Goa State Museum - the perfect place to understand the culture and history of Goa
Goa State Museum – गोवा स्टेट म्यूजियम जिसे राज्य पुरातत्व संग्रहालय के नाम से भी जाना जाता हैं. पहले ये म्यूजियम पणजी के EDC कॉम्प्लेक्स में पट्टो नाम के स्थान पर स्थित था. लेकिन इससे पहले गोवा स्टेट म्यूजियम को पणजी के सेंट इंगेज में रखा गया था. फिलहाल ये म्यूजियम भारत के गोवा राज्य की राजधानी पणजी में आदिल शाह के महल (पुराने सचिवालय) में स्थित हैं. गोवा राज्य संग्रहालय की स्थापना सन् 1977 में की गई थी. गोवा स्टेट म्यूजियम में प्राचीन समय के इतिहास, कलाकृति, पुरातत्व, शिल्प और भूविज्ञान सहित अन्य विभाग शामिल हैं. साल 2008 तक संग्रहालय में लकड़ी की वस्तुएं, पत्थर की मूर्तिया, चित्रों, पांडुलिपियों, नक्काशी, दुर्लभ सिक्के और मानव-संबंधी वस्तुएं सहित लगभग 8000 कलाकृतियों मौजूद थी.
गोवा स्टेट म्यूजियम के इतिहास पर नजर डालने पर हमें मिलता हैं कि ये संग्रहालय सन् 1973 में गोवा में अभिलेखागार विभाग की पुरातत्व संग्रहालय की इकाई के रूप में निर्मित किया गया था. 29 सितंबर 1977 को म्यूजियम को किराए के भवन में एक छोटे म्यूजियम के रूप में निर्मित किया गया था. लेकिन बाद में एक नए म्यूजियम का निर्माण कराया गया था जिसका उद्घाटन 18 जून 1996 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के द्वारा किया गया था. ये संग्रहालय गोवा की सांस्कृतिक, एतिहासिक और परम्पराओं को अपने आप में समेटे हुए है. गोवा के विभिन्न पहलुओं की जानकरी गोवा स्टेट म्यूजियम से प्राप्त हो जाएगी.
गोवा स्टेट म्यूजियम में 14 गैलरी हैं, जिनको व्यवस्थित ढंग से स्थापित किया गया हैं. मूर्तिकला गैलरी, क्रिश्चियन आर्ट गैलरी, प्रिंटिंग हिस्ट्री गैलरी, सांस्कृतिक नृविज्ञान, समकालीन कला गैलरी, बनर्जी आर्ट गैलरी, धार्मिक अभिव्यक्ति गैलरी, न्यूमिजमाटिक्स गैलरी, गोवा की स्वतंत्रता संग्राम गैलरी, गोवा गैलरी की प्राकृतिक विरासत, पर्यावरण, मेनेजेस ब्रागांजा गैलरी, फर्नीचर गैलरी, विकास गैलरी और भूविज्ञान गैलरी शामिल हैं. गोवा स्टेट म्यूजियम में लगभग 8000 कलाकृतियां हैं, जो कि भारत के विभिन्न हिस्सों का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतीत हो रही हैं. इसके अलावा मेनेजेस ब्रागांजा, कला अकादमी और आर्ट गैलरी से 645 वस्तुओं को उधार लिया गया हैं.
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गोवा स्टेट म्यूजियम में विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां देखने को मिल जाएंगी यहां पर कुछ अलग–अलग गैलरी बनी हुई हैं. आप जब भी गोवा राज्य संग्रहालय जाएं तो इन आर्ट गैलरीयों में घूमना न भूले.
मूर्तिकला गैलरी मुख्य रूप से हिंदू धर्म और जैन धर्म से सम्बंधित मूर्तियों की कलाकृतियों को प्रदर्शित करता है जिनमें चौथी शताब्दी से लेकर आठवीं शताब्दी तक की कांस्य की प्रचीन मूर्तियां शामिल हैं. यहां की प्राचीन मूर्तियों में कुबेर, उमा, यक्ष, नेत्रावली और महिषासुरमर्दिनी की मूर्तियां प्रमुख हैं. दक्षिणी-सिल्हारा काल के दौरान की 2 अविभाजित पत्थर की मूर्तियां हैं, जिनमें से एक कुंडई के दो योद्धाओं की हैं जिनमें से एक को कांतादेव के नाम से जाना जाता हैं, जो पहले नवदुर्गा मंदिर के सामने स्थित था. दूसरा सूर्य जो कि पहले श्री चंद्रेश्वर के परिक्रमात्मक अहम हिस्सा था.
भूतनाथ मंदिर में कांस्य की मूर्तियां भी हैं जो यूरोपीय कलाकृति की प्रति हैं, इनमें क्लाउड और डालॉन भी शामिल हैं. एक ताम्बे की प्लेट पर कदम्बा वंश के राजा विरावर्मा का एक शिलालेख मौजूद हैं.
गोवा स्टेट म्यूजियम में क्रिश्चियन आर्ट गैलरी में संतों की कई प्रकार की लकड़ी की मूर्तियां स्थापित हैं और भक्ति चित्रों के साथ-साथ कुछ लकड़ी के फर्नीचर हैं. जैन बस्ट्स की प्रदर्शनी भी यहां पर मौजूद हैं, सुन्दर नक्काशी के रूप में तीन खूबसूरत डोम जोओ डे कास्त्रो कलाकृतियां लुइस डी कैमोस और अफोंसो डी अल्बुकर्क देखने को मिल जाते हैं. जो पहले म्यूनिसिपल गार्डन की दीवारों पर थे.
गोवा स्टेट म्यूजियम में स्थित बनर्जी आर्ट गैलरी गोवा के पूर्व राज्यपाल एस के बनर्जी द्वारा संग्रहालय को उपहार के रूप में प्रदर्शित की गई है. इस गैलरी का नाम भी उनके नाम पर ही रखा गया है. इस प्रदर्शनी में सिंधु घाटी सभ्यता के टेराकोटा पुरावशेष रखे गए हैं, गंधार स्कूल ऑफ आर्ट की प्लास्टिक की कलाकृति, जनपद की मुहरें, दक्षिण पूर्व एशिया की लकड़ी की छवियां, दक्षिण भारत के कांस्य चित्र. इसके अलावा मुगल पेंटिंग, नाथद्वारा, जयपुर स्कूल, मारवाड़ स्कूल, मेवाड़ स्कूल, उड़ीसा के पटचित्र और राजस्थान के समकालीन कलाकारों के चित्रों की लघु पेंटिंग भी यहां स्थापित हैं.
गोवा स्टेट म्यूजियम में वीरगल या नायक नामक एक पत्थर हैं, जो राजा वीरवार्मा के शासन काल के दौरान का हैं. ये शिलाएं गोपालपट्टनम और होनावार के शासकों के बीच हुई नौसेनिक लड़ाई का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतीत होते हैं. ये पत्थर यहां के स्थानीय सैनिकों की याद में बनवाएं गए हैं, जो सरदार वीरवार्मा की सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे. गोवा स्टेट म्यूजियम में एक वायरल में सात रोवर्स के साथ अक्षीय पतवार (नाव) और एक जहाज को प्रदर्शित किया गया हैं. जबकि एक अन्य वायरल में नौ ऊर छेद और स्टर्न पोस्ट राइडर हैं. जो कि विज्ञान की दिशा में एक ओर सुधार था. यहां की प्रदर्शनियों में प्राचीन काल की महत्वता, बर्तन के कई प्रकार, खेल से सम्बंधित कुछ निशानियां, भार और माप के साधन शामिल हैं. साथ ही साथ गन्ना क्रेन, कोल्हू और खेत के औजार के विभिन्न मॉडल देखने को मिलते हैं.
गोवा स्टेट म्यूजियम की आकर्षित यात्रा के बाद आप यहां के कुछ प्रमुख पर्यटक स्थलों पर घूमने जा सकते हैं, जो कि गोवा राज्य संग्रहालय के नजदीक ही हैं. जैसे कि पर्पल हो-हो, रीस मैगोस किला, गैलरी गीतांजलि, चर्च ऑफ अवर लेडी ऑफ द इमैक्युलेट कॉन्सेप्ट, पंजिम हेरिटेज वॉक, कैसीनो रोयाल, महालक्ष्मी मंदिर, मंडोवी नदी, अपर्णा गोवा सेंटर फॉर द आर्ट्स
अगर आप गोवा स्टेट म्यूजियम घूमने जा रहे हैं, तो ये संग्रहालय शनिवार और रविवार के अलावा हफ्ते के बाकी दिन सुबह 9:30 बजे से शाम के 5:30 बजे तक खुला रहता हैं. तो आप इस समय के दौरान यहां घूमने आ सकते है.
गोवा स्टेट म्यूजियम कैसे पहुंचे
अगर आप गोवा स्टेट म्यूजियम जा रहे है, तो इसके लिए आप किसी भी तरह के साधन से जा सकते हैं 26 किलोमीटर की दूरी पर डाबोलिम एयरपोर्ट है, तो वहीं 22 किलोमीटर की दूरी पर थिविम रेलवे स्टेशन भी है. जहां से आप काफी आसानी से यहां पहुंच सकते हैं.
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