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गलवान नदी की यह घाटी लद्दाख और अक्साई-चिन के बीच, एलएसी के नजदीक स्थित है. लेह से यह घाटी भारत की तरफ लद्दाख से लेकर चीन के दक्षिणी शिनजियांग तक फैली है. गलवान नदी की ये घाटी दिल्ली से करीब 1156 किलोमीटर दूर है, जबकि लेह से इस घाटी का DISTANCE 219 किलोमीटर का है. यह क्षेत्र भारत के लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं. इसके नजदीक से ही एक रास्ता सियाचिन की तरफ जाता है. इस घाटी के एक तरफ पाकिस्तानी की सरहद है तो दूसरी तरफ चीन की. चारों तरफ बर्फीली वादियों से घिरी Galwan Valley में ही श्योक और गलवान नदियों का मिलन होता है।
इसको लेकर भी इतिहास के पन्नों में कई किस्से पढ़ने को मिलते है. इस घाटी का नाम लद्दाख के रहने वाले चरवाहे गुलाम रसूल गलवान के नाम पर रखा गया. यह एक ऐतिहासिक घटना थी जब किसी नदी या घाटी का नाम उसकी तलाश करने वाले एक चरवाहे के नाम पर रखा गया.
भारत-चीन सीमा पर मौजूद इस घाटी का इतिहास देखें तो पता चलता है कि गलवान समुदाय और सर्वेंटस ऑफ साहिब किताब के लेखक गुलाम रसूल गलवान इसके असली नायक हैं. उन्होंने ही ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1899 में सीमा पर मौजूद नदी के स्रोत का पता लगाया था. 1899 में, वह ब्रिटिश एक्सपीडिशन टीम का हिस्सा थे और Chang Chenmo valley के उत्तर में, एक्सप्लोर की गतिविधि में जुटे थे.
नदी के स्रोत का पता लगाने वाले दल का नेतृत्व गुलाम रसूल गलवान ने किया था इसलिए नदी और उसकी घाटी को गलवान बोला जाता है. वह उस दल का हिस्सा थे, जो चांग छेन्मो घाटी के उत्तर में स्थित इलाकों का पता लगाने के लिए तैनात किया गया था. हालांकि मौजूदा समय में लेह के चंस्पा योरतुंग सर्कुलर रोड पर गुलाम रसूल के पूर्वजों का घर है. उनके नाम पर यहां गलवान गेस्ट हॉउस भी है. अभी यहां उनकी चौथी पीढ़ी के कुछ सदस्य रहते हैं
यह वो इलाका है जहां दिल्ली की भीषण गर्मी के मौसम में भी तापमान शून्य या उससे नीचे रहता है. दिसंबर-जनवरी के महीनों में गलवान घाटी का तापमान -20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. गला देने वाली ठंड में भी जवान सीमा की सुरक्षा में यहां तैनात रहते हैं. इस सीमा की सुरक्षा का जिम्मा ITBP (भारत-तिब्बत सीमा बल) के जिम्मे है. सीमा पर तैनाती के दौरान उन्हें बर्फीले तूफान और हिमस्खलन का सामना भी करना पड़ता है.
दुनिया के सबसे मुश्किल युद्ध क्षेत्र में तैनात रहने वाले इन भारतीय जवानों को खास तकनीक से बनी किट दी जाती है, जिसकी मदद से वो खुद को इस जानलेवा मौसम में भी जीवित रखते हैं. गलवान घाटी और लद्दाख के शहरी इलाकों के तापमान में जमीन-आसमान का अंतर पाया जाता है. जब गलवान में पारा शून्य से नीचे रहता है, वहीं लद्दाख के शहरी इलाकों में तापमान 12 डिग्री रहता है.
Galwan Valley पहले भी चर्चा में रही है, जब 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था. इस युद्ध में भारत के कई सैनिक शहीद हो गए थे.. इस घाटी में चीनी सेना ने उस समय भी भारत को धोखा दिया था.
Galwan River : Galwan River अक्साई चिन से भारत के लद्दाख क्षेत्र में बहती है. ये Samzungling के इलाके से शुरू होती है. Karaoram Range की पहाड़ियों के पूर्वी छोर से बहती हुई ये नदी पश्चिम की तरफ बहकर बाद में Shyok River में मिलती है. ये फिर सिंधु नदीं में मिल जाती हैं. इस नदी की लंबाई 80 किलोमीटर की है.
चीन गलवान घाटी में भारत के निर्माण को गैर-कानूनी मानता है, क्योंकि भारत-चीन के बीच एक समझौता हुआ है कि एलएसी (लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल) को मानेंगे और उसमें नये निर्माण नहीं करेंगे। लेकिन, चीन वहां पहले से ही सब बातों को दरकिनार करते हुए जरूरी सैन्य निर्माण कर चुका है, और अब वह मौजूदा स्थिति बनाये रखने की बात कर रहा है। अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अब भारत भी वहां पर सामरिक निर्माण करना चाहता है.
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