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पार्वती वैलीः जहां की ‘भांग’ इजरायलियों को भी ‘भोले का भक्त’ बना देती है!

पार्वती वैली (Parvati valley) हिमाचल प्रदेश में स्थित है. ये वैली कई गांवों का समूह है. ये वैली या घाटी दुनिया भर में अपनी गांजे (weed), भांग या चरस की किस्म के लिए चर्चित है. आपको यहां के गांवों में एक अलग संस्कृति दिखाई देगी. यहां गांवों में कैफे हैं जहां विदेशी ट्रैवलर्स, खासकर इजरायली और हिप्पीज आपको मिलेंगे. सच कहें तो पार्वती वैली (Parvati valley) ट्रैवलिंग की एक अलग ही परिभाषा कहती है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भुंतर कस्बे (Bhuntar Town) से पार्वती वैली (Parvati valley) की शुरुआत होती है और यहीं से ये पूर्व की तरफ फैला हुआ. इसका नाम पार्वती पार्वती (Parvati River) और ब्यास नदी (Beas River) के संगम से बना है.

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पार्वती वैली (Parvati valley) के सड़क आपको मलाना गांव (Malana Village) तक लेकर जाती है जो मशहूर टूरिस्ट स्पॉट कसौल (Kasaul) के पास है. ये सड़क मशहूर सिख और हिंदू तीर्थ स्थल मणिकरण (Manikaran) से होकर गुजरती है और ये पुलगा (Pulga) तक जाती है, जहां पार्वती हाइडल प्रोजेक्ट, हाइड्रोइलेक्ट्रिग डैम पूरे लैंडस्केप को डोमिनेट करता है. पुलगा से एक पैदल रास्ता रूद्र-नाग वाटरफॉल के पास बने मंदिर और छोटे से ढाबे तक जाता है. यहां बहता हुआ पानी आपको किसी सांप जैसे आकृति का अहसास कराता है. रूद्र-नाग वाटरफॉल के बाद रास्ता पाइन के फोरेस्ट तक जाता है जो खीरगंगा की स्प्रिच्युअल साइट भी है. माना जाता है कि भगवान शिव ने यहां 3 हजार साल तक तपस्या की थी. खीरगंगा (Kheer Ganga) का पानी हिंदुओं और सिखों के लिए पवित्र माना जाता है. ऐसा कहते हैं कि यहां के जल से कई बीमारियों ठीक हो जाती हैं.

खीरगंगा (Kheer Ganga) से तुंडा भुज गांव (3285m) तक पार्वती वैली पहाड़ों के जरिए से और ऊंचाई पर बढ़ जाती है. घने जंगलों से होकर रास्ता गुजरता है. कई नदियां मुख्य पार्वती नदी (Parvati River) में आकर समाहित होती दिखाई देती हैं और कई झरने आपको जगह जगह दिखाई देंगे. ठाकुर कुआं गांव (3560m) में, Parvati Valley, Dibibokri Nal नदी की घाटी से मिलती है पार्वती नदी (Parvati River) की ही सहायक नदी है. ये रास्ता उत्तर-पूर्व में Dibibokri Glacier और Dibibokri Pyramid तक जाता है जिसकी ऊंचाई 6400m है. ये इलाका अल्पाइन के फूलों के लिए मशहूर है. ठाकुर कुआं गांव से आगे पार्वती वैली (Parvati valley) के रास्ते में Pandupul village (Pandu Pul) आता है जहां दो प्राकृतिक चट्टान के पुल पार्वती नदी (Parvati River) और एक दक्षिणी सहायक नदी को पार करते हैं. किवदंती के अनुसार इन पुलों को पांडवों ने अपनी अथाह शक्ति से निर्मित किया था.

पांडुपुलस से, पार्वती वैली (Parvati valley) की आगे की चढ़ाई पर विस्तृत घाटी धीरे-धीरे Mantalai Lake (4100m) की पवित्र जगह पहुंचती है जो पार्वती नदी (Parvati River) का उद्गम स्थल भी है. Mantalai Lake (4100m) से पूर्व की तरफ बढ़ते हुए Pin Parvati Pass (5319m) को क्रॉस करना होता है जो Pin Valley National Park में है और ये रास्ता आपको लाहौल स्पीति (Lahaul Spiti District) जिले के Mudh village में लेकर जाता है. पार्वती वैली (Parvati valley) के ट्रैकिंग रूट भी ट्रैकर्स और टूरिस्ट के लिए एक पॉपुलर डेस्टिनेशन है

अलग अलग तरह का गांजा (weed), भांग या चरस जो पार्वती वैली में मिलता हैः

भारत में गांजे का इतिहास 2 हजार साल से भी पुराना है. इतिहास से होकर वर्तमान में पहुंची गांजे की इस चमक को आप पार्वती वैली (Parvati valley) में शानदार तरीके से देख सकते हैं. यहां न सिर्फ गांवों में हर घर इसकी खेती करते हैं बल्कि अनोखे तरीके से उसे बनाया भी जाता है. Parvati valley में आपको मलाना क्रीम (MALANA cream) मिलेगी, जिसके लिए इजरायली टूरिस्ट के साथ साथ यहां आने वाले सभी लोग दीवाने रहते हैं लेकिन यहां गांजे का सिर्फ एक ही रूप नहीं है. यहां अलग अलग प्रकार के गांजे आपको मिलेंगे. पहाड़ों में गांजे के बीच को फूड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. आइए इसकी और किस्में के बारे में जानते हैं.

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1. रसौल क्रीम (Rasol Cream): कसोल से 3 घंटे की ट्रैकिंग के बाद आप एक छोटे से गांव रसोल पहुंचेंगे. रसोल क्रीम की क्वटलिटी की बड़ी वजह 10 फीट की ऊंचाई पर इसकी खेती होना है. अंदर से इसका टेक्सचर रेडिश होता है और इसकी खुशबू किसी कच्चे आम जैसी होती है. गांजा या चरस हाईली ऑयल कंटेट होता है और टेस्ट में मिट जैसा होता है. अगर आप अपने हाथ में किसी रसोल क्रीम को रखेंगे तो निश्चित ही इससे प्यार कर बैठेंगे.

2. टोश बॉल (Tosh ball): टोश कसोल से 21 किलोमीटर दूरी पर है. ये बैगपैकर्स का फेवरिट डेस्टिनेशन है जो पूरे साल यहां आते रहते हैं. आप यहां फेमश टोश बॉल को पाएंगे जो चरस या गांजे का ही एक रूप है. यह किसी गेंद के आकार की होती है. टोश बॉल बाहर से प्रिटी ब्लैक होती हैं और इनका टेक्सचर ब्राउन होता है. इसका एरोमा बेहद स्पाइसी होता है और टेस्ट में भी ये स्पाइसी होती है. गले में ये थोड़ी हार्श लगती है. इस गांजे की पोटेंसी कम होती है लेकिन यह आपको एक हैप्पी हाई देता है.

3. ग्राहम क्रीम (Grahan Cream): पार्वती वैली का छिपा हुआ खजाना ग्राहम क्रीम है. यह आपको ग्राहम विलेज में मिलेगा जो 8000 फीट की ऊंचाई पर है. इस गांव तक का ट्रैक बेहद स्टीप है और कसोल से यहां पहुंचने में आपको 5 घंटे लगेंगे. यहां की चरस में आपको बाहर से ब्लैक ग्रीनिश टेक्सचर दिखाई देगा लेकिन अंदर से निश्चित ही ये ग्रीन होती है. इसकी एक प्रभावशाली मीठी सुगंध होती है जो मलाना क्रीम (MALANA cream) जैसी ही होती है. एक बार इसे लेने के बाद आप निश्चित ही बेकरार हो उठेंगे.

4. नगारू क्रीम (Nagaru Cream): मैं शर्त लगा सकता हूं कि बहुत ही कम लोगों ने इसके बारे में सुना होगा और इसे स्मोक करने वाले तो गिनती भर के ही होंगे. नगारू हिल तक पहुंचने के लिए ग्राहम से 2 दिन का ट्रैक करना पड़ता है. इसके लिए आपको प्रोफेश्नल्स हेल्प चाहिए होती है. नगारू की ऊंचाई 12500 फीट है और यहीं पर नगारू हिल्स की चरस पैदा होती है. बाहर से इसका टेक्सचर ग्रीन यलोइश होता है और अंदर से थोड़े हरे रंग के साथ यह गोल्डन होती है. ये गांजा प्रभावशाली होता है और इसमें भारी मात्रा में ऑयल कंटेट छुपा होता है और इस वजह से यह सख्त भी होता है.

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5. वेचिन वैली (Waichin Cream): कसोल जाने वालों के लिए ये घाटी कोई अनोखा नाम नहीं है. वेचिन क्रीम का लश ग्रीन टेक्सचर होता है और अंदर से यह ब्लैक होती है लेकिन यह मलाना क्रीम (MALANA cream) की तरह स्ट्रेच नहीं होती है. यही चीज आपको दोनों के बीच अंतर की वजह बता देगी. यह गले में बेहद हल्की सी लगती है और टेस्ट में मिंट जैसी होती है. स्मोक करने पर यह आखिरी में एक मिठास छोड़कर जाती है.

(डिस्क्लेमरः इस लेख के जरिए हम कहीं से भी भांग, चरस या गांजे को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं. हमारा मकसद सिर्फ एक जानकारी को साझा करना भर है जिसके लिए ट्रैवलर्स पार्वती वैली जाते हैं. इसे सिर्फ एक जानकारी के तौर पर लिया जाए. ट्रैवल जुनून किसी भी तरह के नशीले पदार्थ के सेवन के खिलाफ है.)

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