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Panchavaktra Temple in Himachal : बाढ़ में भी नहीं डूबी हिमाचल की पंचवक्त्र मंदिर, नजारा देख लोग हो रहे हैरान, जानें मंदिर के बारे में

Panchavaktra Temple in Himachal : हिमाचल प्रदेश में लगातार जारी मॉनसून के प्रकोप के कारण अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइड हुआ है, जिससे पिछले दो दिनों में कई लोगों की जान चली गई है. इस आपदा से जलविद्युत परियोजनाओं को व्यापक नुकसान हुआ है और सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई है.(Panchavaktra Temple in Himachal ) सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज में भारी बारिश से हुई तबाही कैद है

. वीडियो में सोलन के अश्वनी खड्ड में भयावह लैंडस्लाइड और मनाली में तीन मंजिला होटल ढहते हुए दिखाया गया है. कुल्लू में पानी के तेज बहाव में ट्रकों और वाहनों के बह जाने के साथ-साथ मंडी के थुनाग शहर में बाढ़ के पानी के घुसने की घटनाओं का भी डॉक्यूमेंटेशन किया गया है. ऐसा ही एक वीडियो जो अब वायरल हो गया है, वह मंडी में भगवान शिव के प्रसिद्ध पंचवक्त्र मंदिर का व्यू है, जो चारों ओर बाढ़ के कहर के बावजूद चट्टान की तरह खड़ा है. इस व्यू ने केदारनाथ मंदिर और ऋषिकेश में प्रतिष्ठित शिव प्रतिमा की यादें ताजा कर दी हैं, जो 2013 में उत्तराखंड में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान खड़ी थीं.

पंचवक्त्र मंदिर के बारे में जानें || Know about Panchavaktra Temple

सुकेती और ब्यास नदियों के संगम पर स्थित, पंचवक्त्र मंदिर की शांत सुंदरता देश भर से बड़ी संख्या में को आकर्षित करती है। मंदिर एक विशाल मंच पर खड़ा है और बहुत अच्छी तरह से सुसज्जित है. पंचवक्त्र मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक सर्वोच्च मंदिर हैै.यह मंदिर विशिष्ट शिखर आर्किटेक्चर शैली में बनाया गया है जो आश्चर्यजनक लगता है. मंदिर का नाम भगवान शिव की पंचमुखी प्रतिमा के कारण पड़ा, जिनमें से सामने से देखने पर केवल तीन ही दिखाई देती हैं.

यह संरक्षित स्मारकों में से एक है जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत आता है और इसे राष्ट्रीय स्थल घोषित किया गया है. पंचवक्त्र मंदिर के अंदर भगवान शिव की एक विशाल मूर्ति है. मूर्ति के पांच चेहरे हैं जो भगवान शिव के विभिन्न चरित्रों को दर्शाते हैं – अघोर, ईशान, तत्पुरुष, वामदेव और रुद्र. अंगोरा विनाशकारी प्रकृति है, ईशान सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान है, तत्पुरुष उसका अहंकार है, वामदेव उसका स्त्री पहलू है और रुद्र उसका रचनात्मक और विनाशकारी पहलू है. पंचवक्त्र को इन सभी के मिलन के रूप में परिभाषित किया गया है.

पन्हवक्त्र मंदिर की स्थापना तिथि अभी भी अज्ञात है. ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, मंदिर का जीर्णोद्धार सिद्ध सेन के शासनकाल (1684-1727) में किया गया था क्योंकि यह बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था. मंदिर का मुख्य बरामदा या मंडप 4 सूक्ष्म नक्काशीदार स्तंभों द्वारा समर्थित है.

यह एक शांतिपूर्ण जगह है मंदिर की सुगंध में शांति उतर आती है. यहां मौन ध्यान लोगों को अच्छा मानसिक स्वास्थ्य प्रदान कर सकता है और उनकी आत्मा को शुद्ध कर सकता है. निःसंदेह पंचवक्त्र मंदिर हमारी प्रतिष्ठित विरासत है.

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पंचवक्त्र मंदिर जानें का सबसे अच्छा समय || Best Time To Visit Panchvaktra Temple

पंचवक्त्र मंदिर मंडी की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय मंडी का मौसम आम तौर पर आरामदायक होता है जो पूरे वर्ष गर्मी और ठंड से भरा रहता है. गर्मी की छुट्टियों में मंडी घूमने का सबसे अच्छा समय. यही वह समय है जब छुट्टियों के मजा और खूबसूरती के लिए गर्मी के साथ-साथ ठंडक भी होती है.

पंचवक्त्र मंदिर मंडी कैसे पहुंचें || How To Reach Panchvaktra Mandir Mandi

ट्रेन द्वारा पंचवक्त्र मंदिर मंडी कैसे पहुंचें- मंडी का अपना कोई रेलवे स्टेशन नहीं है और नजदीकी रेलवे घर जोगिंदर नगर में स्थित है जो मंडी से लगभग 55 किमी दूर है. आप ब्रॉड गेज ट्रेन से चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन या कालका जाना भी चुन सकते हैं जो नियमित बस और टैक्सी सेवाओं से जुड़े हुए हैं.

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सड़क मार्ग से छोटी काशी मंडी कैसे पहुंचें: सड़क मार्ग द्वारा मंडी सबसे उपयुक्त ऑप्शन में से एक है. यहां शिमला, चंडीगढ़, पठानकोट और दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है.

प्लेन से छोटी काशी मंडी कैसे पहुंचें: मंडी का नजदीकी हवाई अड्डा भुंतर में कुल्लू हवाई अड्डा है, जो मंडी शहर से लगभग 60 किमी की दूरी पर है. दिल्ली से कुल्लू की उड़ान में लगभग 90 मिनट लगते हैं.

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