लहसुन के फायदे ही नहीं, उसका इतिहास भी जादुई है | भारत से पहुंचा इस्लामिक देशों में…

लहसुन के फायदे के बारे में हम और आप कई बातें जानते होंगे. स्वास्थ्य की दृष्टि से इसे बेहद लाभदायक माना गया है. खाद्य को स्वादिष्ट बनाने में इस्तेमाल होने वाला लहसुन (Garlic) दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात मसाला पौधा है जो दुनिया भर में कई सभ्यताओं की पाक परंपरा में खुद को विकसित करने में कामयाब रहा है. लहसुन ने अपनी यात्रा मध्य एशिया से शुरू की थी, नवपाषाण काल के दौरान इसे घरेलू इस्तेमाल में लाया गया और 3000 ईसा पूर्व में यह मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका में फैल गया, जिसने इसे शीघ्र ही यूरोप तक पहुंचने में सक्षम बनाया. इसके अनूठे पोषण मूल्य और औषधीय लाभ की वजह से इस पौधे को प्रकृति के सबसे अनमोल तोहफे के रूप में पहचाना जाने लगा. इसे वर्तमान में लहसुन के प्रकारों की व्यापक श्रेणियों में विकसित किया गया जो आज दुनिया भर में उपयोग किए जा रहे हैं.

हमारे इतिहास में लहसुन की यात्रा अतुलनीय रही है और इसने हर प्रमुख सभ्यता को छुआ है लेकिन इसकी वास्तविक उत्पत्ति पश्चिम और मध्य एशिया में रही है. इसके जंगली पौधे को जिसे एलीयम लॉन्गिकुस्पिस कहा जाता है, उसने सहस्राब्दियों के लिए खुद को विकसित कर लिया था और अंततः यह आधुनिक एलियम सैटिवूम या लहसुन के रूप में सामने आया.

प्राचीनकाल में इस पौधे की पहचान भारतीयों द्वारा की गई थी जो इसे लगभग 6 हजार साल पहले बनाए रखने में कामयाब रहे थे, जिसमें उनके प्रसिद्ध संस्कृति में अपने स्वाद (विशेषकर उनके कामोत्तेजक शक्तियों में विश्वास) और औषधीय गुण शामिल थे. लगभग 3000 ईसा पूर्व, भारत का व्यापारिक दल मध्य पूर्व पहुंचा था, जहां उन्होंने शक्तिशाली बेबीलोन और अश्शूरियन साम्राज्यों का लहसुन से परिचय कराया. मध्य पूर्व में इस पौधे को तेजी से अपनाया गया और यहां से यह पड़ोसी सभ्यताओं में फैला.
लहसुन पर प्राचीन काल के सबसे उल्लेखनीय रिकॉर्ड मिस्र से मिलते हैं, जहां लहसुन नियमित रूप से दोनों संभ्रांत लोगों, आम लोगों और दासों द्वारा भोजन का मसाला, औषधीय इंग्रीडिएंट, धार्मिक इंग्रीडिएंट (वे मानते हैं कि यह जीवन को लंबा कर सकता है), एंटीसेप्टिक, घावों का इलाज करने और गैंगरेन को रोकने के लिए नियमित रूप से उपयोग किया जाता था और साथ में ऊर्जा के प्रत्यक्ष स्रोत के रूप में भी वह इसे इस्तेमाल करते थे.

पुरातत्वविद् और इतिहासकारों द्वारा पाए गए अभिलेखों में पाया गया है कि मिस्र के राजघराने उन दासों को लहसुन का सेवन कराते थे जो पिरामिड बनाने का काम करते थे. ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि दासों में अधिक ताकत आ सके.
प्रसिद्ध फारोह टूटनखामेन की कब्र के अंदर, लहसुन को केवल विभिन्न मिट्टी के बर्तनों में नहीं रखा गया था, बल्कि उनमें से कई लहसुन बल्ब के आकार में तैयार किए गए थे. प्राचीन ग्रीस और रोम ने लहसुन की प्रसिद्धी को और बढ़ाने का काम किया. उस समय तक लगभग सभी चीजों के लिए लहसुन का उपयोग किया गया था- खाद्य पदार्थों से लेकर औषधीय रूप में और धार्मिक इस्तेमाल से लेकर अंधविश्वासी अनुष्ठानों तक के लिए.

उन्होंने दावा किया कि लहसुन बिच्छुओं को दूर कर सकता है, कुत्ते के काटने का इलाज कर सकता है. इसके साथ ही अस्थमा का इलाज और कुष्ठ रोग से रक्षा भी कर सकता है. अगर घर के प्रवेश द्वार के ऊपर इसे टांगा जाता है तो  फांसी लगाई जाती है तो यह चेचक फैलने से भी रोकता है.
वहीं, एशिया में भी लहसुन को एक खाद्य मसाला पौधे की तुलना में चिकित्सा सामग्री के रूप में अधिक देखा जाता था. लहसुन को औषधीय पौधे के रूप में अधिक देखने वाली संस्कृतियों में से एक बौद्ध भी थे, जो ईसा पूर्व पहली से 10वीं सदी के बीच लहसुन के सेवन से परहेज करते रहे थे. आज, लहसुन अदरक और प्याज के साथ, दक्षिण एशिया में सबसे लोकप्रिय स्वाद का नेतृत्व करता है.

लहसुन के इतिहास के सबसे प्रभावशाली क्षणों में से एक मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में मुस्लिम शासन के विस्तार के दौरान का वक्त था. इसने लहसुन को मध्य और पश्चिमी यूरोप में फैलाना शुरू किया जहां इसे उत्कृष्ट चिकित्सा उपाय के रूप में स्वीकार किया गया. 1660 के दौरान की चिकित्सीय पुस्तकों में इसे प्लेग और चेचक के लिए एक उत्कृष्ट इलाज बताया गया है.

अधिक जानने वाली बात ये है कि प्रसिद्ध रसायन और सूक्ष्म जीवविज्ञानियों ने 1858 में ये साबित किया कि लहसुन रोगाणुओं को मारने में सक्षम है, साथ ही ये घाव संक्रमण की संभावना को भी कम करता है. इन निष्कर्षों की वजह से ही, दोनों विश्व युद्धों के दौरान एंटीसेप्टिक और आंतों में संक्रमण के इलाज के लिए लहसुन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था.
साल 2010 में, वैश्विक स्तर पर लहसुन का उत्पाद 17.6 मिलियन टन पहुंच गया जिसमें चीन सबसे आगे था. चीन ने 13.6 मिलियन टन लहसुन का उत्पादन अकेले किया था.