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Amarnath Yatra 2018: पेशाब करने वाले लोगों की तस्वीर की सच्चाई क्या है?

हर साल आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होने वाली भगवान अमरनाथ की पवित्र यात्रा (Amarnath Yatra) इस बार भी जोर शोर से पूरी हुई. इस बार यात्रा में 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया. अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) में हालांकि भीषण बारिश और भूस्खलन की वजह से कुछ श्रद्धालुओं को जान गंवानी पड़ी लेकिन यात्रा में शामिल लोगों के उत्साह में इससे कोई कमी नहीं आई. भक्त भोले के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे और देश उनकी सलामती की दुआ करता रहा. इन सबके बीच कथित रूप से कश्मीर से आई तस्वीरों ने पर्यावरण प्रेमियों को चिंता में डाल दिया. इस तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये अमरनाथ यात्रियों (Amarnath Yatra) की तस्वीरें हैं. हालांकि इन्हें लेकर सोशल मीडिया पर तमाम दावों के बीच प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो चुका है.

कश्मीर डायल नाम के पेज से शेयर की गई पोस्ट में लिखा गया कि- इन तस्वीरों को (3 जुलाई 2018) पहलगाम में लिया गया है. जैसा कि आप देख सकते हैं कि यात्री नदी के मुहाने पर पेशाब करते हुए दिखाई दे रहे हैं. ये हमारे मेहमान हैं, इनका स्वागत है लेकिन इन्हें पर्यावरण और इस जगह से जुड़े हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंडों की समझ तो होनी ही चाहिए. ये पानी ग्लेशियर से बहकर आने वाला शुद्ध पानी है और कई लोग इसे पीते भी हैं. इन्हें यहां भेजने से पहले सरकार को इन्हें काउंसल और एजुकेट करना चाहिए. ट्रैवल जुनून कहीं से भी इस पोस्ट में छापी गई तस्वीर की पुष्टि नहीं करता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसी पेज पर कई राष्ट्रविरोधी टिप्पणियां भी प्रेषित की गई हैं. ट्रैवल जुनून कहीं से भी इन पोस्ट्स का समर्थन नहीं करता है. हम सिर्फ सोशल मीडिया में फैल रही इस तस्वीर पर चर्चा चाहते हैं.

इस तस्वीर पर कई तरह की टिप्पणियां भी आ रही हैं. लोग यात्रियों से ऐसा न करने को कह रहे हैं. तस्वीर में यात्री जिस बस के पास खड़े हैं उसका नंबर दिल्ली का दिखाई दे रहा है. हालांकि फिर भी ये संभव है कि किसी ने यात्रियों की आड़ में ऐसी शरारत को अंजाम दिया हो. अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को कथित तौर पर जोड़कर दिखाई जा रही इस तस्वीर में कितनी सच्चाई है ये जांच का विषय है लेकिन हम अपने तमाम पाठकों को ये संदेश देना चाहते हैं कि वे जहां कहीं भी यात्रा पर जाएं गंदगी बिल्कुल न फैलाएं. आखिर कुदरत हम सभी से जुड़ी है और हम सभी उसपर आश्रित हैं. जब खूबसूरती ही नहीं होगी तो पर्यटन और कारोबार कैसे होगा.

इन सबके बीच आइए हम आपको अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) के बारे में जानकारी देते हैं-

पहला पड़ाव- अमरनाथ की पवित्र गुफा के लिए होने वाली यात्रा (Amarnath Yatra) में पहलगाम पहला पड़ाव पड़ता है. पहलगाम राज्य में जम्मू से 315 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह एक मशहूर टूरिस्ट स्पॉट है. यहां की खूबसूरती देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे. पहलगाम तक का रास्ता पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर राज्य पर्यटन केंद्र से सरकारी बस हमेशा उपलब्ध रहती है. यही नहीं, पहलगाम में कई संस्थाएं लंगर का बंदोबस्त भी करके रखती हैं. तीर्थयात्रियों की पैदल यात्रा यहीं से शुरू हो जाती है.

दूसरा पड़ाव- पहलगाम से चलने के बाद यात्रियों के लिए अगला पड़ाव चंदनबाड़ी होता है. यह पहलगाम से 8 किलोमीटर की दूरी पर है. यात्रा की पहली रात यात्री यहीं ठहरते हैं. यहां पर रात्रि निवास के लिए कैंप की व्यवस्था होती है. रात्रि बिताने के बाद यात्री अगले दिन पिस्सू घाटी की चढ़ाई शुरू करते हैं. ऐसा किवदंती है कि पिस्सू घाटी पर ही देवताओं और राक्षसों के बीच भीषण युद्ध हुआ था जिसमें राक्षसों की पराजय हुई थी. लिद्दर नदी के किनारे किनारे से चलकर जाने वाली ये यात्रा ज्यादा कठिन नहीं है.

तीसरा पड़ाव- चंदनबाड़ी से 14 किलोमीटर आगे अगला पड़ाव शेषनाग पड़ता है. यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला है और बेहद खतरनाक है. यहीं आपको पिस्सू घाटी के दर्शन होंगे. पिस्सू घाटी बेहद खतरनाक रास्ता है. यह समुद्रतल से 11,120 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यात्रा में शेषनाग पहुंचने के बाद यात्री तरोताजा महसूस करते हैं. यहां पर्वतों के बीच नीले पानी की बेहद सुंदर झील है. इस झील को देखकर आपको भ्रम हो जाएगा मानों आसमान इस पानी में उतर आया हो. झील डेढ किलोमीटर लंबी है. ऐसी मान्यता है कि शेषनाग का वास इस पानी में है.

Amarnath Yatra

चौथा पड़ाव- शेषनाग से आगे चलकर पंचतरणी आता है जो 8 मील के फासले पर है. रास्ते में यात्रियों को बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे से होकर गुजरना पड़ता है. महागुणास चोटी से पंचतरणी तक पूरा मार्ग ढलान वाला है. यहां 5 छोटी छोटी सरिताएं बहती है. इस जगह के नाम के पीछे यही कारण है. यह स्थान चारों तरफ से पहाड़ों से ढका हुआ है. हां, ऊंचाई है तो ठंड भी होती है. ऑक्सिजन कम होती है इसलिए यात्रियों के लिए स्पेशल इंतजाम होता है.

पांचवा पड़ाव- अब अमरनाथ की पवित्र गुफा की दूरी सिर्फ 8 किलोमीटर रह जाती है. आपको रास्ते में बर्फ ही बर्फ जमी दिखाई देगी. दिन में गुफा के नजदीक पहुंचने वाले यात्री रात में यहीं पड़ाव डालते हैं और अगले दिन सुबह पूजा अर्चना कर पंचतरणी लौटते हैं. हालांकि कुछ यात्री इसी शाम शेषनाग तक वापिस भी पहुंच जाते हैं. यह रास्ता बेहद कठिन है लेकिन जो यात्री इस मुश्किल को पार कर गुफा पहुंचता है, बाबा उसकी सारी थकान दूर कर देते हैं. यहां आपको अद्भुत और चमत्कारिक आनंद की अनुभूति होगी.

अमरनाथ की पवित्र गुफा का महत्व क्यों है
बाबा अमरनाथ की गुफा हिंदू धर्म का एक पवित्र तीर्थस्थल है. कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से 135 किलोमीटर दूर उत्तर पूर्व में यह जगह समुद्र तट से 13,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यह पवित्र गुफा 11 मीटर ऊंची है. अमरनाथ गुफा को हिंदू धर्म में भगवान शिव से जुड़े प्रमुख स्थलों में जोड़ा गया है. अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ भी कहा जाता है. इसे इस नाम से इसलिए पुकारा जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इसी जगह पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था.

अमरनाथ की पवित्र गुफा में हर वर्ष बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्माण होता है. चूंकि यह प्राकृतिक रूप से बर्फ से ही बनता है इसलिए इसे स्व्यंभू हिमानी शिवलिंग के नाम से भी जाना जाता है. हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होने वाली ये यात्रा अगस्त महीने में रक्षाबंधन तक चलती है. पवित्र गुफा की परिधि 150 फीट है और इसमें ऊपर जगह जगह पानी की बूंदे टपकती रहती है. इन्हीं बूदों से एक स्थान पर 10 फीट लंबा शिवलिंग आकार ले लेता है. चंद्रमा ज्यों ज्यों घटता बढ़ता है, शिवलिंग का आकार भी बदलता रहता है. अमावस्या तक यह धीरे धीरे छोटा होता चला जाता है. आश्चर्य की बात ये है कि शिवलिंग ठोस बर्फ का होता है जबकि गुफा में जो बर्फ आपको मिलेगी वो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाएगी. अमरनाथ के शिवलिंग से कुछ फीट दूर भगवान गणेश, भैरव और मां पार्वती के भी अलग अलग हिमखंड हैं.

ऐसा कहा जाता है कि मां पार्वती को इसी गुफा में भगवान शिव ने अमर कथा सुनाई थी. इस गुफा में आज भी भक्तों को कबूरतों का एक सुंदर जोड़ा दिखाई देता है. इन्हें अमर पक्षी कहा जाता है. ऐसा बताया जाता है कि इन्होंने शिव की कथा सुन ली थी.

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