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Matangeshwar Mahadev Temple History: खजुराहो में स्थित मतंगेश्वर मंदिर जिसका इतिहास है जरा हटके

Matangeshwar Mahadev Temple History  : भारत में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं. कुछ प्राचीन काल के हैं तो कुछ आधुनिक दौर के. इस लेख में हम आपको एक दिलचस्प मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. ये मंदिर है मतंगेश्वर महादेव महादेव. ये मंदिर खजुराहो बस स्टैंड से 1 किमी की दूरी पर स्थित है. हम जानेंगे कि मतंगेश्वर मंदिर का इतिहास (Matangeshwar Mandir History) क्या है? मतंगेश्वर मंदिर से जुड़े तथ्य (Matangeshwar Mandir Facts) क्या हैं? और अगर आप मतंगेश्वर मंदिर जाना चाहते हैं, तो कैसे घूम (How to Visit Matangeshwar Mahadev Mandir) सकते हैं…

लक्ष्मण मंदिर के बगल में स्थित है मतंगेश्वर मंदिर || Matangeshwar Temple is situated next to Laxman Temple

मतंगेश्वर मंदिर एक हिंदू मंदिर है, जो भारत के मध्य प्रदेश के खजुराहो में प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर के बगल में स्थित है. यह मंदिरों के पश्चिमी समूह के बीच स्थित है.  खजुराहो के चंदेला-काल के स्मारकों में यह एकमात्र हिंदू मंदिर है जहां भक्त पूजा करने के लिए आते हैं.

चंदेल वंश के शासन काल में हुआ मंदिर का निर्माण || The temple was built during the reign of the Chandela dynasty

मतंगेश्वर के मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के शासक चंद्र देव ने 10वीं शताब्दी के प्रारंभ में करवाया था. राजा भगवान शिव का भक्त था.  भगवान शिव को श्रद्धेय संत मतंग माना जाता है और इसलिए उनका नाम मतंगेश्वर पड़ा.  यह मध्य प्रदेश के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है.

मतंगेश्वर मंदिर में 8 फीट ऊंचा शिवलिंग || 8 feet high Shivling in Matangeshwar temple

इस मंदिर में भारत बहुत बड़ा शिवलिंग है. लिंगम आठ फीट ऊंचा है और चमकदार पीले चूना पत्थर से बना है. ऊपरी दाहिनी ओर एक छोटी गणेश संरचना है, और मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते में दो छोटे सहायक देवताओं के साथ एक देवी की एक विस्तृत तस्वीर स्थापित की गई है.  यह मध्य भारत के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है जो कई भक्तों द्वारा पूजनीय है.

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हर दिन लिंग को दूध, बिल्व के पत्तों और फूलों से स्नान कराकर  भगवान शिव की पूजा की जाती है. इस मंदिर में महाशिवरात्रि बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है.  महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर शिवलिंग को स्नान कराया जाता है, कपड़े पहनाए जाते हैं और दूल्हे की तरह सजाया जाता है.  दूर-दूर से लोग इस मंदिर में प्रार्थना करने और सर्वशक्तिमान का आशीर्वाद लेने के लिए इकट्ठा होते हैं.

मतंगेश्वर महादेव मंदिर इतिहास || Matangeshwar Mahadev Temple History

एक पौराणिक कथा के अनुसार, मतंग नाम के एक ऋषि ने लिंगम के रूप में प्रकट होकर प्रेम के देवता को नियंत्रित किया. उनके आश्रम खजुराहो, केदारनाथ, वाराणसी और गया में स्थित थे. ये अब चार मतंगेश्वर (“मतंग”) मंदिरों के स्थल हैं. एक अन्य लेख में कहा गया है कि मंदिर का नाम शिव के एक पहलू के नाम पर रखा गया है जो प्रेम के देवता को नियंत्रित करता है.

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मतंगेश्वर महादेव मंदिर वास्तुकला || Architecture of Matangeshwar Mahadev Temple

मतंगेश्वर मंदिर योजना और डिजाइन के मामले में ब्रह्मा मंदिर का एक बड़े पैमाने का संस्करण है. इसकी एक चौकोर योजना है.  इसमें 2.5 मीटर ऊंचा शिवलिंग का बेस है, जिसका व्यास 1.1 मीटर है.  लिंगम का आधार 1.2 मीटर ऊचा और 7.6 मीटर व्यास का है. शिवलिंग चमकदार पीले चूना पत्थर से बना है. ऊपरी दाहिनी ओर एक छोटी गणेश संरचना है, और मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते में दो छोटे सहायक देवताओं के साथ एक देवी की एक विस्तृत तस्वीर स्थापित की गई है.

मतंगेश्वर महादेव मंदिर कैसे पहुंचे || How to reach Matangeshwar Mahadev Temple

ट्रेन द्वारा: खजुराहो रेलवे स्टेशन, राजनगर रेलवे स्टेशन.
फ्लाइट द्वारा: निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो हवाई अड्डा.
बस द्वारा: बस स्टॉप से ​​मंदिर की दूरी लगभग 900 मीटर है.

मतंगेश्वर महादेव मंदिर, खजुराहो, मध्य प्रदेश समय || Matangeshwar Mahadev Temple, Khajuraho, Madhya Pradesh Timings

समय: सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक

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