Indore Clean City – 40 साल पुराने कचरे का पहाड़ तब्दील हुआ एक घने जगंल के रूप में, जानें ये कैसे हुआ

Indore Clean City – इंदौर में पिछले 40 साल से कूड़े का पहाड़ एक जटिल समस्या बना हुआ था. लेकिन साल 2019 में नगर निगम ने इसे हटाने की ठानी और इस दिशा में काम शुरू कर दिया. इसे हटाने में चार महीने लगे इसके बाद लोगों को जहरीली-बदबूदार हवा से मुक्ती मिली. देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड में 13.5 लाख मैट्रिक टन कचरे का पहाड़ था, जिसे निगम ने बायोरेमिडाइजेशन योजना और बायो कल्चर की मदद से खत्म किया. इसके साथ ही सूखे कचरे को प्रोसेस करने के लिए ऑटोमैटिक प्लांट लगाया. अब इससे नगर निगम की कमाई भी हो रही है.

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में 40 साल पुराने कचरे के पहाड़ के दिन भी आखिर बदल ही गए और महज चार महीने में 13 लाख टन बदबूदार भंडार से मुक्ति ही नहीं पा ली गई बल्कि अब उसकी जगह घना जंगल विकसित किया जा रहा है.

40 साल से जमा था कचरा

बता दें कि बायपास रोड पर देवगुराड़िया क्षेत्र के करीब 150 एकड़ में फैले ट्रैंचिंग ग्राउंड में पिछले 40 साल से कचरा जमा किया जा रहा था. साल-दर-साल बढ़ते-बढ़ते वहां करीब 13 लाख टन कचरा जमा हो गया और एक छोटे पहाड़ की शक्ल ले ली. देवगुराड़िया के ट्रैंचिंग ग्राउंड से कचरे का यह पहाड़ हटाने के लिए पिछले साल अगस्त  इसका काम शुरू किया गया. इसके लिए 17 अर्थ मूविंग मशीनें किराये पर ली गईं और आठ-आठ घंटों की दो पालियों में 150-150 मजदूरों की मदद से लगातार चार महीने अभियान चलाया गया.

ट्रैंचिंग ग्राउंड में मशीनों की मदद से कचरे को फैलाकर पहले इसका रासायनिक विधि से उपचार किया गया, ताकि इसमें मौजूद हानिकारक तत्व नष्ट हो जाएं. फिर अलग-अलग ढेर बनाकर इस कचरे के छांटा गया और प्लास्टिक,गत्ता, चमड़ा, धातुओं के टुकड़े आदि सामान कबाड़ियों को बेच दिया गया. कचरे के 13 लाख टन के भण्डार से लगभग चार लाख टन प्लास्टिक निकला.

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कचरे के भंडार को हटाने का काम पिछले महीने पूरा लिया गया और इसमें करीब 10 करोड़ रुपए का खर्च आया है. ट्रैंचिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ के हटते ही लगभग 100 एकड़ जमीन खाली हो गई है, इस जमीन को समतल कर 90 एकड़ क्षेत्र पर हजारों पौधे लगाने की योजना है. यह जगह घने जंगल में तब्दील हो गया. बाकी 10 एकड़ जगह पर बगीचे और बच्चों के खेलने के लिए सुविधाएं विकसित की जाएगी.

इंदौर ( Indore Clean City ) को बड़ी कचरा पेटियों से अब मुक्त हो चुका है. शहर में ट्रैंचिंग ग्राउंड की अवधारणा भी खत्म कर दी है, देवगुराड़िया के ट्रैंचिंग ग्राउंड से कचरे का पहाड़ हटने से नजदीकी इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को दिन-रात उठने वाली बदबू और प्रदूषण से मुक्ति भी मिली है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर से हर दिन करीब 1,100 टन कचरा निकलता है जिसमें करीब 550 टन ठोस वेस्ट शामिल है. लोगों के परिसरों से गीले और सूखे कचरे को करीब 650 वाहनों की मदद से अलग-अलग जमा किया जाता है. फिर शहर भर में फैले केंद्रों में इसका विभिन्न तरीकों से निपटारा किया जाता है.

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निगम के गार्डन अधिकारी कैलाश जोशी के अनुसार ट्रेचिंग ग्राउंड पर बनाए गए सिटी फारेस्ट में बड़, पीपल, शीशम, कचनार, करंज और मोरसली जैसे पौधे लगाए गए हैं. दो साल तक इनकी विशेष देखभाल करना होगी इसके बाद ये खुद ब खुद बढ़ने लगेगें. इसके अलावा सिटी फेॉरेस्ट में बगीचे भी बनाए जा रहे हैं जहां लोग घूमने आ सकेंगे.

Komal Mishra

मैं कोमल... तो चलिए अपनी लेखनी से आपको घुमाती हूं... पहाड़ों की वादियों में और समंदर के किनारे