Pathankot Tour Guide – यहां की इन खूबसूरत जगहों पर जाना ना भूलें

कांगड़ा, डलहौजी और नदी चक्की की तलहटी में स्थित, पंजाब का पठानकोट (PATHANKOT) शहर अपने शांत माहौल, हरियाली और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध इतिहास के लिए बहुत प्रसिद्ध है. पठानकोट (PATHANKOT) पश्चिम से पाकिस्तान की सीमा और पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर के बैठक बिंदु पर स्थित है. पठानकोट (PATHANKOT) ने कई पर्यटकों को विभिन्न प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक आकर्षणों से आकर्षित किया है. बात करें पठानकोट की तो ये कभी शॉल और लोई बुनाई उद्योगों के लिए कई शताब्दियों के लिए जाना जाता था.

पठानकोट (PATHANKOT) में जहाँ अब भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के लिए एक ठिकाना है. ये शहर एक तरफ शिवालिक रेंज और दूसरी तरफ शानदार हिमालय से घिरा हुआ है. पठानकोट का प्राकृतिक सौंदर्य, सुंदर हरियाली के कालीनों के साथ यहाँ पर स्थित चक्की नदी नज़ारा सच में देखते बनता है. यही नहीं पठानकोट (PATHANKOT) में घूमने के लिए शाहपुर कंडी किले और नूरपुर किले की ऐतिहासिक संरचनाएं प्रमुख स्थानों में से एक हैं. यहां स्थित मुक्तेश्वर मंदिर और नागिनी मंदिर जैसे कई बेहतरीन पूजा स्थलों के कारण ये एक धार्मिक स्थल के रूप में भी जाना जाता है.

 

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अगर आप पठानकोट (PATHANKOT) के इतिहास को करीब से देखना चाहते हैं, तो आपको नूरपुर फोर्ट एक बार जरूर जाना चाहिए जो पठानों के शासनकाल के गौरवशाली काल को दिखता है. इसके अलावा आप रणजीत सागर बांध की सुंदरता को भी निहार सकते हैं, ये बेहद लुभावने दृश्य दिखता है. यही नहीं अगर आप शॉपिंग का शौक़ रखते हैं, तो अपने मन को वहाँ के नोवेल्टी मॉल में जाकर कुछ राहत दें सकते हैं. जिसमें हाई-एंड स्टोर्स के साथ-साथ फूड कोर्ट भी शामिल हैं.

पठानकोट क्यों प्रसिद्ध है? Why Pathankot famous for?

पठानकोट (PATHANKOT) पहले कई शताब्दियों के लिए लोई और शॉल बुनाई उद्योगों के लिए प्रसिद्ध था. लेकिन अब ये भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के लिए एक आधार के रूप में कार्य करता है. पठानकोट (PATHANKOT) 900 साल पुराने नूरपुर किले और 350 साल पुराने मुक्तेश्वर मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है.

 

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पठानकोट (PATHANKOT) में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगह: Best places to visit in Pathankot

1. नूरपुर का किला: Nurpur Fort

ये 900 साल पुराना किला एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है. ये पठानिया राजपूतों द्वारा बनवाया गया. लेकिन शाहजहाँ ने बाद में अपनी पत्नी नूरजहाँ के नाम पर इस किले का नाम रखा. आप इस शानदार किले पर जाकर पठानकोट के गौरवशाली इतिहास के बारे में जान सकते हैं.

2. मुक्तेश्वर मंदिर: Mukteshwar Temple

पठानकोट (PATHANKOT) का ये मंदिर सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक माना जाता है, मुक्तेश्वर मंदिर लगभग 350 साल पुराना है और ये भगवान शिव को समर्पित है. ये प्राचीन मंदिर समुद्र तल से लगभग 2312 मीटर ऊपर स्थित है. ये हिंदू धर्मग्रंथ में भगवान शिव को समर्पित अठारह सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक माना जाता है. इस मंदिर में एक सफेद संगमरमर का शिव लिंग और विष्णु, ब्रह्मा, भगवान गणेश, पार्वती, नंदी, और हनुमान जी जैसे अन्य हिंदू देवताओं की मूर्तियाँ यहां स्थापित हैं.

3. रंजीत सागर बांध: Ranjit Sagar Dam

सिंचाई और बिजली उत्पादन के उद्देश्यों के लिए बनाया गया ये बाँध, पंजाब में इंजीनियरिंग के लिए ये सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है. रावी नदी पर बना ये बांध अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी पर्यटकों को आकर्षित करता है. इस बाँध से आप पठानकोट (PATHANKOT) का मनमोहक नज़ारा देख सकते हैं.

4. काठगढ़ मंदिर: Kathgarh Temple

नदी ब्यास और नदी चोच के संगम पर स्थित, काठगढ़ मंदिर अपने 6 फीट ऊंचे शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित, इस मंदिर को रहस्यमयी उत्पत्ति वाले एक प्राचीन लिंगम का प्रतीक माना जाता है.

ये भी कहा जाता है कि भगवान राम की खोज के दौरान भरत ने इस मंदिर का दौरा किया था. काठगढ़ गाँव में एक शानदार रोमन शैली की वास्तुकला में निर्मित, ये मंदिर अपने चारों ओर एक सुंदर नज़ारे के लिए जाना जाता है.

5. लक्ष्मी नारायण मंदिर: Laxmi Narayan Temple

ये पठानकोट के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है. लक्ष्मी नारायण मंदिर इस क्षेत्र में एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर है. बता दें ये मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी जी को समर्पित है और इसमें मुख्य मंदिर में हिंदू देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं. यही नहीं आप यहां आंगन में भगवान हनुमान जी की एक बड़ी प्रतिमा भी देख सकते हैं. इस मंदिर के चारों तरफ हरियाली फैली है. जहाँ एक अलग ही शांति का आनंद मिलता है.

6. शनि देव मंदिर: Shani Dev Temple

पठानकोट में स्थित शनि देव मंदिर यहां के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जो भगवान शनि को समर्पित है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में प्रार्थना और पूजा करने से लोगों को अपने दुखों और कठिनाइयों से मुक्ति मिल सकती है. ये मंदिर पृष्ठभूमि में हिमालय के साथ प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थित है. यहां के शांत वातावरण चिंतन करने के लिए आदर्श स्थल है.

7. शाहपुरकंडी किला: Shaahpurkandi Fort

सम्राट शाहजहाँ, जसपाल सिंह पठानिया के राजपूत द्वारा निर्मित, शाहपुरकंडी किला 1505 में नूरपुर और कांगड़ा के क्षेत्रों की सुरक्षा के लिहाज से बनाया गया था. लेकिन आज भी यहाँ के खंडहरों में, किले के कुछ हिस्से पांच शताब्दियों के बाद भी बरकरार हैं.

 

कब जाएं पठानकोट: When to visit Pathankot

वैसे तो पठानकोट (PATHANKOT) की यात्रा के लिए अप्रैल से अक्टूबर का समय सबसे अच्छा है. क्योंकि साल के इस समय के दौरान यहां का मौसम बेहद सुहावना होता है. इस शहर में जाने का असली मज़ा लेने के लिए, आपको बैसाखी और लोहड़ी के त्योहारों के दौरान इस शहर की यात्रा जरूर करनी चाहिए. जो
यहां के बेहतरीन उत्सव के साथ पठानकोट शहर की ख़ूबसूरती को और भी ज़्यादा बढ़ा देते हैं.

पठानकोट (PATHANKOT) कैसे जाएं? How to visit Pathankot?

1. बता दें पठानकोट (PATHANKOT) की यात्रा का सबसे अच्छा तरीका फ्लाइट से जाने का है. यहां पास के हवाई अड्डे अमृतसर और जम्मू हैं. वहीं जम्मू हवाई अड्डा एक घरेलू हवाई अड्डा है और इसमें भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ने वाली उड़ानें हैं.

2. पठानकोट (PATHANKOT) शहर की यात्रा करने का दूसरा तरीका रेलवे द्वारा है, क्योंकि पठानकोट (PATHANKOT) में स्थित जंक्शन रेलवे स्टेशन यहाँ का मेन  स्टेशन है. इसमें देश के अधिकांश शहरों और कस्बों को जोड़ने वाली कई ट्रेनें आपको यहां से मिल जाएंगी.

3. इसके अलावा अगर आप बस से यात्रा करना चाहते हैं, तो महाराणा प्रताप इंटर स्टेट बस टर्मिनल के माध्यम से बस से भी यहां की यात्रा कर सकते हैं.

 

Anchal Shukla

मैं आँचल शुक्ला कानपुर में पली बढ़ी हूं। AKTU लखनऊ से 2018 में MBA की पढ़ाई पूरी की। लिखना मेरी आदतों में वैसी शामिल है। वैसे तो जीवन के लिए पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन खुद्दारी और ईमानदारी से बढ़कर नहीं। वो क्या है किमैं लोगों से मुलाक़ातों के लम्हें याद रखती हूँ,मैं बातें भूल भी जाऊं तो लहज़े याद रखती हूँ,ज़रा सा हट के चलती हूँ ज़माने की रवायत से,जो सहारा देते हैं वो कंधे हमेशा याद रखती हूँ।कुछ पंक्तिया जो दिल के बेहद करीब हैं।"कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोयेऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोये"