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Dharchula Travel Guide : ओम पर्वत , जौलजिबी , चिरकिला डैम घूमिए

धारचूला (dharchula) एक सुंदर शहर है जो उत्‍तराखंड (Uttarakhand) राज्‍य के पिथौरगढ़ (Pithoragarh) जिले में भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित है। इस जगह का नाम हिन्‍दी भाषा के दो शब्‍दों धार और चूला से मिलकर बना हुआ है जिनका मतलब होता है धार यानी की चोटी और चूला यानी की स्‍टोव। ये शहर एक पहाड़ी क्षेत्र है जिसका आकार स्‍टोव के जैसा दिखता है इसी वजह से इस शहर का नाम धारचूला (dharchula) है। ये शहर पिथौरगढ़ से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जो कि पूरी तरह से पहाड़ों से घिरा हुआ है। इस शहर के पश्चिम में बर्फ से ढकी हुई पश्चिमचुली चोटी स्थित है जो कि इस क्षेत्र को जौहर घाटी से अलग करती है। इस शहर में कुछ प्रमुख पर्यटन आकर्षण केंद्र हैं जिनमें मनासा सरोवर या मानस झील भी प्रसिद्ध नाम हैं। धारचूला (dharchula) में सर्दियों में आने का अलग ही मजा है क्योंकि उस वक्त मौसम बहुत आरामदायक होता है और भारी बर्फबारी भी होती है।

कैसे पहुंचे धारचूला? (How to Reach Dharchula)

अगर आप धारचूला जाना चाहते हैं कि इसके लिए सबसे नजदीकी ऐयरपोर्ट पंतनगर है। पर्यटक एयरपोर्ट से टैक्सी के जरिये धारचूला तक जा सकते हैं। वहीं रेल मार्ग से धारचूला का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। यह पिथौरगढ़ से तकरीबन 150 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से धारचूला के लिए बसें बहुत ही आसानी से मिल जाती हैं। इसके अलावा सड़क यात्रा कर भी आप धारचूला पहुंच सकते हैं। ये जगह सड़क मार्ग से अच्छे से जुड़ी हुई है। अलमोड़ा, पिथौरगढ़, काठगोदाम, टनकपुर आदि से बस या टैक्सी से धारचूला पहुंचा जा सकता है।

धारचूला में क्या क्या देखें (Best Tourist Spots in Dharchula)

ओम पर्वत (Om Parvat)

ओम पर्वत 6191 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय पर्वत श्रृंखला के पहाड़ों में से एक है। इस पहाड़ को लिटिल कैलाश, आदि कैलाश, बाबा कैलाश और जोंगलिंगकोंग के नामों से भी जाना जाता है। इस पहाड़ी की एक खासियत ये है की यहां पर बर्फ के बीच में आपको ‘ओम’ या ‘ओम्’ शब्द का पैटर्न मिलेगा कहा जाता है कि इसी कारण इस स्थान का नाम ओम पर्वत पड़ा है।

जौलजिबी (Jauljibi)

धारचूला से सिर्फ 23 किलोमीटर की दूरी पर बसा जौलजिबी गोरी और काली नदियों का संगम स्थल है। ये जगह नेपालियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। हर साल नवंबर में यहां पर कुमाउंनी और नेपालियों द्वारा एक अन्तर्राष्ट्रीय मेले का आयोजन किया जाता है।

काली नदी (Kali Nadi)

काली नदी कालापानी के ग्रेटर हिमालय से निकलती है। ये जगह पिथौरगढ़ जिले में समुद्र स्‍तर से 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर एक मंदिर भी है जिसका नाम नदी के नाम पर ही रखा गया है – काली मंदिर। असल में ये नदी भारत और नेपाल के बीच प्राकृतिक बॉर्डर का काम करती है। वैसे ये नदी भारत के दो राज्‍यों उत्‍तराखंड और उत्‍तर प्रदेश की सीमा पर भी बहती है, उत्‍तर प्रदेश में इस नदी का नाम शारदा नदी है। पर्यटक यहां पर आकर काली नदी के अलग अलग चुनौतीपूर्ण ट्रैक्‍स पर राफ्टिंग का मजा ले सकते हैं।

एस्कॉट कस्तूरी डीयर सैंक्चुरी (Escort Kasturi Deer Sanctuary)

पिथौरागढ़ से 54 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एस्काट कस्तूरी डीयर सैंक्चुरी एक लोकप्रिय पर्यटक स्थान है। एस्काट कस्तूरी की स्थापना कस्तूरी हिरन के संरक्षण के लिए की गई थी।

चिरकिला बांध (Chirkila Dam)

चिरकिला बांध एक हाइड्रो पॉवर प्‍लांट है जो कि धारचूला से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ये बांध काली नदी पर बनाया गया है जो कि 1500 किलोवॉट बिजली उत्‍पन्‍न करता है। पर्यटक यहां पर आकर एक खूबसूरत झील को भी देख सकते हैं जो कि बांध से जुड़ी हुई है।

नारायण आश्रम (Narayan Ashram)

नारायण आश्रम 2734 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक आश्रम है, जो कि उत्तराखंड के पिथौरगढ़ जिले में है। ये नारायण स्वामी के द्वारा साल 1936 में बनवाया गया था। ये पर्यटकों को अपनी तरफ काफी ज्यादा आकर्षित करता है। नारायण आश्रम सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी की वजह से बंद रहता है, वहीं मॉनसून के वक्त में यहां पर पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि सड़कें बंद होती है।

Taranjeet Sikka

एक लेखक, पत्रकार, वक्ता, कलाकार, जो चाहे बुला लें।