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Holika dahan 2023 : जलती होलिका की परिक्रमा करने से शरीर में होते हैं ये फायदे… वैज्ञानिक महत्व जानें

Holika dahan 2023 :  होलिका दहन, जिसे होलिका दीपक या छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है, हर साल होली से एक दिन पहले पड़ता है. लोग बड़ी होली की एक दिन पहले शाम पर जलाए जाने वाले अलाव बनाने के लिए लकड़ी इकट्ठा करते हैं.

होलिका दहन (संस्कृत: होलिका दाहन, रोमनकृत: होलिका दहन, शाब्दिक रूप से ‘होलिका का दहन’), संस्कृत में होलिका दहनम गाया जाता है, एक हिंदू अवसर है जो एक जलती हुई चिता पर होलिका, एक आसुरी के जलने की कथा का जश्न मनाता है और उसके भतीजे, प्रह्लाद का उद्धार.

वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें अपने पूर्वजों का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद उचित समय पर होली का त्योहार मनाने की शुरूआत की. लेकिन होली के त्योहार की मस्ती इतनी अधिक होती है कि लोग इसके वैज्ञानिक कारणों से अंजान रहते हैं.

होली का त्योहार साल में ऐसे समय पर आता है जब मौसम में बदलाव के कारण लोग उनींदे और आलसी से होते हैं. ठंडे मौसम के गर्म रुख अख्तियार करने के कारण शरीर का कुछ थकान और सुस्ती महसूस करना प्राकृतिक है. शरीर की इस सुस्ती को दूर भगाने के लिए ही लोग फाग के इस मौसम में न केवल जोर से गाते हैं बल्कि बोलते भी थोड़ा जोर से हैं.

इस मौसम में बजाया जाने वाला संगीत भी बेहद तेज होता है. ये सभी बातें मानवीय शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं. इसके अतिरिक्त रंग और अबीर (शुद्ध रूप में) जब शरीर पर डाला जाता है तो इसका उस पर अनोखा प्रभाव होता है.

जलती होलिका की परिक्रमा करने से होते है फायदे || There are benefits of circumambulating the burning Holika

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होली का त्योहार मनाने का एक और वैज्ञानिक कारण है. हालांकि यह होलिका दहन की परंपरा से जुड़ा है. शरद ऋतु की समाप्ति और बसंत ऋतु के आगमन का यह काल पर्यावरण और शरीर में बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ा देता है लेकिन जब होलिका जलाई जाती है तो उससे करीब 145 डिग्री फारेनहाइट तक तापमान बढ़ता है.

परंपरा के अनुसार जब लोग जलती होलिका की परिक्रमा करते हैं तो होलिका से निकलता ताप शरीर और आसपास के पर्यावरण में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है. और इस प्रकार यह शरीर तथा पर्यावरण को स्वच्छ करता है.

दक्षिण भारत में जिस प्रकार होली मनाई जाती है, उससे यह अच्छे स्वस्थ को प्रोत्साहित करती है. होलिका दहन के बाद इस क्षेत्र में लोग होलिका की बुझी आग की राख को माथे पर विभूति के तौर पर लगाते हैं और अच्छे स्वास्थ्य के लिए वे चंदन तथा हरी कोंपलों और आम के वृक्ष के बोर को मिलाकर उसका सेवन करते हैं.

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कुछ वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि रंगों से खेलने से स्वास्थ्य पर इनका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि रंग हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर कई तरीके से असर डालते हैं. पश्चिमी फीजिशियन और डॉक्टरों का मानना है कि एक स्वस्थ शरीर के लिए रंगों का महत्वपूर्ण स्थान है. हमारे शरीर में किसी रंग विशेष की कमी कई बीमारियों को जन्म देती है और जिनका इलाज केवल उस रंग विशेष की आपूर्ति करके ही किया जा सकता है.

होली के मौके पर लोग अपने घरों की भी साफ-सफाई करते हैं जिससे धूल गर्द, मच्छरों और अन्य कीटाणुओं का सफाया हो जाता है. एक साफ-सुथरा घर आमतौर पर उसमें रहने वालों को सुखद अहसास देने के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा भी प्रवाहित करता है.

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