77वें गणतंत्र दिवस पर भारत की सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन, कर्तव्य पथ पर गूंजे ब्रह्मोस से अर्जुन टैंक तक
Republic Day 2026 : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत ने कर्तव्य पथ पर अपनी सैन्य ताकत और स्वदेशी तकनीकी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। राफेल और सुखोई लड़ाकू विमानों की गर्जना से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को दर्शाती हेलिकॉप्टर फॉर्मेशन तक, पूरे परेड ने ‘न्यू इंडिया’ की सशक्त झलक पेश की। इस वर्ष गणतंत्र दिवस की थीम ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ पर आधारित रही, जिसमें ‘वंदे मातरम् के माध्यम से स्वतंत्रता’ और ‘आत्मनिर्भर भारत के जरिए समृद्धि’ को दर्शाती 30 झांकियां शामिल थीं। भारतीय वायुसेना ने लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलिकॉप्टरों के समन्वित फ्लाईपास्ट से समां बांध दिया।
परेड में भारत की अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी, आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा राफेल, सुखोई, आकाश मिसाइल प्रणाली और एंटी-ड्रोन गन भी प्रदर्शित की गईं। इस शक्ति प्रदर्शन को भारत की ओर से संभावित विरोधियों के लिए स्पष्ट संदेश के रूप में देखा गया कि देश की सेनाएं हर चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भारतीय सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित हाई मोबिलिटी रिकॉनिसेंस व्हीकल (HMRV) भी प्रदर्शित किया। महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित और 2023 में शामिल यह बख्तरबंद हल्का वाहन युद्धक्षेत्र निगरानी रडार, ड्रोन सपोर्ट, उन्नत संचार प्रणाली और एंटी-ड्रोन हथियारों से लैस है। इसकी खासियत तेज गति के साथ दुश्मन के गश्ती दलों और बख्तरबंद ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता है।
परेड में टी-90 भीष्म और अर्जुन एमके-1 मुख्य युद्धक टैंकों ने अपनी ताकत दिखाई। इसके साथ नाग मिसाइल सिस्टम ट्रैक्ड एमके-2 भी शामिल रहा। स्पेशल फोर्सेज ने अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रणध्वज टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और ध्वसंकर लाइट स्ट्राइक व्हीकल के जरिए तेज और सटीक कार्रवाई की क्षमता को उजागर किया।
दिव्यास्त्र और शक्तिबाण जैसे आधुनिक आर्टिलरी और सर्विलांस सिस्टम्स ने ड्रोन स्वार्म टेक्नोलॉजी, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी हाइब्रिड यूएवी ‘जोल्ट’ का प्रदर्शन किया। इसके साथ सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल ने भारत की मारक क्षमता को और मजबूत दिखाया।
आकाश मिसाइल सिस्टम और अभ्रा मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम ने भारत की वायु रक्षा शक्ति को रेखांकित किया। डीआरडीओ ने नौसेना की तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विकसित की जा रही लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल की भी झलक दिखाई।
डीआरडीओ की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR ASHM) परेड का सबसे बड़ा आकर्षण रही। यह मिसाइल 1,500 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थिर और गतिशील लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। मैक-10 की गति से उड़ान शुरू करने और औसतन मैक-5 की रफ्तार बनाए रखने वाली यह मिसाइल भारत को हाइपरसोनिक हथियार तकनीक वाले चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है। इसकी बेहद कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़ान दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम है।
कुल मिलाकर, 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य शक्ति का यह प्रदर्शन आत्मनिर्भरता, तकनीकी उन्नति और मजबूत रक्षा संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आया।
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