्थना कर रहे थे. मैं वहां बाहर ही कुछ देर रुका और फिर लौट आया.

Food and Stay Charge in Nongriat Village, Cherrapunji

Santina Homestay में भोजन और ठहरने के लिए हमने कुल 800 रुपये दिए. इसमें मेरा और गौरव का स्टे, डिनर और सुबह की चाय शामिल थी.

अगले ब्लॉग में पढ़िए Nongriat Village से वापसी का किस्सा. अपना ध्यान रखिएगा, गुड बॉय…

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