Tianjin City China : कैसा है चीन का तिआनजिन शहर जहां पहुंचे PM मोदी?
Tianjin City China : तिआनजिन उत्तरी चीन का एक प्रमुख शहर और प्रांत-स्तरीय नगरपालिका (Municipality) है. यह हेबेई प्रांत के पूर्व में और उत्तरी चीन के मैदान (North China Plain) के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित है. बीजिंग और शंघाई के बाद, तिआनजिन चीन की तीसरी सबसे बड़ी नगरपालिका है. इसे उत्तर चीन का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र और प्रमुख समुद्री बंदरगाह माना जाता है.
तिआनजिन का शहरी क्षेत्र (Central Tianjin) राजधानी बीजिंग से लगभग 120 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और बोहाई खाड़ी (Yellow Sea का हिस्सा) से लगभग 55 किलोमीटर भीतर स्थित है. बीजिंग और शंघाई की तरह, तिआनजिन भी सीधे चीन की राज्य परिषद (State Council) के अधीन आता है.
‘तिआनजिन ’ का अर्थ है “स्वर्गीय घाट” (Heavenly Ford), यह शहर युआन वंश (1206–1368) से ही एक महत्वपूर्ण व्यापार और परिवहन केंद्र रहा है. 19वीं शताब्दी में यूरोपीय व्यापारियों के आने से पहले ही यह शहर एक अंतरराष्ट्रीय और सांस्कृतिक मेलजोल का केंद्र बन चुका था. बीजिंग का व्यावसायिक द्वार होने और समुद्री व्यापार के कारण यहां बहु-जातीय और नवोन्मेषी समाज विकसित हुआ.
यह शहर अपने हस्तशिल्प, टेराकोटा मूर्तियों, हाथ से बनी लकड़ी की पेंटिंग्स और समुद्री भोजन के लिए विशेष पहचान रखता है.
क्षेत्रफल: 11,760 वर्ग किमी
जनसंख्या (2002): लगभग 49,93,106 (शहर)
जनसंख्या (2010): लगभग 1,29,38,224 (नगरपालिका क्षेत्र)
वर्तमान तिआनजिन का जो इलाका है, वह पहले दलदली और कम आबादी वाला क्षेत्र था. यहां पर बस्तियां बसने की शुरुआत सोंग राजवंश (960–1126) के समय हुई, जब हाइ नदी के पश्चिमी किनारे पर सांचाकोउ (Sanchakou) नामक एक बस्ती स्थापित की गई. इसके बाद जिया और हाइ नदियों के संगम पर झिगु (Zhigu) नामक एक बड़े कस्बे का निर्माण हुआ. झिगु तेजी से एक बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र के रूप में उभरा और मध्य व दक्षिणी चीन से आने वाले अनाज और खाद्यान्नों का प्रमुख भंडारण व वितरण स्थल बन गया.
युआन (मंगोल) राजवंश (1206–1368) के समय झिगु (जिसे उस समय हाइजिन कहा जाता था) की महत्ता और बढ़ गई. सरकार ने यहाँ पर जल-परिवहन और सीमा शुल्क विभाग स्थापित किए तथा गोदाम और बंदरगाह सुविधाओं का विस्तार किया. इसी दौरान हाइ नदी के किनारे नमक उत्पादन केंद्र (Salterns) भी बनाए गए, जिससे शहर एक प्रमुख नमक उत्पादक क्षेत्र बन गया.
मिंग राजवंश (1368–1644) में टियांजिन के आधुनिकीकरण की शुरुआत हुई. जब चीन की राजधानी नानजिंग से बीजिंग शिफ्ट हुई, तब 1404 में इस बस्ती को एक बड़ा सैन्य अड्डा (Garrison Town) बनाया गया और इसका नाम पड़ा तिआनजिन (Heavenly Ford की रक्षा)। यहाँ पर विशाल सैन्य ठिकाना और आयताकार आकार की दीवार बनाई गई। चूंकि यह बीजिंग का मुख्य द्वार बन चुका था, इसलिए शहर की समृद्धि बढ़ी और शानडोंग, जियांगसू और फुजियान प्रांतों से बड़ी संख्या में लोग आकर यहां बस गए.
किंग राजवंश (1644–1911/12) की शुरुआत तक टियांजिन उत्तरी चीन का सबसे प्रमुख आर्थिक केंद्र बन चुका था. इसका कारण था – यह ग्रैंड कैनाल (Da Yunhe) का उत्तरी टर्मिनस था. जैसे-जैसे आंतरिक जलमार्ग बेहतर होते गए, शहर का व्यापारिक महत्व भी तेजी से बढ़ता गया. 17वीं शताब्दी के मध्य में चीन आए पहले डच राजनयिक दूतावास ने शहर की 7.6 मीटर ऊँची दीवार, मंदिरों की अधिकता और बड़े वाणिज्यिक क्षेत्रों की खूब प्रशंसा की.
19वीं शताब्दी के मध्य में टियांजिन की आर्थिक समृद्धि पर असर पड़ा, क्योंकि यूरोपीय शक्तियाँ चीन से लगातार व्यापारिक और कूटनीतिक अधिकार माँग रही थीं। दूसरे अफीम युद्ध (1856–60) के दौरान 1858 में टियांजिन की संधियाँ (Treaties of Tianjin) ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के बीच हुईं. इनके तहत ब्रिटिश और फ्रांसीसी रियायतें (Concessions) टियांजिन में स्थापित हुईं। 1895 से 1902 के बीच जापान, जर्मनी, रूस, ऑस्ट्रिया-हंगरी, इटली और बेल्जियम को भी रियायतें दी गईं.
1860 में जब यहाँ फिर संघर्ष हुआ तो ब्रिटिश और फ्रांसीसी सेनाओं ने टियांजिन पर बमबारी की। इसके बाद बीजिंग की संधि (Convention of Beijing) ने टियांजिन को एक “खुला व्यापारिक बंदरगाह” घोषित किया। लेकिन 1870 में फ्रांसीसी कैथोलिक अनाथालय और गिरजाघर पर हमले के दौरान स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा। फिर 1900 में बॉक्सर विद्रोह के समय विदेशी-विरोधी आंदोलन और बढ़ गया, जिसके चलते पश्चिमी मित्र राष्ट्रों ने शहर पर हमला किया और पुरानी शहर की दीवार को नष्ट कर दिया.
19वीं शताब्दी के अंत तक टियांजिन की जनसंख्या 2 लाख से ऊपर पहुँच चुकी थी. इसमें से आधे लोग पुराने “चीनी शहर” में रहते थे, जबकि यूरोपीय क्वार्टर नदी किनारे और दक्षिण-पूर्व में बने हुए थे। यहाँ का चीनी जीवन स्तर तंग और कठिन था, जबकि यूरोपीय क्षेत्रों में विशाल, व्यवस्थित और आरामदायक जीवनशैली देखने को मिलती थी।
1900 तक टियांजिन एक महत्वपूर्ण महासागरीय शिपिंग केंद्र बन गया। लेकिन 1850 के दशक में ह्वांगहो नदी ने अपना मार्ग बदल लिया और ग्रैंड कैनाल गाद से भर गया, जिससे आंतरिक जल परिवहन सीमित हो गया। इसके बाद हाइ नदी के किनारे शिपिंग का विस्तार हुआ और नदी के मुहाने पर दागू और टांग्गु बंदरगाह सुविधाएँ विकसित की गईं.
नानकाई विश्वविद्यालय (Nankai University)
तिआनजिन विश्वविद्यालय
पॉलीटेक्निक विश्वविद्यालय
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी
एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स
कंसर्वेटरी ऑफ म्यूजिक
मेडिकल यूनिवर्सिटी
नॉर्मल यूनिवर्सिटी
तिआनजिन चीन का एक खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर है, जहां की ठंडी समुद्री हवा, स्वच्छ वातावरण और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरें इसे यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती हैं. यहां आपको प्राचीन मंदिर, चर्च, स्मारक, क्रांतिकारी स्थलों से लेकर आधुनिक गगनचुंबी इमारतें और टेस्टी फूड से सजी गलियां सब कुछ देखने को मिलेगा. तिआनजिन को अक्सर “बिल्डिंग म्यूज़ियम” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां नौ विदेशी औपनिवेशिक शक्तियों ने शासन किया था और उनके बनाए कई अनोखे भवन आज भी शहर की शान हैं. तिआनजिन के 10 सबसे फेमस टूरिस्ट प्लेस के बारे में …
यह सड़क नानकाई ज़िले में स्थित है और क्वीन ऑफ हेवेन मंदिर (Temple of the Queen of Heaven) के इर्द-गिर्द बसी हुई है। यहाँ जेड (jade) की वस्तुएँ, एंटीक सामान, पारंपरिक हस्तशिल्प और खासतौर पर मशहूर निरन झांग पेंटेड स्कल्पचर (Niren Zhang Sculptures) और वेईजी पतंगें (Weiji Kites) बिकती हैं।
इस सड़क की सबसे बड़ी खासियत है कि यहाँ की सभी इमारतें किंग राजवंश (1644–1911) की स्थापत्य शैली की नकल पर बनी हैं।
Go Believe Stuffed Buns (गौ बिलीव बन)
Erduoyan Fried Cakes (कानों की गली वाले ग्लूटिनस केक)
Tea Soup (चाय का सूप)
यह दुनिया का नवां सबसे ऊंचा टीवी टॉवर है. Tianta Lake पर स्थित यह टॉवर तलवार की तरह आकाश को चीरता हुआ नज़र आता है. 814 फीट (248 मीटर) से लेकर 912 फीट (278 मीटर) की ऊँचाई पर बने रेस्टोरेंट में एक साथ 200 से अधिक लोग भोजन कर सकते हैं. यहां से पूरे शहर का बर्ड्स-आई व्यू बेहद शानदार दिखता है.
यह हिस्सा नॉर्दर्न क्यूई राजवंश (550–577 ई.) में बनाया गया था और बीजिंग, टियांजिन, तांगशान और चेंगडे के संगम पर स्थित है। यह चीन की प्राचीन सैन्य इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है.
यहां की खास पहचान है – एट-डायग्राम टाउन (आठ-आकृति का कस्बा), जहां 40 से अधिक गलियाँ मिलकर अष्टभुज आकार बनाती हैं.
ग्रेट वॉल म्यूजियम -जो चीन की दीवार के इतिहास को दर्शाता है.
हर साल मई के मध्य में यहा मैरेथन रेस होती है, जिसमें हज़ारों धावक हिस्सा लेते हैं.
यह म्यूजियम की स्थानीय परंपराओं, संस्कृति और खानपान को प्रदर्शित करता है. यहां पुराने ज़माने की सजाई हुई सड़कों, हस्तशिल्प की दुकानों और पारंपरिक खाद्य बाजारों की झलक मिलती है.
यह पहाड़ी इलाका अपनी अनोखी चट्टानों, घने चीड़ के पेड़ों, साफ़ झरनों और ऊँचे शिखरों के लिए मशहूर है.
शांग पान (Shang Pan) – चीड़ के पेड़ों के लिए फेमस
झोंग पान (Zhong Pan) – अनोखी चट्टानों के लिए फेमस
शिया पान (Xia Pan) – स्वच्छ जलधाराओं के लिए फेमस
यह प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग करने वालों के लिए शानदार जगह है.
वॉटर पार्क का आधे से ज्यादा हिस्सा पानी से ढका हुआ है. यहां 12 छोटे द्वीप हैं, जिन्हें खूबसूरत मेहराबदार पुलों से जोड़ा गया है. झील के किनारे विलो ट्रीज़ और पानी में खिले कमल के फूल इस जगह को बेहद शांत और आकर्षक बनाते हैं. इसके दक्षिणी हिस्से में है टियांजिन ज़ू, जो लगभग 54 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और इसमें 200 से अधिक प्रजातियों के जानवर हैं.
हाईहे नदी को तिआनजिन की आत्मा (Soul of Tianjin) कहा जाता है. नदी किनारे बने पार्क और ऐतिहासिक Wanghailou Church इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं.
1858 में समुद्र के नज़दीक बनाया गया यह किला किंग राजवंश की राजधानी बीजिंग की रक्षा के लिए बनाया गया था। यहाँ घूमते समय आप पास में बने Haimen Bridge और Dagu Beacon भी देख सकते हैं.
तिआनजिन खाने-पीने के शौकीनों का स्वर्ग है, यहाँ आपको चीन की आठ पारंपरिक रसोई शैलियों (Eight Culinary Traditions of China) में से सात का स्वाद मिलता है –शानडोंग, जियांगसु, सिचुआन, आन्हुई, गुआंगडोंग, झेजियांग और हुनान.
1000 साल से अधिक पुराना यह मंदिर अपने विशाल लकड़ी के मंडप और मिट्टी से बनी गुआन-यिन प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है. यह चीन की सबसे पुरानी बहुमंजिला लकड़ी की संरचनाओं में गिना जाता है.
तिआनजिन अपने इतिहास, संस्कृति, आधुनिकता और खानपान की वजह से पर्यटकों के लिए एक यादगार जगह है. यहां की Ancient Cultural Street, Haihe River, Great Wall का हिस्सा, और Food Street इसे यात्रियों के लिए खास बनाते हैं.
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