Teerth Yatra

Govardhan Parikrama: जानें गोवर्धन परिक्रमा के 10 नियम

Govardhan Parikrama : उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक पवित्र स्थान स्थित है – गोवर्धन पर्वत… ये एक पहाड़ी है जिसे भगवान कृष्ण ने अपनी उंगली पर उठाया था. हर दिन, दुनिया भर से भक्त पहाड़ी की परिक्रमा करने के लिए इस स्थान पर आते हैं. हालांकि, गुरु पूर्णिमा और गोवर्धन पूजा के पवित्र अवसरों पर भक्तों की भारी भीड़ यहां देखी जा सकती है. यहां की पूरी परिक्रमा लगभग 23 किमी की है जिसे पूरा होने में लगभग 5-6 घंटे लगते हैं.

यह मानसी-गंगा कुंड से शुरू होता है और भगवान हरिदेव की तीर्थ यात्रा करते हुए, यात्रा राधा कुंड गांव की ओर जाती है जहां वृंदावन रोड भक्तों को परिक्रमा पथ पर ले जाता है. उत्तर प्रदेश में इस  पवित्र तीर्थयात्रा के रास्ते में, कई महत्वपूर्ण पवित्र स्थलों को शामिल किया गया है, इनमें राधा कुंड, श्यामा कुंड, दान घाटी मंदिर, मुखरविंद, कुसुमा सरोवर, रिनामोचना और पुचारी शामिल हैं. हालांकि, परिक्रमा पूरी करने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं है.

दंडवत परिक्रमा || Prostrate circumambulation

जो लोग दंडवत परिक्रमा करते हैं, उन्हें इसे पूरा करने में हफ्तों तो कभी महीनों लग जाते हैं. दंडवत परिक्रमा में, भक्त जमीन पर लेटकर भगवान को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं. एक व्यक्ति उस स्थान को चिह्नित करता है जहां भक्त के हाथों की उंगलियां लेटते समय जमीन को छूती हैं. चिन्हित स्थान से वही प्रक्रिया दोहराई जाती है और इसी प्रकार गोवर्धन परिक्रमा का पूरा मार्ग कंप्लीट किया जाता है. कुछ साधु ऐसे भी होते हैं जो एक ही स्थान पर 108 पूजा करते हैं, ऐसे में वे 108 दंडवत परिक्रमा करते हैं.

गोवर्धन परिक्रमा को दूध के साथ किया जाए तो यह और भी पवित्र माना जाता है. अनुष्ठान में, भक्त के पास एक बर्तन होना चाहिए जिसके नीचे एक छेद हो. बर्तन दूध से भरा रहता है. दूध का बर्तन तीर्थयात्री द्वारा ले जाया जाता है, जो एक हाथ में गोवर्धन पहाड़ी के लोकप्रिय हिंदू तीर्थ स्थल की परिक्रमा करते हैं.  इसके साथ ही दूसरे हाथ में अगरबत्ती होती है. गोवर्धन पर्वत की इस पवित्र यात्रा के दौरान, भक्तों को एक व्यक्ति जो उनके परिवार का कोई भी हो सकता है, द्वारा अनुरक्षित किया जाता है. परिक्रमा समाप्त होने तक बर्तन में दूध बचा हुआ होना चाहिए.

Mumbai Pune Vistadome Coach: ये सफर है सुहाना! पुणे-मुंबई रूट पर आ गई कमाल की ट्रेन

गोवर्धन परिक्रमा का इतिहास || History of Govardhan Parikrama

इस संपूर्ण तीर्थयात्रा का पौराणिक महत्व उस समय से है जब भगवान कृष्ण ने क्षेत्र के लोगों को भगवान इंद्र (वर्षा देवता) के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पहाड़ी को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था. इस पूरी घटना ने गोवर्धन को एक धन्य पहाड़ी बना दिया, और इसलिए यह माना जाता है कि जो भी इसकी परिक्रमा करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है.

गोवर्धन परिक्रमा के कुछ नियम || Some rules of Govardhan Parikrama

1- गोवर्धन परिक्रमा एक दिन में पूरी की जा सकती है. अगर आप स्वस्थ हैं तो आप आराम से यह परिक्रमा पूरी कर सकते हैं.
2- परिक्रमा में दंडवत प्रणाम या साष्टांग प्रणाम करते समय शरीर के आठ अंग दोनों भुजाएं, दोनों पैर, दोनों घुटने, सीना, मस्तक और नेत्र जमीन को छूने चाहिए.
3- गोवर्धन परिक्रमा करते समय शुरू  में कम से कम पांच और अंत में कम से कम एक दंडवत या साष्टांग प्रणाम अवश्य करें.
4- गिरिराज जी के कुंडो में स्नान करते समय साबुन, तेल व शैम्पू आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए,
5- गिरिराज जी के कुंडो में स्नान करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
6- गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा शुरू करने और पूरी करने का कोई निश्चित समय नही है. परिक्रमा दिन या रात में कभी भी शुरू की जा सकती है, लेकिन आप जहां से परिक्रमा शुरू करें आपको वहीं परिक्रमा समाप्त करनी होगी.
7- गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते समय लगातार भगवान के नाम का जाप करते रहना चाहिए.
8- शिव पुराण के अनुसार मनुष्य को तीर्थ स्थानों में सदा स्नान ,दान व जप आदि करना चाहिए. क्योंकि स्नान न करने पर रोग, दान न करने पर दरिद्रता और जप न करने पर मूकता का भागी बनना पड़ता है.
9- गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा नंगे पैर की जाती है. परिक्रमा करते समय जूते , चप्पल न पहनें. अगर कोई व्यक्ति कमजोर हो या फिर कोई छोटा बच्चा साथ में हो तो रबड़ की चप्पल या फिर कपड़े के जूते प्रयोग किए जा सकते हैं.
10- गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते समय किसी पर भी क्रोध नहीं करना चाहिए और न हीं किसी को अपशब्द बोलने चाहिए.

Kanwar Yatra: कांवड़ यात्रा कैसे शुरू हुई और इसके पीछे क्या महत्व है, आइए एक नजर डालते हैं

How To Reach Govardhan Parwat || कैसे पहुंचें गोवर्धन पहाड़ी

निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है और कई ऑटो-रिक्शा, साथ ही बसें, वहां से गोवर्धन हिल तक उपलब्ध हैं.

गोवर्धन परिक्रमा पर जाने का सबसे अच्छा समय || Best time to visit Govardhan Parikrama

परिक्रमा साल भर की जा सकती है. हालांकि गोवर्धन परिक्रमा करने का सबसे अच्छा समय सर्दी का मौसम है. गर्मियों और मानसून के विपरीत, सर्दियों के मौसम में सुखद मौसम होता है जो पर्यटन के पक्ष में रहता है. मौसम अक्टूबर के महीने में शुरू होता है और मार्च तक रहता है.

कृपया ध्यान दें: यदि आप सर्दियों के मौसम में परिक्रमा करने की योजना बना रहे हैं, तो इसे सुबह जल्दी शुरू करने की सलाह दी जाती है (यदि यह दंडवत परिक्रमा नहीं कर रहे हैं) ताकि, आप इसे सूर्यास्त से पहले पूरा कर सकें.

Recent Posts

Sindoor Khela:मां दुर्गा की विदाई पर क्यों खेलती हैं महिलाएं सिंदूर?

Sindoor Khela : दुर्गा पूजा का उत्सव पश्चिम बंगाल सहित पूरे देश में धूमधाम से… Read More

1 day ago

Devi Durga Temples in India : भारत में 16 प्रसिद्ध दुर्गा मंदिरों के दर्शन जरूर करें

Devi Durga Temples in India : भारत में देवी दुर्गा के ऐसे मंदिर जहां नवरात्रि… Read More

6 days ago

History of Ramlila Maidan : दिल्ली का वह मैदान, जहां से कई बड़े आंदोलन हुए

History of Ramlila Maidan : दिल्ली का रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) केवल धार्मिक आयोजनों के… Read More

1 week ago

Kali Gandaki River flood in Nepal: हिमालय से निकलकर गंगा में मिलने वाली नदी की पूरी कहानी

History of the Kali Gandaki River: भारत और नेपाल की प्रमुख नदियों में शामिल काली… Read More

1 week ago

सरोजिनी नगर का Shri Vinayak Mandir क्यों है खास? जानें इतिहास और मान्यताएं

Shri Vinayak Mandir : दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित Shri Vinayak Mandir इन दिनों चर्चा… Read More

2 weeks ago