Ajmer Sharif Dargah Tour in Rajasthan - Khwaja Garib Nawaz
Ajmer Sharif Dargah Tour : राजस्थान में मौजूद अजमेर शरीफ दरगाह ( Ajmer Sharif Dargah Tour ) की मान्यता दुनिया भर में है. कहने के लिए तो यह मुस्लिम धर्म को मानने वालों का तीर्थ स्थल है मगर यहां आपको हर धर्म के लोग माथा टेकते दिख जाएंगे. यहां पर ख्वाजा गरीब नवाज की मजार है. इस मजार पर आम आदमी तो माथा टेकने आते ही हैं, साथ ही यहां पर बॉलीवुड सेलिब्रिटीज से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने प्रतिनिधि को भेज चुके हैं. कहते हैं कि इस दरगाह पर जो एक बार अपनी मन्न्त मांगता है वह खाली हाथ नहीं लौटता. यह बात कितनी सही है, आज आपको यह बताएंगे कि अगर आप आने वाले समय में अजमर शरीफ जा रहे हैं तो आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
Ajmer दरगाह का सबसे पहला नियम है कि यहां पर महिलाएं या पुरुष खुले सिर नहीं जा सकती और न ही आप वैस्टर्न कपड़ों में दरगाह के अंदर जा सकते हैं. इसलिए अगर आप दरगाह जा रहे हैं तो महिलाएं ध्यान रखें कि साड़ी या सूट पहन कर जाएं क्योंकि दरगाह में आपको सिर ढंकना होगा जिसके लिए आपको कपड़े की आवश्यकता होगी. दरगाह का दूसरा नियम है कि आप बिना हाथ पैर साफ किए दरगाह में प्रवेश नहीं कर सकतीं. इसके लिए आपको दरगाह में मौजूद जहालरा में हाथ पैर साफ करने होते हैं. यह जहालरा ख्वाजा जी के वक्त से है और दरगाह के पवित्र कामों में इसका पानी इस्तेमाल किया जाता है.
अजमेर में निजाम सिक्का नामक एक साधारण पानी भरने वाले ने मुगल बादशाह हुमायुं को एक बार डूबने से बचाया था. उनकी मृत्यु के बाद हुमायुं ने उनका मकबरा भी दरगाह के अंदर ही बनवा दिया था. आप इस मकबरे को जरूर देखें. इतना ही नहीं दरगाह के अंदर दो बड़े-बड़े कढ़ाहे हैं. इन कढ़ाहों में रात के वक्त बिरियान पकाई जाती है और सुबह उसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है. यह दोनों कढ़ाहे मुगल बादशाह अकबर और जहांगीर ने बनवाए थे. दरगाह के अंदर शाह जहानी मस्जिद मुगल वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है. इसके गुंबद में अल्ला के 99 पवित्र नामों को 33 खूबसूरत छंदों में लिखा गया है. अजमेर शरीफ दरगाह के अंदर बनी हुई अकबर मस्जिद अकबर ने तब बनवाई थी जब जहाँगीर का जन्म हुआ था आज यहां मुस्लिम धर्म के बच्चों को कुरान की तामील प्रदान की जाती है.
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फ़ारसी सूफी संत, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती जो अपने धर्मनिरपेक्ष उपदेश के लिए प्रसिद्ध हैं, यहां विख्यात हैं. कई मुसलमानों का मानना है कि मोइनुद्दीन चिश्ती मुहम्मद के प्रत्यक्ष वंशज थे और यह उनके अनुरोध पर था (मुहम्मद उनके सपने में आए) वह भारत गए थे. वह लाहौर के रास्ते 1192 में अजमेर पहुंचे और 1236 ई में अपनी मृत्यु तक वहीं रहें.
उनके मंदिर का निर्माण मुगल सम्राट हुमायूं ने करवाया था, और दरगाह में प्रवेश करने के लिए, आपको खूबसूरत नक्काशी के साथ चांदी से बने विशाल दरवाजों की एक श्रृंखला से गुजरना होगा. जैसे ही आप आंगन में पहुंचेगे तो आप मोइनुद्दीन चिश्ती के मकबरे के पास आएंगे, जो संगमरमर से खुदी हुई है. इसमें शीर्ष पर सोना चढ़ाना है और इसे चांदी और संगमरमर की स्क्रीन से बनी रेलिंग द्वारा संरक्षित किया गया है.
दरगाह परिसर के अंदर कई मस्जिदें हैं, जिन्हें अकबर और शाहजहां द्वारा बनवाया गया था, सभी को अपने जीवन में साल में कम से कम एक बार अजमेर की यात्रा करने आना चाहिए. यह स्थान एक वास्तुकला चमत्कार है और आपके आध्यात्मिक आत्मा से जुड़ने के लिए एकदम सही है. इस स्थान पर जाने के लिए आपका धार्मिक होना आवश्यक नहीं है. इस जगह की शांति ऐसी चीज है जो आपको कहीं और नहीं मिलेगी.
Ajmer में उर्स पर्व सबसे मुख्य होता है. इस दौरान यहां मेला लगता है और बहुत सारे कार्यक्रम होते हैं. अगर आप को भीड़-भाड़ से परहेज नहीं है तो आप उर्स के दौरान अजमेर जा सकते हैं. यह उर्स इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से रजब माह की पहली से छठवीं तारीख तक मनाया जाता है. आप अगर अजमेर में उर्स के दौरान जा रहे हैं तो अपनी टिकट पहले से बुक करवा लीजिए. क्योंकि इस वक्त अजमेर जाने वाली हर ट्रेन और फ्लाइट लगभग फुल रहती है.
By air : अजमेर एक अच्छी तरह से जुड़ा हुआ शहर है, जिसमें जयपुर हवाई अड्डा सबसे नज़दीक है. अजमेर शरीफ दरगाह तक पहुंचने के लिए आप जयपुर से कैब किराए पर ले सकते हैं.
By train : अगर आप दिल्ली से अजमेर जा रहे हैं तो आपको दिल्ली–अजमेर शताब्दी से बुकिंग करवानी चाहिए क्योंकि यह ट्रेन सुबह 6 बजे चलती हैं और 1 बजे आपको अजमेर उतार देती हैं.
By bus : अजमेर से जयपुर, दिल्ली, जैसलमेर, और जोधपुर जैसे शहरों के लिए नियमित बसें हैं.
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