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Delhi का Tughlaqabad Fort, जिसे निज़ामुद्दीन औलिया के श्राप ने ‘खंडहर’ कर दिया!

Tughlaqabad Fort – तुगलकाबाद किला दिल्ली में एक किला है. जिसे तुगलक वंश के संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक द्वारा 1321 में बनवाया गया था. ग्यास-उद-दीन तुगलक तुगलक वंश के पहले शासक थे और इस विशाल पत्थर के किले-को बनवाने वाले भी. उन्होंने इस किले का निर्माण 1321 ई में किया, तत्कालीन खिलजी शासक को हराने के बाद. लंबी और ढलान वाली दीवारें इस पूरे किले-परिसर के चारों ओर खड़ी हैं. तुगलकाबाद किले की बुलंदी के साथ जो चीज़ खड़ी है, वो है उसकी वीरानी. इस किले के बारे में कहा जाता है कि गयासुद्दीन तुगलक ने इसे जिस ख्वाब से बनाया था, उसके साथ वह इसे आबाद नहीं रख सके. ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी वजह था निजामुद्दीन औलिया का श्राप.

किले की बैरिकेडिंग के लिए बनी दीवारें 15 मीटर तक ऊंची हैं, जिनमें 6 विशाल वॉच टॉवर के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं. 1327 ई में, तुगलक ने इस शानदार किले को त्याग दिया. सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने 1321 में तुगलकाबाद शहर का निर्माण शुरू करवाया था. यह निर्माण काफी तेज गति से हुआ था. सर सैयद अहमद लिखते हैं कि सिर्फ दो साल के अंदर किला बनकर तैयार हो गया.

Tughlaqabad Fort of Delhi, which was ‘ruined’ by the curse of Nizamuddin Auliya!

किले की बनावट

किले की दीवारें काफी मोटी हैं. दक्षिणी दीवारें 40 फीट तक ऊंची हैं. इसमें बीच-बीच में झरोखे हैं जो सैनिकों को तीर चलाने के लिए बनाए गए थे. यहां कई दीवारें 90 फीट तक ऊंची थीं. किले के मध्य में सुल्तान की बैठक थी जिसे जहांनुमा कहते थे. तुगलकाबाद शहर में 56 कोट और 52 दरवाजे थे. हालांकि किले की वर्तमान स्थिति से इन दरवाजों का पता लगाना बहुत मुश्किल है.

सिर्फ 13 दरवाजों की ही जानकारी मिलती है.  दिल्ली दरवाजा, नीमवाला दरवाजा, धोबन दरवाजा (पश्चिम की तरफ ) चकला खाना दरवाजा (उत्तर) भाटी दरवाजा, रावल दरवाजा, बिंडोली दरवाजा (पूर्व ) अंधेरिया दरवाजा, हाथी दरवाजा (दक्षिण की तरफ) खिड़की दरवाजा, होदी दरवाजा, लाल घंटी दरवाजा, तहखाना दरवाजा, तलाकी दरवाजा आदि.

इन दरवाजों के अवशेष आदिलाबाद किले से देखे जा सकते हैं. पिछले वर्षों में यहां अकेले जाने को लेकर भी लोगों में खौफ था. कारण, यहां जानवर घूमते थे. जोसफ डेविड ने इन किले के खंडहरों के आधार पर शहर की इमारत की संरचना करने की कोशिश की और लिखा कि किले में एक तीसरा मकान भी था जो छोटे-छोटे भवनों से घिरा था. तथ्य इशारा करते हैं कि संभवत: यह सुल्तान का निजी भवन था. यहां किले में बड़े मैदान, मस्जिद भी थे. आपको यह जानकर हैरत होगी इसमें भूमिगत अपार्टमेंट भी बने हुए थे. आप यहां जाकर शायद डर जाएं.

इसकी गहराई 30 फीट से ज्यादा थी. अंदर एक शेर मंडल होता था जो किले की सबसे ऊंची जगह होती थी. यहां से पूरे शहर का नजारा दिखाई देता था. यहीं एक सौ फीट से अधिक गहरी बावली भी बनवाई गई थी.

इसके निर्माण पर भारी भरकम राशि एवं श्रम व्यय हुआ. यह इतनी गहरी थी कि पूरे शहर को एकमात्र बावली से पानी की आपूर्ति हो सकती थी, लेकिन पानी खारा होने की वजह से उपयोग में नहीं लाई जा सकी. किले के पास भी एक झील थी जो सैनिकों के लिए बनाई गई थी. हालांकि अब इसके अवशेष नहीं दिखते हैं. किले में कुल सात झील और तीन बावली होती थीं. वर्तमान में सिर्फ दो बावली दिखती है.

निजामुद्दीन औलिया का श्राप (अभिशाप)

गयासुद्दीन तुगलक को एक उदार शासक के रूप में जाना जाता था. जबकि वह अपने सपने में दिखने वाले किलों के बारे कुछ ज्यादा ही उत्साही हुआ करता था. इसी के चलते उसने एक हुक्म भी जारी किया की दिल्ली के सारे मजदूर उसी के किले में काम करेंगे. इससे सूफी संत निजामुद्दीन औलिया काफी क्रोधित हो गये, क्योंकि इस हुक्म के बाद उनके कुएं में किया जा रहा काम रुक गया था.

इसके बाद संत ने अभिशाप का उच्चार किया, जिसका असर इतिहास से लेकर आज भी हमें दिखाई देता है : यारहेयुज्जर, याबसेयगुज्जर इसका अर्थ यह होता है की यहां के लोग यही रहेंगे और यहां केवल गुज्जर राज करेंगे. कहा जाता है की इसके बाद जब सल्तनत का पतन हुआ, तब गुज्जर ने ही इस किले पर कब्जा किया था और आज भी तुगलकाबाद गांव किले की जमीन पर ही बसा हुआ है.

Traveler Tips

आरामदायक और मजबूत जूते पहनें. अगर आप फोटो क्लिक करने के शौकीन है तो आप सुबह के समय वहां जाएं.

Thing to do

इसके तेरह शानदार द्वारों पर एक नजर डालें
ऊपर से इसके परिसर, शाही मकबरे और आसपास की आधुनिक बस्तियों की खूबसूरती का आनंद लें. अच्छी-अच्छी फोटो क्लिक करना मत भूलिए.
विभिन्न सार्वजनिक हॉल, शाही निवास और मार्ग के माध्यम से चलें.
किले के गुप्त भूमिगत मार्ग के बारे में जानें और घूमने के दौरान इसका पता लगाने की कोशिश करें.
अंदर 7 मानव निर्मित वर्षा जल संचयन टैंक (Rainwater harvesting tank) के सभी अवशेष देखें.
शाही परिवार के मकबरे-परिसर का पता लगाने के लिए दक्षिणी दीवारों वाली चौकी की यात्रा करें.

Tughlaqabad Fort Famous For – वास्तुकला, इतिहास, भ्रमण यात्रा, फोटोग्राफी

Tughlaqabad Fort Entrance Ticket – प्रत्येक भारतीय वयस्क के लिए प्रवेश शुल्क 25 रुपए (20 रुपए ऑनलाइन पेमेंट गेटवे) है. विदेशियों (वयस्क) के लिए, तुगलकाबाद किले का प्रवेश शुल्क 100 रुपए है. 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रवेश निःशुल्क है. फोटो खींचने का कोई शुल्क नहीं है.

Tughlaqabad Fort Visiting Times – यह हर दिन सुबह 7 से शाम 5 बजे के बीच पर्यटकों के लिए खुला रहता है.

Tughlaqabad Fort Visit Duration –  2 घंटे आपको घूमने में लगेंगे.

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