Radhavallabh mandir in vrindavan: वृंदावन के राधा वल्लभ मंदिर की पूरी जानकारी आपको इस लेख में मिलेगी. यह एक ऐतिहासिक मंदिर है...
Radhavallabh Mandir in Vrindavan- राधा वल्लभ मंदिर वृंदावन का एक और बहुत फेमस मंदिर है. यह मथुरा रेलवे स्टेशन से 15 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर है. इसकी स्थापना हरिवंश गोस्वामी ने की थी. उन्होंने राधारानी की भक्ति पर जोर देते हुए राधा वल्लभ संप्रदाय की शुरुआत की थी.
इस मंदिर में राधारानी कोई देवी नहीं है, लेकिन उनकी उपस्थिति को दर्शाने के लिए कृष्ण के बगल में एक मुकुट रखा गया है. यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित स्थल की सूची में भी है. राधा वल्लभ का मूल मंदिर 1670 में मुसलमानों द्वारा नष्ट कर दिया गया था और पुराने के बगल में एक नया मंदिर बनाया गया था.
राधावल्लभ मंदिर में नौ दिनों तक चलने वाला राधा अष्टमी महोत्सवल होता है. यह राधिका जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.
पुराना राधावल्लभ मंदिर, जिसे वर्तमान में वृंदावन में हित मंदिर के रूप में जाना जाता है, इसका निर्माण 1585 ई. में हित हरिवंश महाप्रभु के पुत्र श्री वनचंद्र के शिष्य सुंदरदास भटनागर ने किया था. उस समय, देवबंद के सुंदरदास भटनागर अकबर के दरबार के प्रमुख अब्दुल रहीम खानखाना के तहत काम करते थे.
अब्दुल रहीम खानखाना के माध्यम से, सुंदरदास भटनागर को मंदिर निर्माण के लिए लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल करने की शाही अनुमति मिली, जिसका इस्तेमाल उस समय केवल शाही भवनों, शाही महलों और किलों के निर्माण के लिए किया गया था, बल्कि अकबर से इस मंदिर के लिए आर्थिक दान भी प्राप्त किया.
देवबंद में सुंदरदास भटनागर के वंशजों के पास अभी भी मंदिर के दस्तावेज हैं. कहा जाता है कि राजा मान सिंह ने सबसे पहले इस मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया था. लेकिन एक किंवदंती सुनकर कि जो कोई भी इस मंदिर का निर्माण करेगा, उसकी मृत्यु एक वर्ष के भीतर हो जाएगी, वह पीछे हट गए. हालांकि बाद में किंवदंती सच हो गई. सुंदरदास भटनागर जिन्होंने मंदिर का निर्माण किया था, मंदिर का निर्माण पूरा होने के तुरंत बाद, एक वर्ष के भीतर ही उनकी मृत्यु हो गई.
वर्तमान मंदिर, जो पुराने मंदिर से सटा हुआ है, वहीं अब देवता की पूजा की जाती है. यह मंदिर 1871-72 में बनकर तैयार हुआ था. यह वृंदावन में अधिक लोकप्रिय मंदिरों में से एक है. इस मंदिर में राधारानी की कोई देवी नहीं है. वेदी पर एक मुकुट रखा जाता है और इसका उपयोग राधा की पूजा के लिए किया जाता है. पहले राधा को और फिर कृष्ण को अर्पण किया जाता है. वस्त्र भी पहले राधा को और फिर कृष्ण को अर्पित किए जाते हैं.
श्री राधावल्लभ जी मंदिर की अनूठी वास्तुकला: यह मंदिर अपनी आकर्षक वास्तुकला के कारण अलग है जो प्राचीन शैलियों प्रदर्शित करती है.यह लाल बलुआ पत्थरों से बने सबसे पुराने मंदिरों में से एक है, जब वे विशेष रूप से केवल शाही भवनों में उपयोग किए जाते थे.
यह ट्राइफोलियम (मध्य भाग के ऊपर एक गैलरी या आर्केड) की उपस्थिति को प्रदर्शित करता है जो मुगल वास्तुकला के साथ पहचान करता है जबकि अन्य भाग विशुद्ध रूप से हिंदू वास्तुकला के लिए विशिष्ट हैं.
सदियों पुरानी परंपराएं और विरासत इस राधावल्लभ मंदिर को वृंदावन में सबसे अधिक देखे जाने वाले मंदिरों में से एक बनाती है. अद्वितीय भव्यता और आस्था के साथ हर साल आयोजित होने वाले कई त्योहारों की एक झलक मिल सकती है.
हितोत्सव: .यहां हितोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. यह श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी की जयंती के रूप में ग्यारह दिनों तक चलने वाला उत्सव है. मुख्य आकर्षण ‘दधी कांडो’ की रस्म है जिसमें केसर और चंदन के पेस्ट के साथ दही को भक्तों पर छिड़का जाता है.
राधा अष्टमी: राधा वल्लभ मंदिर में एक और वार्षिक आयोजन राधा रानी जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में नौ दिनों तक चलने वाला राधा अष्टमी उत्सव है. यह भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) के पांचवें दिन से शुरू होता है. आप इस भव्य समारोह का हिस्सा बन सकते हैं .
प्रभु वनचंद्र जी की डोल: श्री राधावल्लभ मंदिर के पास में प्रभु वनचंद्र जी की पालकी या झूला है जो श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी के ज्येष्ठ पुत्र थे. इस स्थान पर नियमित रूप से भगवान कृष्ण और राधा रानी की ‘रास लीला’ को दर्शाने वाले विभिन्न प्रदर्शन देखे जा सकते हैं. यह स्थान राधावल्लभ संप्रदाय के भक्तों के बीच अत्यधिक श्रद्धा रखता है.
श्री राधा वल्लभ जी के मंदिर में सप्ताह के सभी दिनों में सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और फिर शाम 6:00 से 9:00 बजे तक दर्शन किए जा सकते हैं. मंदिर के दर्शन के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है.
राधावल्लभ जी के मंदिर में दर्शन करने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से दिसंबर और फरवरी से अप्रैल तक है जब पूरे दिन टेप्रेचर नार्मल रहता है.
राधा वल्लभ मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले में स्थित है. मथुरा पहुंचने के लिए कोलकाता, मुंबई, चेन्नई, बैंगलोर, नोएडा, आगरा, दिल्ली, जयपुर और लखनऊ आदि से सड़क, ट्रेन और हवाई परिवहन सेवाएं उपलब्ध हैं.
मथुरा का नजदीकी हवाई अड्डा आगरा हवाई अड्डा है. हालांकि, बहुत कम यात्री उड़ानें यहां संचालित होती हैं, मथुरा का प्रमुख नजदीकी इंटरनेशनल हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली है. पर्यटक किसी भी शहर से दिल्ली के लिए उड़ान भर सकते हैं और फिर मथुरा पहुंचने के लिए बस, टैक्सी या ट्रेन का इस्तेमाल कर सकते हैं.
नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा रेलवे स्टेशन है जो राधा वल्लभ मंदिर (वृंदावन) से सिर्फ 15 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर है. यहां उतरकर आप प्राइवेट टैक्सी, ऑटो बुक कर सकते हैं.
यमुना एक्सप्रेसवे,नेशनल हाईवे-19 (जीटी रोड) मथुरा (उत्तर प्रदेश) को भारत के अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ता है.
दोस्तों, कैसे हैं आप सभी? इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे Tawang से Zemithang गांव… Read More
Monsoon Diet मानसून में कुछ सब्जियां खाने से Food Poisoning और पेट के संक्रमण का… Read More
Sawan 2026 Date: जानें सावन 2026 कब से कब तक रहेगा। पढ़ें सावन सोमवार (Shravan… Read More
Jagannath Rath Yatra 2026: जानिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन रथों का आध्यात्मिक… Read More
Nuranang Waterfall (Jang Falls) in Tawang: जानिए नूरानंग वॉटरफॉल का इतिहास, 1962 भारत-चीन युद्ध से… Read More
Tilak Benefits: क्या अलग-अलग उंगलियों से तिलक लगाने का अलग महत्व होता है? जानिए धार्मिक… Read More