Kotana Village in Baghpat : उत्तर प्रदेश के बागपत का गांव कोताना, जहां से है परवेज़ मुशर्रफ और बेगम समरू का संबंध
Kotana Village in Baghpat : नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको बताएंगे Uttar Pradesh के Baghpat जिले में स्थित Kotana village के बारे में, ये गांव Pakistan के पूर्व राष्ट्रपति रहे Pervez Musharraf के परिवार का गांव है. उनके परिवार का संबंध इसी गांव से है. हालांकि Pervez Musharraf कभी भी इस गांव में नहीं आए थे. हां, उनकी मां इस कोताना गांव में आई थी और वो भी दुल्हन के रूप में. Baghpat का कोताना गांव दो अलग-अलग दौर की बेहद चर्चित ऐतिहासिक हस्तियों से जुड़ता है. 18वीं सदी में यही गांव बेगम समरू के शुरुआती जीवन से जुड़ा था, जबकि करीब दो सौ साल बाद यही गांव Pakistan के पूर्व राष्ट्रपति Pervez Musharraf के पैतृक परिवार और उनकी छोड़ी हुई संपत्ति के कारण चर्चा में आया.
Baghpat के बड़ौत से कुछ किलोमीटर दूर बसा Kotana आज भले ही एक आम गांव दिखाई देता हो, लेकिन इसकी मिट्टी ने इतिहास के दो बिल्कुल अलग चेहरों को देखा है. एक तरफ 18वीं सदी की वह लड़की फरजाना, जो इसी इलाके से निकलकर सरधना की ताकतवर शासक Begum Samru बनी. और दूसरी तरफ 20वीं सदी का वह परिवार, जिसकी इसी गांव में मौजूद हवेली और जमीन का रिश्ता आगे चलकर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति Pervez Musharraf तक पहुंचा.
यानी कोताना की कहानी सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि Delhi, Mughal court, Sardhana, औपनिवेशिक दौर, विभाजन और India-Pakistan के इतिहास को जोड़ने वाली कहानी है.
इस Kotana village में आपको कई ऐतिहासिक धरोहरें दिखाई देती हैं, पुराने मकानों में लाखौरी ईंटों का इस्तेमाल हुआ है, आप उसे भी देख सकते हैं. मंडी नाम का एक स्थल है जिसे आज विद्यालय में तब्दील कर दिया गया है, वहां कभी बहुत बड़ी मंडी लगा करती थी… दूर दूर से किसान और कारोबारी यहां आते थे. बात तबकी है जब कोताना बड़ौत से भी बड़ा नगर हुआ करता था.
इस गांव के बारे में एक जानकारी और मिलती है, वो ये कि इसी गांव में Begum Samru का जन्म भी हुआ था. Begum Samru का नाम तब Farzan Jebunnisa हुआ करता था. वो यहां से निकलकर Delhi के कोठों तक पहुंची, फिर भाड़े के सैनिक सोम्ब्रे से शादी की और बाद में कैथलिक बन गई. सरधना में मुगलों ने उन्हें जागीर दी थी. आज भी वहां का चर्च इतिहास की गवाही देता है. हमने बेगम समरू और कोताना गांव दोनों पर व्लॉग और Documentary बना रखी हैं, आप हमारे Youtube चैनल पर जाकर उसे देख सकते हैं.
आज Kotana एक कस्बे का रूप ले चुका है. लेकिन यही वो जगह है जहां से Pervez Musharraf की जड़े जुड़ी हुई हैं. हालांकि उनका जन्म Delhi में नाहर वाली हवेली में हुआ था जो Daryaganj में स्थित है और उस हवेली को उनके नाना ने खरीदा था और अपने जन्म के 4 साल बाद ही जब बंटवारा होता है उससे ठीक पहले वो अपने परिवार के साथ पाकिस्तान चले गए थे। तो वो इस गांव में नहीं आए हैं एक तरह से. लेकिन उनकी जो जड़े हैं, पिताजी और माताजी इसी गांव में दुल्हन बन के आई थी उनकी मां और काफी रिच काफी रिच फैमिली थी उनकी. काफी एजुकेटेड फैमिली थी उनकी.
मुशर्रफ की मां ने उस जमाने में दिल्ली के Indraprastha College से इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन की थी। फिर Lucknow में उन्होंने अपनी जो एमए की डिग्री है वो हासिल की थी. तो काफी एजुकेटेड फैमिली थी Pervez Musharraf की. उनके पिताजी जो थे वो फॉरेन विभाग में कार्यरत थे। उनके दादा टैक्स कलेक्टर थे ब्रिटिश गवर्नमेंट में और नाना उनके जज हुआ करते थे.. तो ये एक फैमिली एक इंफॉर्मेशन है उनके बारे में और इसी विरासत को लेकर फिर वो आगे बढ़े और उन्होंने फिर बायोग्राफी भी लिखी अपनी और मैं अभी जहां खड़ा हूं यहीं पर वो भव्य हवेली हुआ करती थी जहां कभी उनकी मदद दुल्हन बनकर आई थी.
मुशर्रफ के परिवार की हवेली में दो-तीन गेट थे। तो ये टूटी हुई खंडहर नुमा ही थी सालों से… अब पड़ोसियों ने इसे खरीद लिया है. मुशर्रफ के ताऊ के बेटे हुमायूं आते थे तो वे पड़ोस के घर में ही बैठते थे.
2001 में मुशर्रफ आए थे तब दिल्ली आए थे नहर वाली हवेली लेकिन नहर वाली हवेली बिक गई थी। उसका आधा हिस्सा टूट चुका था. आज तो हवेली नहीं है.
कोताना वर्तमान बागपत जिले की बड़ौत तहसील में स्थित है. आज यह पश्चिमी Uttar Pradesh के किसी दूसरे गांव जैसा ही दिखाई देता है, लेकिन 18वीं से 20वीं शताब्दी तक की कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कहानियों से इसका संबंध सामने आता है.
Begum Samru का मूल नाम फरजाना था. उपलब्ध शोधों में उनके जन्मस्थान के रूप में कोताना का उल्लेख मिलता है. एक पुरातत्व संबंधी अकादमिक प्रकाशन में भी फरजाना के जन्म को मेरठ के पास स्थित कोताना से जोड़ा गया है और उनके पारिवारिक मूल को लेकर कश्मीरी या सैयद/अरब मूल की अलग-अलग परंपराओं का उल्लेख किया गया है.
स्थानीय और क्षेत्रीय ऐतिहासिक स्रोतों में उनके पिता का नाम लतीफ खां या लुत्फ अली खां बताया जाता है. अमर उजाला के अनुसार, फरजाना का जन्म कोताना में लतीफ खां के परिवार में हुआ था.
कहा जाता है कि पिता की मृत्यु के बाद फरजाना और उनकी मां को परिवार में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. इसके बाद दोनों दिल्ली चली गईं. दिल्ली के चावड़ी बाजार के माहौल में Farzana ने नृत्य और संगीत की शिक्षा हासिल की और आगे चलकर तवायफ के रूप में पहचानी जाने लगीं.
यहीं उनकी मुलाकात यूरोपीय सैनिक और भाड़े की सेना के Commander Walter Reinhardtसे हुई, जिन्हें India में समरू, सोमरू या सॉम्ब्रे जैसे नामों से जाना गया.
वाल्टर रेनहार्ड्ट की उम्र फरजाना से काफी अधिक थी. दोनों का संबंध बना और फरजाना उनके साथ रहने लगीं. बाद में वही फरजाना इतिहास में “Begum Samru” के नाम से प्रसिद्ध हुईं.
यही Begum Samru की कहानी को असाधारण बनाता है. Walter Reinhardt की 1778 में मृत्यु के बाद उनकी सैन्य टुकड़ी और सरधना की जागीर का नियंत्रण फरजाना के हाथ में आया. इसके बाद उन्होंने केवल एक जागीरदार की विधवा के रूप में जीवन नहीं बिताया, बल्कि स्वयं एक प्रभावशाली राजनीतिक और सैन्य शक्ति बन गईं.
उन्होंने अपनी सेना का नेतृत्व किया, Mughal court के साथ संबंध बनाए रखे और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी सत्ता को बनाए रखा. उनका शासन सरधना केंद्रित था और वे 1778 से 1836 तक इस क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में रहीं.
बाद में उन्होंने Catholicism स्वीकार किया और उनका नामJoana Nobilis Sombre रखा गया. इसके बावजूद आम लोगों के बीच वह बेगम समरू के नाम से ही प्रसिद्ध रहीं. आज सरधना में उनसे जुड़ी सबसे शानदार विरासत Basilica of Our Lady of Graces है, जिसे उन्होंने बनवाया था. उनकी मृत्यु 1836 में सरधना में हुई और वहीं उनका मकबरा है.
Kotana से उनका रिश्ता केवल जन्म तक सीमित नहीं था. Begum Samru के Kotanaसे संबंध की एक दिलचस्प बात यह है कि बाद के वर्षों में भी उनका इस क्षेत्र से जुड़ाव बना रहा. क्षेत्रीय शोध के आधार पर बड़ौत में मौजूद वर्तमान कोतवाली की जगह को बेगम समरू के दौर की अदालत से जोड़ा जाता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अपने शासन के दौरान वह अपने इलाके के अलग-अलग हिस्सों में अदालत लगाती थीं और लोगों की शिकायतें सुनती थीं.
इसलिए Kotana -बड़ौत क्षेत्र की कहानी में बेगम समरू सिर्फ “यहां जन्मी एक ऐतिहासिक महिला” नहीं हैं. उनके जीवन की राजनीतिक गतिविधियों का प्रभाव भी इस पूरे इलाके तक पहुंचा था.
यह कहानी करीब दो शताब्दियों बाद की है. पाकिस्तान केFormer President General Pervez Musharraf का पैतृक संबंध Kotana से था. उनके पिता Syed Musharrafuddin और माता जरीन बेगम का संबंध इसी गांव से बताया गया है, स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार दोनों की शादी भी कोताना में हुई थी.
Pervez Musharraf का जन्म कोताना में नहीं हुआ था. उनका जन्म 1943 में दिल्ली के Daryaganjइलाके में हुआ था. बाद में उनका परिवार Kotana से Delhi चला गया. 1947 में भारत के विभाजन के बाद परिवार पाकिस्तान चला गया लेकिन परिवार की संपत्ति का संबंध कोताना से बना रहा.
Kotana में मुशर्रफ परिवार की एक हवेली और कृषि भूमि होने की बात कई स्थानीय रिपोर्टों में सामने आई है. स्थानीय लोगों ने पत्रकारों को बताया कि गांव में एक तरफ मुशर्रफ के पिता की हवेली और दूसरी तरफ उनके चाचा की संपत्ति हुआ करती थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुशर्रफ के चाचा हुमायूं कोताना में लंबे समय तक रहे थे. बाद में उन्होंने अपनी जमीन स्थानी य लोगों को बेच दी.
यहां एक और महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. 2024 में जिस जमीन की नीलामी हुई, वह सीधे Pervez Musharraf के नाम की जमीन नहीं थी. बड़ौत के तत्कालीन एसडीएम ने स्पष्ट किया था कि जमीन मुशर्रफ की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं थी, बल्कि उनके परिवार/पूर्वजों से जुड़ी संपत्ति थी.
2024 में Kotana की लगभग 13 बीघा जमीन चर्चा में तब आई जब इसे “शत्रु संपत्ति” के रूप में ई-नीलामी के लिए रखा गया. यह जमीन उस परिवार से जुड़ी थी जो विभाजन के बाद Pakistanचला गया था. रिपोर्टों के अनुसार, इसे सरकारी रिकॉर्ड में शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था. सितंबर 2024 में इस जमीन की नीलामी हुई और लगभग 1.38 करोड़ रुपये में इसे खरीदा गया. इससे Kotana एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में आया.
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