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Road Accident आरोपी को कितनी सजा होती है

Delhi-Meerut Expressway Accident : मेरठ से खाटू श्याम जा रहे एक ही परिवार के छ लोगों की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई. हादसा एक बस ड्राइवर की लापरवाही से हुआ जो रॉन्ग साइड से बस लेकर आ रहा था. इस बस का कई बार चालान हो चुका था. ड्राइवर 8 किलोमीटर की ड्राइव बचाने के लिए रॉन्ग साइड पर बस को लेकर आया था और मेरठ से एसयूवी 300 में सवार होकर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जा रहे एक ही परिवार के सदस्यों की गाड़ी की बस से टक्कर हो गई. आइए समझते हैं कि आखिर कैसे हादसे में कई मौतों की वजह बनने वाले आरोपी के लिए कानून ने कौन-कौन सी सजा का प्रावधान किया है…

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे हादसा || Delhi-Meerut Expressway accident

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक इलाके में एक निजी बस से टकराने के बाद एक ही परिवार के तीन नाबालिगों सहित छह लोगों की मौत हो गई और दो घायल हो गए.

पुलिस ने बताया कि मृतक मेरठ के धनपुर गांव के रहने वाले थे. पुलिस ने बताया कि महिंद्रा टीयूवी कार में सवार दो घायलों को गंभीर हालत में नोएडा के छिजारसी स्थित एसजेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया. बस के चालक अलीगढ़ जिले के बिजौली निवासी प्रेमपाल को गिरफ्तार कर लिया गया है.
मृतकों की पहचान नरेंद्र यादव (45), उनकी पत्नी अनीता (42), उनके दो बच्चे दीपांशु (17) और हिमांशु (14), नरेंद्र की भाभी बबीता (37) और उनकी बेटी वंशिका (8) के रूप में हुई है. बबीता के पति धर्मेंद्र (40) और बेटा कार्तिक (6) अस्पताल में हैं.

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रामानंद कुशवाह, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, यातायात, गाजियाबाद ने कहा “पहले यह बस नोएडा के एक स्कूल के लिए चलाया करती थी और अब यह एक निजी कंपनी के लिए काम कर रही थी. बस के ड्राइवर को ग़ाज़ीपुर में सीएनजी भरवाने के बाद शिफ्ट कर्मचारियों को लेना था. लेकिन उसने गलत दिशा में, एक्सप्रेसवे के मेरठ से दिल्ली की ओर जाने वाली सड़क पर विजयनगर की ओर गाड़ी चलाना शुरू कर दिया,”

उन्होंने आगे कहा, ‘सुबह करीब 6.30 बजे बहरामपुर राहुल विहार अंडरपास के ऊपर मेरठ से सही दिशा में आ रहे एक चार पहिया वाहन को बस ने जोरदार टक्कर मार दी. हादसा इतना भीषण था कि कार में सवार छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. परिवार अपनी बहन को लेने के लिए मेरठ से गुड़गांव जा रहा था. वहां से उन्हें खाटू श्याम (राजस्थान के सीकर जिले में स्थित मंदिर) के लिए निकलना था.”

बाते दें ड्राइवर के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या के लिए सजा), 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) और 427 (शरारत) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

हिट एंड रन केस में  कितनी सजा मिलती है || How much is the punishment in hit and run case

हिट एंड रन केस उस कहा जाता है जब रोड पर किसी कार की सड़क पर दुर्घटना होती है तो उस दुर्घटना स्थल पर रुके बिना वहां से भाग जाना को हिट एंड रन कहा जाता है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि कार का एक्सिडेंट किसी ऐसी चीज से होता है जो सड़क पर स्थित होती है जैसे फुटपाथ, सड़क पर खड़ी कोई कार या कोई भी ऐसी चीज को वहां अचल रुप से मौजूद हो.

दुर्घटना के बाद अगर आप अपनी पहचान छिपाने के मकसद से यदि आप दुर्घटना स्थल से फरार हो जाते हैं बावजूद इसके कि दुर्घटना स्थल पर किसी को आपकी आपात जरूरत हो.  ऐसे में आरोपी के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है.

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क्या आरोपी बच सकते हैं || Can the accused escape

सबसे पहले आपको बता दें इस तरह के जुर्म में IPC की धारा 299 और 304ए लागू होती है. बात करें धारा 304ए की तो इसमें लापरवाही से मौत की सजा का मामला बनता है. यह धारा हिट एंड रन मामलों पर सीधे लागू होती है. इसमें 2 साल तक की सजा का कानून है. वहीं धारा – 304 के तहत गैर जान-बूझकर हत्या का मामला बनता है जिसमें उम्रकैद या फिर एक तय वक़्त के लिए जेल की सजा का प्रावधान होता है.

 अगर ये हादसा हो तब क्या होगा || What will happen if this accident happens

अब अगर इस तरह का मामला सिर्फ एक हादसा साबित होता है तो इसमें लापरवाह ड्राइवर पर मुक़दमा बनता है न कि गाड़ी में सफर कर रहे अन्य लोगों पर. इसके बाद अगर ड्राइवर ने हादसे के बाद न ही गाड़ी रोकी और न ही पुलिस को जानकारी दी और न ही वह हादसे में शिकार हुए जख्मी को अस्पताल ले गया तो इसमें धारा 134 (ए) और धारा 134(बी) लगेगी.

धारा 134 (ए) और धारा 134(बी) क्या है|| what is section 134(a) and section 134(b)

आईपीसी की धारा 134 (ए) के तहत अगर हादसा होता है तो लापरवाह ड्राइवर का फ़र्ज़ बनता है कि वो सबसे पहले हादसे का शिकार हुए शख्स को इलाज के लिए ले जाए. वहीं अधिनियम की धारा 134(बी) के तहत जिससे एक्सीडेंट हुआ है वो जल्द से जल्द पुलिस को इस मामले की जानकारी दे.

क्या इन मामलों में जमानत मिलती है || Is bail available in these cases

आपको बता दें अगर आरोपियों पर सिर्फ IPC की धारा 304ए के तहत मुकदमा चलाया जाता है तो इन मामलों में आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाएगी क्योंकि यह एक जमानती अपराध माना जाता है. वहीं अगर उनपर धारा 304 के तहत भी मुकदमा लगता है, जो कि गैर-इरादतन हत्या पर लगता है तो ऐसे में जमानत मुश्किल है. ऐसे में आरोपियों को साबित करना होगा कि हत्या के पीछे उनका मकसद नहीं था.

एक्सीडेंट पर क्या है सजा  || what is the punishment for accident

अगर दुर्घटना या हादसा साबित हो जाता है तो IPC की धारा 304ए के तहत 2 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों का कानून है.

 अगर बिना नशे के हादसा हो तो क्या कहता है कानून || What does the law say if an accident happens without intoxication

अगर आरोपी ने किसी किस्म का नशा नहीं किया हुआ है और वो अपने होशो-हवास में हो तब उनपर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होता है.

आपको बता दें कि  हम इंटरनेट से मिली जानकारी के आधार पर ये आर्टिकल लिखा है.

 

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