Ayodhya Tour Guide sugreev kila kanak bhavan mani parvat
Ayodhya Tour Guide: दोस्तों क्या आप जानते हैं अयोध्या में सरयू किनारे (Saryu River) बने घाटों से अलग राम की पैड़ी (Ram ki Paidi) या नया घाट क्यों बनाया गया? प्रभु राम के नगर में देवी सरस्वती की 14 टन की वीणा क्यों रखवाई गई? राम के द्वार पर सुग्रीव किले (Sugreev Kila) और हनुमान गढ़ी (Hanuman Garhi) का इतिहास क्या है… और अयोध्या में वह कौन सा पर्वत है जिसपर मां सीता-प्रभु राम हरियाली तीज के दिन झूला झूलते थे… इस वीडियो में आपको अयोध्या के बारे में दिलचस्प जानकारी मिलने वाली है… पूरा वीडियो ध्यान से देखिएगा और अगर आप हिन्दी में जानकारी से भरे वीडियो देखना चाहते हैं, तो हमारे Youtube Channel पर जरूर जाएं… आइए सफर की शुरुआत करते हैं…
अयोध्या बसी हुई है सरयू नदी के किनारे… सरयू नदी (Sarayu river) को घाघरा नदी (Ghaghara river) भी कहा जाता है… नदी का उद्गम उत्तराखण्ड के बागेश्वर ज़िले (Bageshwar District in Uttarakhand) में है… वहां, इसे काली नदी कहा जाता है…शारदा नदी फिर घाघरा नदी में विलय हो जाती है… निचले भाग में नदी को सरयू के नाम से जाना जाता है… नदी के इसी हिस्से के किनारे ऐतिहासिक व तीर्थ नगर अयोध्या बसा हुआ है…बलिया और छपरा के बीच में इस नदी का विलय गंगा में हो जाता है…
Guptar Ghat, Raj Ghat, Ram Ghat, Lakshman Ghat, Janki Ghat, and Naya Ghat अयोध्या के मुख्य घाट हैं…
यहीं नजदीक है राम की पैड़ी… इसे राम की पैड़ी कहिए या नया घाट कहिए… यहां सरयू की एक धारा को निकालकर आर्टिफिशयल घाट बनाया गया है.. पंप की मदद से सरयू का पानी इस पैड़ी में पहुंचता है और वापस जाकर सरयू में मिल जाता है… अयोध्या में दीपोत्सव की बात हो या कोई भी समारोह, राम की पैड़ी पर ही होते हैं… यहां का पानी भी घुटनों तक है, तो बच्चे भी इसमें मजे से नहा सकते हैं…
सरयू से जो धारा आकर राम की पैड़ी में मिलती है, उसका आवेग बहुत तेज है. इस धारा में भी लोगों का हुजूम नहाने के लिए उमड़ता है…
यहां एम्फिथिएटर, सीढ़ियां भी हैं… तो यहां बैठकर भी पर्यटक शांति का अहसास लेते हैं…
राम की पैड़ी का एक सिरा सरयू घाट के नजदीक है तो दूसरा सिरा है लता मंगेशकर चौक के नजदीक…लता मंगेशकर की 93वीं जयंती के अवसर पर लता मंगेशकर चौक का उद्घाटन किया गया था. अयोध्या के इस चौक पर 40 फीट लम्बी वीणा लगाई गई है, जिसका वजन 14 टन है…इस विशाल वीणा का डिजाइन बनाया है मूर्तिकार राम सुतार (Ram V. Sutar) ने… यहां इसके बारे में जानकारी भी लिखी हुई है…
कांसा एवं स्टेनलेस स्टील से बनी वीणा और इस प्रोजेक्ट पर 7.9 करोड़ रुपये खर्च हुए थे… वीणा पर खूबसूरत डिजाइन की गई है. मां सरस्वती की तस्वीर भी इस पर उकेरी गई है जिसके साथ दो मोर भी बने हैं. यह वीणा लता मंगेशकर के मधुर गायन का संदेश भी देती है… यहां लता जी के स्वर में गाए गीत बजते रहते हैं…
अयोध्या धाम रोड पर लता मंगेशकर चौक से 2 किलोमीटर दूर बुलंदी से खड़ा है सुग्रीव किला… इसी सुग्रीव किले से राम मंदिर के लिए रास्ता जाता है… राम मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले कम ही लोग सुग्रीव किले पर ध्यान देते हैं…
इस प्राचीन किले का निर्माण त्रेतायुग में महाराजा भरत ने भगवान श्री राम के लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापस लौटने के समय भगवान श्री राम के स्वागत के लिए बनवाया था . अयोध्या आने पर भगवान श्री राम ने इस स्थान को महाराजा सुग्रीव को अयोध्या में रहने के लिए के लिए दे दिया था . तभी से यह प्रसिद्ध स्थान सुग्रीव किला के नाम से जाना जाता है आज भी इस स्थान की पौराणिकता पुरातत्व विभाग में दर्ज है…
महाराजा विक्रमादित्य ने इस किले का भी जीर्णोद्धार कराया था…
सुग्रीव किले से 750 मीटर दूर है कनक भवन… कनक भवन अयोध्या में राम जन्म भूमि, रामकोट के उत्तर-पूर्व में है. कनक भवन अयोध्या के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. ऐसा माना जाता है कि माता सीता के साथ विवाह के बाद भगवान राम के मन में विचार आया कि मिथिला से महाराज जनक के वैभव को छोड़कर आने वाली सीता के लिए अयोध्या में भी एक दिव्य महल होना चाहिए…
भगवान राम के मन में यह विचार आते ही अयोध्या में रानी कैकेयी के स्वप्न में एक स्वर्णिम महल दिखाई दिया. इसके बाद रानी कैकेयी ने महाराज दशरथ से अपने स्वप्न के अनुसार एक सुंदर महल बनवाने की इच्छा जाहिर की. रानी कैकेयी की इच्छा के बाद महाराज दशरथ ने देवशिल्पी विश्वकर्मा जी को बुलाकर रानी कैकेयी के कहे अनुसार एक सुंदर महल का निर्माण करवाया. जब माता सीता अयोध्या आईं तब रानी कैकेयी ने उन्हें यह महल मुँह दिखाई में दे दिया था.
द्वापरयुग में भी श्रीकृष्ण अपनी पत्नी रुक्मिणी के साथ अयोध्या आए थे… उन्होंने इसका जीर्णोद्धार भी किया था… आधुनिक भारत के इतिहास में 2000 साल पहले चक्रवर्ती सम्राट महाराजा विक्रमादित्य और समुद्रगुप्त द्वारा भी कनक महल के जीर्णोद्धार की जानकारी मिलती है… वर्तमान में महल का जो स्वरूप है वह 1891 में ओरछा के राजा सवाई महेंद्र प्रताप सिंह की पत्नी महारानी वृषभानु का निर्मित कराया हुआ है…
मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम, माता सीता, अनुजों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न सहित विराजमान हैं.भगवान राम और माता सीता ने स्वर्ण मुकुट पहन रखे हैं। मंदिर की विशेषता है कि यह मंदिर आज भी एक विशाल और अति सुंदर महल के समान प्रतीत होता है. मंदिर का विशाल आँगन इसकी सुंदरता को और भी बढ़ा देता है। मंदिर का एक-एक कोना वैभव और संपन्नता की कहानी कहता है…
कनक भवन से 500 मीटर की दूरी पर है हनुमान गढ़ी… अयोध्या में ये ऐसा मंदिर है जिसमें दर्शन किए बिना रामलाला के दर्शन अधूरे माने जाते हैं. इस मंदिर का नाम है हनुमानगढ़ी. ये वहीं मंदिर है जिसे भगवान राम ने लंका से लौटने के बाद अपने प्रिय भक्त हनुमान को रहने के लिए दिया था…
हनुमानगढ़ी के हीलिए हनुमान चालीसा में लाइन है… राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे…
राम जी ने जब हनुमान जी को ये मंदिर दिया था तब उन्होंने कहा था कि जब भी काई भक्त अयोध्या आएंगे तब वो सबसे पहले हनुमान जी के दर्शन करेंगे. इस बात का वर्णन अथर्ववेद में है.
ये मंदिर अयोध्या शहर के बीचो बीच बना हुआ है और माना जाता है कि हनुमान जी यहां हर वक्त मौजूद रहते हैं. हनुमान जी का ये मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है.
आपको बता दें कि हनुमान जी के दर्शन के लिए भक्तों को 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है. इस मंदिर की सभी दीवारों पर हनुमान चालीसा और चौपाइयां लिखी हुई है.
हनुमान गढ़ी से 300 मीटर से भी कम दूरी पर है दशरथ महल… इन दोनों स्थलों के बीच ढेरों दुकाने हैं जहां से आप खरीदारी कर सकते हैं…
अयोध्या में रामकोट स्थित ‘दशरथ महल’ को आज एक सिद्ध पीठ माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार राजा दशरथ ने त्रेता युग में इस महल की स्थापना की थी.
इस पौराणिक महल का कालांतर में कई बार जीर्णोद्धार भी किया गया. वर्तमान समय में दशरथ महल अब एक पवित्र मंदिर (A holy temple) के रूप में तब्दील हो चुका है.जहां भगवान राम माता सीता लक्ष्मण शत्रुघ्न और भरत की प्रतिमाएं स्थापित हैं…
दशरथ महल से लगभग 4 किलोमीटर दूर है विद्याकुंड (Vidyakund in Ayodhya)…
इस कुंड को लेकर मान्यता है कि प्रभु श्री राम ने अपने भाइयों के साथ गुरु वशिष्ठ से इसी कुंड के किनारे उपदेश ग्रहण किए थे.
विद्याकुंड के नजदीक में है मणि पर्वत…
दोस्तों… ये थी अयोध्या पर दी गई जानकारी… आप इन सभी जगहों को पैदल भी घूम सकते हैं… मणि पर्वत थोड़ा दूर है… आपको वहां के लिए ई-रिक्शा या ऑटो लेना होगा लेकिन बाकी जगहें नजदीक ही हैं… हमारा ये वीडियो आपको कैसा लगा… जरूर बताएं… हमारे दिलचस्प वीडियो देखें Youtube Channel Travel Junoon पर
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