Ghalib ki Haveli: गालिब की हवेली में मैंने क्या देखा?

गालिब की हवेली (Ghalib ki Haveli) में मैंने क्या देखा? ये एक ऐसा सवाल है जिसे मैंने अपने आपसे पूछा, वो भी तब जब गालिब की हवेली गए हुए मुझे 3 दिन बीत चुके थे. मुझे याद आया मैं चांदनी चौक की सड़क पर चलते हुए बल्लीमारान पहुंचा था. जूतियों की एक दुकान पर हवेली का रास्ता मैंने पूछा था.

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सेठ चुन्नामल हवेली (Chunnamal Haveli): दीवार पर आज भी 1864 वाली उर्दू लिखी है!

हवेली को दूर से देखकर ही मैं समझ गया था कि यही चुन्नामल हवेली (Chunnamal Haveli) होगी. पास गया तो मुख्य दरवाजे के पास संतोष सिंह नाम के शख्स मिले जो हवेली के दरवाजे पर ही थे. मैंने उनसे अंदर जाने की अनुमति मांगी तो उन्होंने कहा कि आप हवेली के मालिकों से पहले बात कर लीजिए…

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