आज हम आपको गोवा की उन डिशेज ( Goa Famous Food ) के बारे में बताने जा रहे हैं जो कभी तो पूरे राज्य की शान हुआ करती थी...
Goa Famous Food : भारत दुनिया में एक ऐसा देश है जहां पर पहाड़, रेगिस्तान, ठंडे इलाके, गर्म इलाके, समुद्र के खूबसूरत किनारे सभी मौजूद है। ये हमारी खुशकिस्मती है कि हम पूरे साल देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर हर एक मौसम का आनंद ले सकते हैं।
शायद भारत की यही विविधता दुनिया भर के सैलानियों को अपनी तरफ खींचती है। वहीं अगर आपको समुद्र पसंद हैं तो गोवा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
ये जगह के लिहाज से गोवा भारत का सबसे छोटा और आबादी के हिसाब से चौथा सबसे छोटा राज्य है और पूरी दुनिया में गोवा अपने खूबसूरत समुद्री किनारों के लिए जाना जाता है।
गोवा में पहले पुर्तगालियों ने 450 सालों तक शासन किया। साल 1961 में भारत ने गोवा को पुर्तगालियों से आजाद कराया था। लंबे वक्त तक यहां पर उनका शासन होने की वजह से यूरोप की संस्कृति की झलक पूरी तरह से देखी जाती है।
यहां पर वास्तुकला में भी पुर्तगाली असर दिखता है। क्योंकि गोवा समुद्र के किनारे पर बसा हुआ है जिस कारण यहां पर हरियाली और पानी खूबसूरती को बढ़ाते हैं।
सावन के महीने में यहां का नजारा काफी ज्यादा हसीन होता है। यहां पर नए साल का जश्न मनाने के लिए काफी ज्यादा लोग आते हैं क्योंकि गोवा की एक छवि ये भी है कि ये जगह पार्टी करने वालों के लिए है।
आज हम आपको गोवा की उन डिशेज ( Goa Famous Food ) के बारे में बताने जा रहे हैं जो कभी तो पूरे राज्य की शान हुआ करती थी, लेकिन अब वो थाली से गायब होती जा रही है।
इस सी फूड ( Goa Famous Food ) को देर तक पकाना नहीं होता है। इसे प्याज के साथ ही हल्का नर्म किया जाता है, पूरी तरह से सुनहरा नहीं किया जाता है।
इसका स्वाद ताजे नारियल और बारीक धनिये के साथ काफी बेहतरीन लगता है। गौरतलब है कि अब ये डिश ( Goa Famous Food ) गोवावालों की थाली में गायब होती जा रही है।
लेकिन साइड डिश के रूप में अभी भी इसे रोटस या राइस के साथ सर्व किया जाता है। वहीं कुछ लोग अब इसे सैंडविच में भरकर खाते हैं।
इसके चलने के कम होने के पीछे का मुख्य कारण है प्रॉन्स, फिश, क्रैब्स का लगातार बढ़ते जाना। गोवा के अधिकतर घरों में फिश करी थाली का एक हिस्सा है।
यहां पर हर एक सी फूड को बनाने के बहुत से तरीके भी हैं। आपको बता दें कि जैसे जैसे समुद्र में प्रदूषण बढ़ता गया और गंदगी फैलने लगी उस वजह से ये कम होता गया है।
ये गोवा का एक पारंपरिक कुकुंबर केक है। इसके बारे में अच्छी बात ये है कि इस केक को बेक करने की जगह पर स्टीम किया जाता है।
स्टीम्ड एगलेस कुकंबर केक को गोवा में कुछ लोग टवसली तो कुछ तोसली भी कहते हैं। ये केक खीरा, रवा, गुड़ और नारियल के साथ पकाया जाता है।
इसमें आपको खीरे का स्वाद और गुड़ की हल्की मिठास मिलेगी। अब गोवा में ज्यादातर विदेशी हैं इसलिए उन्हें मिठाईयों की जगह पर चॉकलेट्स खाना ज्यादा पसंद है। इसलिए टक्सली की जगह पूरी तरह से चॉकलेट्स ने ले ली है।
इसके कम होने की वजह एक ये भी है कि बाकी केक बेक होते है जबकि ये स्टीम करके बनाया जाता है, इसलिए इसका स्वाद अन्य केक की तुलना में लोगों को पसंद नहीं आता है।
ये एक एंग्लो-इंडियन रेसिपी है जिसमें पुर्तगाली जायका ( Goa Famous Food ) भी है। ये करी काफी मसालेदार और चटपटी होती है।
इसे आमतौर पर नारियल राइस के साथ ही सर्व किया जाता है। ये एक नॉन वेजिटिरियन डिश है क्योंकि इसमें जो बेस होता है वो मीट का बना होता है।
अब गोवा के अंदर इस डिश की जगह फिश करी, मटन, चिकन, प्रॉन्स ने ले ली है, लोगों को अब ये डिशेड ज्यादा पसंद आने लग गई है।
इन मीटबॉल्स को बनाने में ज्यादा तेल और वक्त लगता है। लेकिन इसके स्वाद की तारीफ हर कोई करता है। गोवा एख ऐसा राज्य है जहां पर सी-फूड की भरमार है
इसलिए भी मीटबॉल्स करी की जगह कई और तरह की चीजों ने ले ली है।
मानसून में गोवा में टेरेन, तेरे के पत्ते या कोलोकेसिया यानी अरबी बड़ी मात्रा में उगती है। टेरेन या तेरे एक प्रकार की अरबी का ही पत्ता होता है। ये एक टेस्टी भारतीय खाना है।
अरबी के पत्तों से पतौड़ बनाकर कढ़ी में डाले जाते हैं और आलू के साथ इसके पत्तों की भाजी बनाई जाती है। लेकिन आज के वक्त में लोग इसे वेजिटिरियन ग्रेवी में खाना बहुत कम पसंद करते हैं।
अरबी के पत्तों को अब लोग पतौड़ बना लेते हैं। और कुछ लोगों को अरबी के पत्तों से एलर्जी भी होती है, उन्हें इससे गले में खराश और खुजली होने लग जाती है।
तो जिन लोगों को अलर्जी की तकलीफ होती है उन्हें इसे इमली या कोकम जैसी खट्टी चीजों के साथ बनाने की सलाह दी जाती है।
वहीं आजकल लोगों की स्किन सेंसिटिव है तो उन लोगों को इन पत्तियों को छीलने या काटने समय भी दिक्कत होती है।
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