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Raja Gangadhar Rao ki Chatri, Jhansi: इतिहास, घूमने का सही समय और इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

Raja Gangadhar Rao ki Chatri, Jhansi : गंगाधर राव की छत्री झांसी शहर का एक ऐतिहासिक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण स्मारक है। यह छत्री झांसी के राजा महाराज गंगाधर राव नेवालकर की स्मृति में बनाई गई थी, जो झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के पति थे। झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी रानी लक्ष्मीबाई ने वर्ष 1853 में उनकी स्मृति में यह छत्री (सेनोटाफ) बनवाई थी। राजा गंगाधर राव की छत्री झांसी में लक्ष्मी तालाब के किनारे, महालक्ष्मी मंदिर के पास स्थित है। यह स्मारक हरे-भरे बगीचे, पास के एक तालाब और समृद्ध वास्तुशिल्पीय डिज़ाइनों से घिरा हुआ है।

गंगाधर राव का शासनकाल || Reign of Gangadhar Rao

गंगाधर राव का शासनकाल 1843 से 1853 तक लगभग एक दशक रहा। यह स्थल आज भी झांसी की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक वैभव का प्रतीक है। मान्यता है कि महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिदिन लक्ष्मी मंदिर दर्शन के लिए आती थीं। यह संरचना चारों ओर से ऊँची दीवारों से घिरी है, जिनके चारों तरफ खोखली नक्काशी और 18वीं सदी की वास्तुकला के सुंदर नमूने देखने को मिलते हैं। इस छत्री को देखने का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है।

राजा गंगाधर राव के बारे में || About King Gangadhar Rao

1838 तक झांसी पर रघुनाथ राव तृतीय का शासन था। उनके शासनकाल में झांसी आर्थिक संकट से जूझ रहा था और राजस्व में लगातार गिरावट आ रही थी, वहीं जनसंख्या की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी। 1843 में राजा गंगाधर राव के शासन में आते ही झांसी के राजस्व में दो गुना वृद्धि हुई और नगर के पुनरुत्थान की शुरुआत हुई।

मणिकर्णिका तांबे से विवाह किया, जो आगे चलकर रानी लक्ष्मीबाई के नाम से प्रसिद्ध हुईं। 1853 में अपने चार माह के पुत्र आनंद राव की मृत्यु के बाद, झांसी को अंग्रेजों की कुदृष्टि से बचाने के लिए उन्होंने अपने चचेरे भाई के पुत्र दामोदर राव को गोद लिया। यह दत्तक ग्रहण एक ब्रिटिश अधिकारी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। हालांकि, राजा की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने अवैध रूप से ‘डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ लागू कर झांसी को अपने अधिकार में ले लिया, जिसके विरुद्ध रानी लक्ष्मीबाई ने स्वराज के लिए संघर्ष किया।

रोचक तथ्य || Interesting Facts

रानी लक्ष्मीबाई द्वारा निर्मित
यह छत्री राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद स्वयं रानी लक्ष्मीबाई ने बनवाई थी।

धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थल
मान्यता है कि रानी लक्ष्मीबाई रोज़ पास स्थित महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन के लिए आती थीं।

खूबसूरत स्थापत्य कला
छत्री चारों ओर से खुली है और दीवारों पर की गई नक्काशी 18वीं सदी की स्थापत्य शैली को दर्शाती है।

लक्ष्मी तालाब के किनारे स्थित
पानी, बगीचे और स्मारक का संयोजन इसे शांत और ध्यानपूर्ण स्थल बनाता है।

झांसी के पुनरुत्थान से जुड़ा इतिहास
राजा गंगाधर राव के शासन में झांसी की अर्थव्यवस्था मज़बूत हुई और राजस्व में दो गुना वृद्धि हुई थी।

1857 की क्रांति से अप्रत्यक्ष संबंध
राजा की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने ‘डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ लागू किया, जिसके विरोध में रानी लक्ष्मीबाई ने ऐतिहासिक संघर्ष किया।

भीड़-भाड़ से दूर स्मारक
झांसी किले की तुलना में यहाँ कम पर्यटक आते हैं, इसलिए यह स्थान शांति पसंद करने वालों के लिए परफेक्ट है।

छतरी और मकबरे से प्रेरणा

छतरी की संरचना मकबरे की वास्तुकला से प्रेरित मानी जाती है। जिस तरह मकबरे मृत व्यक्ति की स्मृति में बनाए जाते हैं, उसी तरह छतरी भी स्मारक के रूप में निर्मित होती है।

  • दोनों में गुंबदाकार संरचना होती है
  • दोनों ही स्मृति और सम्मान का प्रतीक होते हैं
  • फर्क सिर्फ इतना है कि मकबरा आमतौर पर दफ़न स्थल होता है, जबकि छतरी अंतिम संस्कार स्थल की याद में बनाई जाती है

इस कारण छतरी को भारतीय परंपरा में हिंदू शैली का स्मारक मकबरा भी कहा जाता है।

कब जाएं || Best Time to Visit

अक्टूबर से मार्च: यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। मौसम सुहावना रहता है और घूमने में परेशानी नहीं होती।

सर्दियों की सुबह: हल्की धूप के साथ बगीचे और तालाब का दृश्य बेहद सुंदर लगता है।

गर्मियों से बचें (अप्रैल–जून): तेज़ गर्मी के कारण घूमना असुविधाजनक हो सकता है।

मानसून (जुलाई–सितंबर): हरियाली बढ़ जाती है, लेकिन उमस और फिसलन हो सकती है।

राजा गंगाधर राव की छत्री कैसे पहुँचें || How to reach Raja Gangadhar Rao’s Chhatri

राजा गंगाधर राव की छत्री झांसी किले से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस दूरी को टेम्पो, निजी वाहन या ऑटो से लगभग 7 मिनट में तय किया जा सकता है। पर्यावरण की दृष्टि से पैदल जाना भी एक अच्छा ऑप्शन है। झांसी रेलवे स्टेशन किले से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। यह दूरी बस, टेम्पो, रिक्शा या कार से तय की जा सकती है। बस और टेम्पो सबसे किफायती साधन हैं। झांसी का नजदीकी हवाई अड्डा ग्वालियर एयरपोर्ट है, जो शहर से लगभग 103 किलोमीटर दूर स्थित है। एयरपोर्ट से टैक्सी किराए पर ली जा सकती है या पहले से बुक की जा सकती है। रेलवे स्टेशन स्टॉप, तालपुरा स्थित सिटी बस स्टैंड या एलीट चौराहा से बसों की सुविधा उपलब्ध है। झांसी संग्रहालय बस स्टॉप झांसी किले के सबसे नज़दीकी बस स्टॉप है।

Komal Mishra

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