Narayan Sakar Hari Ashram
Narayan Sakar Hari Ashram : मैनपुरी उत्तर प्रदेश का एक जिला है. यह मैनपुरी जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है और आगरा के उत्तर-पूर्व में स्थित है. भारत की राजधानी नई दिल्ली से मैनपुरी की कुल दूरी 270 किलोमीटर की है. मैनपुरी ब्रज क्षेत्र में स्थित है, ये जगह भगवान कृष्ण की मातृभूमि के रूप में हिंदुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है. यहां पर घूमने लायक कहीं जगहें हैं.
हाल में मैनपुरी की चर्चा नारायण साकार हरि के आश्रम के लिए हो रही है. इंटरनेट पर यूजर्स इनसे जुड़े कई सवाल पूछ रहे हैं, जैसे- Narayan Sakar Hari kaun hain? Narayan Sakar Hari ka janmdin kab hai? Narayan sakar hari wikipedia, Narayan sakar Hari photo, Narayan sakar hari biography, Narayan sakar hari caste, Narayan sakar hari net worth, Narayan sakar Hari ke photo Download, Narayan sakar hari ke photo download pdf, नारायण साकार हरि के बचपन के फोटो, आदि. आइए जानते हैं कि मैनपुरी में नारायण साकार हरि का आश्रम (Narayan Sakar Hari Ashram Mainpuri) कहां स्थित है, मैनपुरी में नारायण साकार हरि का आश्रम कब से बना हुआ है, नारायण साकार हरि के कितने भक्त उनसे और इस आश्रम से जुड़े हुए हैं और मैनपुरी का ये नारायण साकार हरि आश्रम कितने बड़े क्षेत्र में फैला है. ये सब हम जानेंगे इस ब्लॉग में…
नारायण साकार हरि का आश्रम मैनपुरी के बिछुवां के राम कुटीर में मौजूद हैं. यह एक आलीशान आश्रम है, यह लगभग 21 बीघे में बना हुआ है. यहां पर बाबा हर मंगलवार को सत्संग करते हैं, जिसमें लाखों की संख्या में भक्त उनका सत्संग सुनने आते हैं .
नारायण साकार हरि मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एटा जिले के बहादुर नगरी गांव के रहने वाले हैं, जहां से उन्होंने अपनी शिक्षा शुरू की. उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने खुफिया विभाग में नौकरी हासिल की और आध्यात्मिकता की ओर रुख करने से पहले लंबे समय तक वहां काम किया. अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू करने के बाद, उन्होंने अपना नाम सूरजपाल से बदलकर नारायण साकार हरि रख लिया और पटियाली गांव में एक आश्रम की स्थापना की.
अन्य आध्यात्मिक नेताओं के विपरीत, नारायण साकार हरि को अक्सर सफ़ेद सूट, टाई और जूते पहने देखा जाता है, कभी-कभी वे पारंपरिक कुर्ता-पायजामा पोशाक चुनते हैं. अपने समागमों के दौरान, साकार हरि खुद बताते हैं कि नौकरी के दौरान उनका मन अक्सर आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित होता था, जिससे उन्हें निस्वार्थ भाव से भक्तों की सेवा करने और अंततः इस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया गया.
Intelligence department में अपने पद से इस्तीफा देने के बाद 1990 के दशक में उन्होंने आध्यात्मिक खोज में पूरी तरह से डूब गए. कुछ सूत्रों का कहना है कि Voluntary Retirement लेने और आध्यात्मिक नेता की भूमिका निभाने से पहले उन्होंने यूपी पुलिस में भी काम किया था, जहां वे प्रवचन देते थे.
विचारधारा और विश्वास के बारे में, नारायण साकार हरि खुद को हरि का शिष्य बताते हैं, अपने प्रवचनों में घोषणा करते हैं कि वह पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं. उनका दावा है कि ब्रह्मा, विष्णु और शंकर ने भी उन्हें अपना गुरु माना है.
स्वयंभू संत भोले बाबा, जिन्हें नारायण साकार हरि के नाम से भी जाना जाता है, अपने भक्तों के सामने अपने बारे में कई दावे करते हैं. बाबा कासगंज के पटियाली गांव के रहने वाले हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस में 18 साल तक सेवा देने के बाद उन्होंने Voluntary Retirement ले ली. बाबा का दावा है कि Voluntary Retirement लेने के बाद उन्हें भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन हुए. उत्तर प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर रहने के दौरान बाबा 28 साल पहले इटावा में तैनात थे.
सूत्रों से पता चलता है कि हाथरस में सत्संग कराने वाले आरोपी बाबा पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. बताया जाता है कि यह सत्संग संत भोले बाबा ने कराया था. संत भोले बाबा का प्रवचन सुनने के लिए हाथरस-एटा सीमा के पास रतिभानपुर स्थित आश्रम में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे.
गौरतलब है कि इंटरनेट के युग में वे अन्य साधु-संतों और कथावाचकों की तरह सोशल मीडिया से दूर रहते हैं. भोले बाबा का किसी भी प्लेटफॉर्म पर कोई आधिकारिक अकाउंट नहीं है.कथित भक्तों का दावा है कि नारायण साकार हरि या भोले बाबा के जमीनी स्तर पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं.
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